... ब्रेकिंग पत्रवार्ता : मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज ने वैश्विक युद्ध रोकने का दिया मूल मंत्र, हर भारतीय शांति की सामूहिक भावना जागृत करे — शंका समाधान कार्यक्रम में दिए प्रेरक संदेश।

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ब्रेकिंग पत्रवार्ता : मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज ने वैश्विक युद्ध रोकने का दिया मूल मंत्र, हर भारतीय शांति की सामूहिक भावना जागृत करे — शंका समाधान कार्यक्रम में दिए प्रेरक संदेश।

 


जशपुर, टीम पत्रवार्ता, 15 मार्च 2026 

बगीचा प्रवास के दौरान दिगम्बर जैन धर्मशाला में आयोजित शंका समाधान कार्यक्रम में मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज ने विश्व में बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंकाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वैश्विक शांति का मार्ग भारत की आध्यात्मिक परंपरा से ही निकल सकता है। उन्होंने कहा कि यदि हर भारतीय अपने भीतर शांति, संयम और करुणा की सामूहिक भावना जागृत करे तो विश्व में युद्ध की स्थिति को रोका जा सकता है। मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य के विचार, व्यवहार और जीवन शैली में अहिंसा और सद्भाव का विस्तार ही विश्व शांति का मूल मंत्र है।

बगीचा प्रवास के दौरान दिगम्बर जैन धर्मशाला में दोपहर 2 बजे से मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज का शंका समाधान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जैन समाज के अनुयायियों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस दौरान उपस्थित लोगों ने मुनिश्री से जीवन, परिवार, संस्कार और आध्यात्म से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने सरल और सटीक उत्तर देकर समाधान किया।

मुनिश्री ने अपने समाधान में कहा कि “बड़े छोटों का ध्यान रखें और छोटे बड़ों का मान रखें”, इससे परिवार और समाज में आपसी आदर, सम्मान और स्नेह की भावना बढ़ती है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति समय का दुरुपयोग करता है वह अपने जीवन का विकास नहीं कर सकता। इसलिए हर पल को सद्कार्यों में लगाना चाहिए।

श्रद्धालुओं ने जब जीवन में खालीपन दूर करने का उपाय पूछा तो मुनिश्री ने कहा कि पहले यह समझना जरूरी है कि खालीपन क्यों है। यदि अकेलेपन, असंतोष या काम की कमी के कारण यह स्थिति बनती है तो व्यक्ति को कर्म सिद्धांत पर विश्वास रखते हुए निरंतर सक्रिय रहना चाहिए। उन्होंने रचनात्मक कार्य करने, नियमित स्वाध्याय और सत्संग में जुड़ने की सलाह दी, जिससे जीवन का खालीपन दूर हो सकता है।

जन्मदिन मनाने की आधुनिक पाश्चात्य परंपरा पर उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में जन्मदिन को पुण्यवर्धन के रूप में मनाना चाहिए। जन्मदिन की शुरुआत भगवान के मंदिर में पूजन-दर्शन से होनी चाहिए। जन्मदिन मनाने वाले को तिलक लगाकर आशीर्वाद दिया जाए, अक्षत की वर्षा की जाए और दीप जलाकर “तमसो मा ज्योतिर्गमय” का संकल्प लिया जाए, अर्थात अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश दिया जाए।

उन्होंने कहा कि जन्मदिन के अवसर पर बच्चों में संवेदना और सेवा की भावना जगाने के लिए उन्हें सेवा कार्यों से जोड़ना चाहिए, जैसे अस्पताल में फल वितरण, गरीबों को वस्त्र दान या अन्य सेवा कार्य। समाज में ऐसे कार्य करें जिससे सुगंध फैले, धुआं नहीं।

बच्चों के रोल मॉडल के संबंध में मुनिश्री ने कहा कि बच्चे का पहला और सबसे बड़ा आदर्श उसके माता-पिता होते हैं। इसलिए माता-पिता को स्वयं को तपाकर आदर्श जीवन प्रस्तुत करना चाहिए, तभी बच्चों में अच्छे संस्कार और सद्गुण विकसित होंगे।

इस अवसर पर सकल दिगम्बर जैन समाज की महिलाओं ने मंदिर प्रांगण में छोटे बच्चों के लिए पाठशाला प्रारंभ करने का संकल्प लिया, जिसका विधिवत शुभारंभ भी किया गया। समाज के अध्यक्ष सज्जन जैन ने इस पहल में हर प्रकार से सहयोग देने का आश्वासन दिया। वहीं विमल जैन एवं अभिषेक जैन के परिवार ने आचार्य विहार के लिए पांच डिसमिल भूमि समाज के नाम दान करने तथा उस पर निर्माण कराने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान मुनिश्री द्वारा सभी का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।

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