जशपुर,टीम पत्रवार्ता,16 अगस्त 2026
करीब दो दशक से लंबित जशपुर जिले का बहुचर्चित कुनकुरी चावल घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो रायपुर ने मामले की लंबी विवेचना के बाद 6 अगस्त 2026 को चालान तैयार कर 14 अगस्त को विशेष न्यायालय जशपुर में अंतिम प्रतिवेदन चालान पेश कर दिया है। करीब 40 हजार पन्नों के दस्तावेज और 92 गवाहों की सूची के साथ पेश किए गए इस चालान के बाद अब मामले की न्यायालयीन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
मामले में सुनील कुमार निगम और विमल कुमार गर्ग के विरुद्ध विवेचना पूरी कर चालान पेश किया गया है। वहीं तीसरे आरोपी शिव शंकर वैष्णव की वर्ष 2009 में मृत्यु हो चुकी है।
2005 में दर्ज हुई थी FIR
कुनकुरी शासकीय खाद्यान्न गोदाम में चावल के स्टॉक में कथित अनियमितता और कमी को लेकर EOW में FIR क्रमांक 01/2005, दिनांक 30 सितंबर 2005 दर्ज की गई थी। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 409, 420, 467, 468 और 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अपराध का उल्लेख किया गया है।
जांच में सामने आई हजारों क्विंटल चावल की कमी
विवेचना के दौरान गोदाम के रजिस्टर, पंजी और अन्य दस्तावेजों के साथ खाद्यान्न के भौतिक स्टॉक का मिलान किया गया। प्रारंभिक विभागीय गणना में 26,626.42 क्विंटल चावल की कमी सामने आई थी।
बाद में संयुक्त जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के आधार पर अंतिम विवेचना में 22,198.52 क्विंटल चावल की वास्तविक कमी का उल्लेख किया गया है। जांच रिपोर्ट में इस कमी के कारण शासन को आर्थिक क्षति होने की बात कही गई है।
2 लाख क्विंटल से ज्यादा चावल के आवक-जावक की जांच
विवेचना में 1 अप्रैल 2004 से 10 सितंबर 2005 के बीच कुनकुरी प्रदाय केंद्र और गोदाम में चावल की आवक-जावक से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए।
जांच दस्तावेजों के अनुसार इस अवधि में एलआरटी और कस्टम मिलिंग राइस (CMR) के माध्यम से करीब 2,07,411.04 क्विंटल चावल जमा किए जाने का रिकॉर्ड मिला। इसके अलावा बीपीएल, एपीएल, अंत्योदय, अन्नपूर्णा, मध्यान्ह भोजन, संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना, राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम और सूखा राहत योजना समेत विभिन्न योजनाओं में चावल वितरण के रिकॉर्ड की भी जांच की गई।
आरोपियों की भूमिका का भी उल्लेख
अंतिम विवेचना में सुनील कुमार निगम, शिव शंकर वैष्णव और विमल कुमार गर्ग की भूमिकाओं का उल्लेख किया गया है। जांच के अनुसार वास्तविक स्थिति से अलग दस्तावेज और अभिलेख तैयार अथवा संधारित किए जाने और उनके उपयोग की बात सामने आई।
सुनील कुमार निगम और शिव शंकर वैष्णव को गोदाम के खाद्यान्न स्टॉक पर पद के अनुसार नियंत्रण रखने और महत्वपूर्ण भूमिका में बताया गया है। वहीं विमल कुमार गर्ग के संबंध में 18 डिलीवरी ऑर्डरों से जुड़े 310.13 क्विंटल चावल के परिवहन और कथित वितरण का उल्लेख किया गया है।
2006 में हुई थी गिरफ्तारी
मामले में सुनील कुमार निगम को 29 अगस्त 2006 और विमल कुमार गर्ग को 10 अक्टूबर 2006 को गिरफ्तार किया गया था। दोनों आरोपी बाद में न्यायालय के आदेश पर जमानत पर रहे।
करीब 20 साल तक चली विवेचना के बाद अब चालान पेश होने से इस पुराने मामले की न्यायालयीन प्रक्रिया एक नए चरण में पहुंच गई है।
एक आरोपी की 2009 में मौत
प्रकरण के तीसरे आरोपी शिव शंकर वैष्णव की 1 सितंबर 2009 को मृत्यु हो चुकी है। अंतिम प्रतिवेदन में उनकी मृत्यु का उल्लेख करते हुए मृत्यु प्रमाणपत्र सहित संबंधित दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत किए गए हैं।
40 हजार पन्ने, 92 गवाह
आरोपियों की ओर से अधिवक्ता जय नारायण प्रसाद ने बताया कि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी वर्ष 2006 में हुई थी और वे न्यायालय के आदेशानुसार जमानत पर हैं। उनके अनुसार करीब 20 साल बाद लगभग 40 हजार पन्नों के दस्तावेज और 92 गवाहों की सूची के साथ चालान न्यायालय में पेश किया गया है।
अब अदालत में होगी अगली कार्रवाई
करीब दो दशक की विवेचना के बाद चालान पेश होने से कुनकुरी का यह बहुचर्चित मामला फिर चर्चा में आ गया है। अब विशेष न्यायालय जशपुर में प्रकरण की आगे की न्यायालयीन प्रक्रिया होगी।
हालांकि जांच में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों, गवाहों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर ही होगा।


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