... राजनीति @पत्रवार्ता : सागर के हिलोरों में डुबकी लगाती कांग्रेस, खेवनहार कौन? जशपुर में पक रही सियासी खिचड़ी की महक दिल्ली दरबार तक, संगठन से लेकर दावेदारी तक शुरू हुई नई गोलबंदी

ख़बरों के लिए 7000026456 पर व्हाट्सप करें

राजनीति @पत्रवार्ता : सागर के हिलोरों में डुबकी लगाती कांग्रेस, खेवनहार कौन? जशपुर में पक रही सियासी खिचड़ी की महक दिल्ली दरबार तक, संगठन से लेकर दावेदारी तक शुरू हुई नई गोलबंदी


योगेश थवाईत।जशपुर

जशपुर का मौसम इन दिनों बड़ा सुहावना है। पहाड़ों पर बादल हैं, हवाओं में ठंडक है और राजनीति के तालाब में... हिलोरें।

सोचा, मौसम का फायदा उठाया जाए और जशपुर की राजनीति के उसी तालाब में एक नजर डाल ली जाए। आखिर सवाल बड़ा है.... कांग्रेस की नैया का खेवनहार कौन?

जब से जशपुर जिले को प्रदेश की सत्ता की कमान मिली है, जिले की राजनीति कुछ शांत-सी दिखाई दे रही है। सत्ता पक्ष के समर्थक अपने-अपने हिसाब से भविष्य की जमीन मजबूत करने में व्यस्त हैं। आखिर राजनीति अपनी जगह है और घर-परिवार की चिंता अपनी जगह।

दूसरी ओर, जो संगठन की दौड़ में पीछे रह गए, वे अब स्वाभिमान की चादर ओढ़कर अगली पारी की तैयारी में जुटे हैं। कुछ चेहरे अभी भी इंतजार में हैं....शायद कभी आसमान फटे और टिकट, पद या कोई बड़ी जिम्मेदारी सीधे गोद में आ गिरे!

लेकिन इतना तय है कि जशपुर को प्रदेश नेतृत्व मिलना अपने आप में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम है। भाजपा ने संगठन के बूते जिस तरह जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर कब्जा जमाया, उसने जशपुर की राजनीतिक हैसियत को और बढ़ा दिया है।

पहले भाजपा की पतवार देखिए...

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की तीनों सीटों पर जीत के दौरान संगठन की कमान संभालने वाले सुनील गुप्ता का नाम स्वाभाविक रूप से चर्चा में आता है। जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी पूरी होने के बाद उन्हें सरगुजा संभाग की जिम्मेदारी मिलना संगठन में उनकी भूमिका का विस्तार माना जा रहा है।

आगे कोई नई जिम्मेदारी मिले तो राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर आश्चर्य शायद ही होगा।

अब जिलाध्यक्ष भरत सिंह हैं। और उनकी राजनीति का एक खास पहलू है....हिंदुत्व के मुद्दे पर संगठन को एकजुट रखने की कोशिश। भाजपा की अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं अपनी जगह हैं, लेकिन चुनावी मैदान में जब हिंदुत्व का सवाल आता है तो संगठन का बड़ा हिस्सा एक मंच पर दिखाई देता है।

यही भाजपा की ताकत है और कांग्रेस की बड़ी चुनौती भी।

अब आइए कांग्रेस के सागर में...

जशपुर कांग्रेस की कहानी में एक दिलचस्प मोड़ उस समय आया जब कांग्रेस ने जिले में तीनों विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की।

उस दौर में जिलाध्यक्ष के रूप में पवन अग्रवाल की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विपरीत राजनीतिक माहौल में संगठन को खड़ा करना और तीनों सीटों पर कांग्रेस की जीत तक पहुंचाना आसान काम नहीं था।

लेकिन राजनीति में कुर्सी स्थायी नहीं होती।

संगठन बदला। नेतृत्व का समीकरण बदला। विधायकों को संगठन में ज्यादा महत्व मिला और पवन अग्रवाल की जगह यूडी के करीबी माने जाने वाले मनोज सागर यादव को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली।

यहीं से कांग्रेस के सागर में पहली बड़ी हिलोर उठी।

किस दिशा में नाव गई, यह कांग्रेस के भीतर बैठे लोग शायद हमसे बेहतर जानते हैं!

