... खबर पत्रवार्ता : जशपुर के डॉ. धीरेंद्र अग्रवाल पर कथित रिश्वत का वायरल वीडियो, जिला जांच समिति ने जुटाए डिजिटल साक्ष्य, शपथपूर्वक बयान में मुकेश्वर ने कहा फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए मांगे एक हजार ....।

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खबर पत्रवार्ता : जशपुर के डॉ. धीरेंद्र अग्रवाल पर कथित रिश्वत का वायरल वीडियो, जिला जांच समिति ने जुटाए डिजिटल साक्ष्य, शपथपूर्वक बयान में मुकेश्वर ने कहा फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए मांगे एक हजार ....।

 


जशपुर,टीम पत्रवार्ता,02 सितंबर 2026

जिला चिकित्सालय जशपुर में पदस्थ डॉ. धीरेंद्र कुमार अग्रवाल पर चिकित्सा फिटनेस प्रमाण पत्र बनाने के एवज में कथित रूप से रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों की जांच अब दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों तक पहुंच गई है। मामले में सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने जांच समिति गठित की। समिति के समक्ष शिकायतकर्ता मुकेश्वर राम का शपथपूर्वक बयान दर्ज किया गया, वहीं कथित घटना से संबंधित वीडियो को भी डिजिटल साक्ष्य के रूप में रिकॉर्ड पर लिया गया है।

फिटनेस प्रमाण पत्र के लिए ₹1 हजार मांगने का दावा

मुकेश्वर राम ने जांच समिति के समक्ष दिए अपने शपथपूर्वक कथन में बताया कि 4 जुलाई 2026 को वह अपने दोस्त सहिन्द्र राम और करिश्मा बाई के साथ जिला अस्पताल जशपुर पहुंचे थे। करिश्मा बाई को पोस्ट मैट्रिक छात्रावास में प्रवेश के लिए चिकित्सा फिटनेस प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी।

मुकेश्वर के बयान के अनुसार, डॉ. धीरेंद्र अग्रवाल से फिटनेस प्रमाण पत्र बनाने के लिए संपर्क किया गया। आरोप है कि डॉक्टर ने प्रमाण पत्र बनाने के बदले ₹1,000 की मांग की। जब उनके द्वारा तत्काल पैसे नहीं होने की बात कही गई तो कथित रूप से प्रमाण पत्र नहीं बनाने की बात कही गई।

बयान में मुकेश्वर ने आगे बताया कि छात्रावास में प्रवेश के लिए प्रमाण पत्र आवश्यक होने के कारण उनके साथ मौजूद सहिन्द्र राम के पास रखे ₹500 दिए गए, जिसके बाद डॉक्टर ने फिटनेस प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर किए।

घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग का भी दावा

शपथपूर्वक बयान में मुकेश्वर राम ने दावा किया कि उन्होंने पूरी घटना को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया था। उन्होंने इस वीडियो रिकॉर्डिंग को जांच के दौरान साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने की बात कही है।

मामले से संबंधित सामने आए इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रमाण-पत्र में वीडियो फाइल का नाम दर्ज है। दस्तावेज में फाइल का आकार और उसके विवरण भी दर्ज किए गए हैं। दस्तावेज में मुकेश्वर राम को इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति बताया गया है।

इससे यह सामने आता है कि जांच में कथित वायरल वीडियो को केवल सोशल मीडिया सामग्री के तौर पर नहीं, बल्कि डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों के साथ जांच प्रक्रिया में शामिल किया गया है।

10 जुलाई को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत

मुकेश्वर राम ने अपने शपथपूर्वक कथन में बताया है कि घटना के बाद उन्होंने 10 जुलाई 2026 को शाम लगभग 5:30 बजे सीएम हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत की थी।

इसके बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, जशपुर की ओर से 29 जुलाई 2026 को पत्र जारी कर मुकेश्वर राम और सेन्द्रा राम को जांच समिति की बैठक में उपस्थित होने के लिए कहा गया।

पत्र में डॉ. धीरेंद्र कुमार अग्रवाल के विरुद्ध की गई शिकायत की विस्तृत जांच के लिए जांच समिति गठित किए जाने का उल्लेख है।

जांच समिति की बैठक 31 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे कलेक्टर कार्यालय, जशपुर के कक्ष क्रमांक 37 में आयोजित की गई। इसी जांच प्रक्रिया में मुकेश्वर राम का शपथपूर्वक कथन दर्ज किया गया।

जीरो टॉलरेंस की नीति के बीच प्रशासन की कार्रवाई पर नजर

प्रदेश सरकार की ओर से भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर लगातार जोर दिया जाता रहा है। ऐसे में जिला अस्पताल के डॉक्टर से जुड़े कथित रिश्वतखोरी के इस मामले में शिकायत के बाद जांच समिति का गठन, शिकायतकर्ता का शपथपूर्वक बयान और डिजिटल रिकॉर्ड से संबंधित दस्तावेज जुटाया जाना जांच की गंभीरता को दर्शाता है।

अब जांच समिति के सामने चुनौती वीडियो की वास्तविकता, उसमें दर्ज घटनाक्रम, शिकायतकर्ता के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण कर निष्कर्ष तक पहुंचने की है।

फिलहाल डॉ. धीरेंद्र कुमार अग्रवाल पर लगाए गए रिश्वत के आरोप जांच के अधीन हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच समिति की रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। मामले में डॉक्टर का पक्ष और जांच समिति का अंतिम निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण होगा।

बड़ा सवाल यह है कि क्या वायरल वीडियो और शपथपूर्वक बयान में किए गए दावे जांच में सही साबित होंगे? क्या डिजिटल साक्ष्य के परीक्षण के बाद डॉ. अग्रवाल पर कार्रवाई होगी?अब नजर जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट और प्रशासन के अगले कदम पर है।

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