अब नाव पर यूडी बैठे हैं... लेकिन मंजिल ?

आज कांग्रेस संगठन की कमान यूडी मिंज के हाथों में है। सवाल यह नहीं कि यूडी खेवनहार बन सकते हैं या नहीं। सवाल यह है कि क्या वे पूरे जिले की कांग्रेस को एक नाव में बैठाकर किनारे तक ले जा पाएंगे?

क्योंकि जशपुर कांग्रेस में सबसे बड़ी समस्या शायद नाव की नहीं, नाव में बैठे अलग-अलग यात्रियों की दिशा की है।

जशपुर में एक धड़ा, कुनकुरी में दूसरा समीकरण और पत्थलगांव में अपनी अलग राजनीतिक गणित,ऐसे में जिलाध्यक्ष के सामने चुनौती केवल भाजपा से मुकाबले की नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर समन्वय बैठाने की भी है।

और यही वह जगह है जहां सागर की गहराई शुरू होती है।

विनयशील की एंट्री,सियासत में पैराशूट या नई उड़ान ?

कुनकुरी नगर पंचायत अध्यक्ष विनयशील गुप्ता ने जिस आक्रामक अंदाज में स्थानीय मुद्दों को उठाना शुरू किया है, उससे यह साफ है कि वे राजनीति को दर्शक दीर्घा से देखने वालों में नहीं हैं।

पत्रों के जरिए सवाल, सोशल मीडिया के जरिए हमला और स्थानीय मुद्दों को सत्ता तक पहुंचाने की कोशिश—यह शैली धीरे-धीरे उनकी राजनीतिक पहचान बनाती दिखाई दे रही है।

विरोधियों ने उन्हें कभी अनुभवहीन कहा, कभी पैराशूट लैंडिंग वाला नेता बताया। मगर राजनीति का गणित बड़ा बेरहम है,यहां अनुभव का प्रमाणपत्र जनता देती है, विरोधी नहीं।और विनयशील फिलहाल मैदान में दौड़ रहे हैं।

दिल्ली तक उनकी सक्रियता और राहुल गांधी की टीम के साथ बढ़ती नजदीकी की चर्चा जशपुर की राजनीति में उन्हें आने वाले समय का महत्वपूर्ण चेहरा बना सकती है।

कांग्रेस के पास एक और युवा चेहरा "आशिका कुजूर"

जशपुर के बगीचा क्षेत्र के छोटे से गांव ओड़का से निकलकर जिला पंचायत तक पहुंची आशिका कुजूर की राजनीतिक यात्रा भी कांग्रेस के लिए कम महत्वपूर्ण नहीं है।

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में लंबी दूरी तक साथ चलने वाली युवा पीढ़ी के चेहरों में उनका नाम रहा। प्रदेश युवा कांग्रेस में जिम्मेदारियां और संगठनात्मक भूमिका उन्हें भविष्य की राजनीति के लिए तैयार करती दिखाई देती है।

गांव से शुरू हुई राजनीति यदि दिल्ली तक पहुंचती है, तो उसे सिर्फ संयोग कहकर खारिज करना राजनीतिक भूल होगी।

कांग्रेस के पास शायद यही सबसे बड़ा मौका है,पुराने चेहरों की राजनीति और नए चेहरों की ऊर्जा को एक मंच पर लाना।

विश्व आदिवासी दिवस ने भी दे दिया संकेत ?

इस बार विश्व आदिवासी दिवस पर जशपुर में दिखाई दिया सामाजिक-सामुदायिक उत्साह आने वाले चुनावी समीकरणों का संकेत माना जा सकता है।

उरांव समाज की सक्रियता बढ़ी है और ईसाई आदिवासी समाज से राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग भी लंबे समय से उठती रही है।

कांग्रेस ने पिछले चुनाव में कुनकुरी से यूडी मिंज को मैदान में उतारकर इस समीकरण को साधने की कोशिश की थी। उस प्रयोग ने कांग्रेस को जीत भी दिलाई।हांलाकि इसे यूडी बरक़रार नहीं रख पाए। 

अब सवाल यह है कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस इसी सामाजिक समीकरण को आगे बढ़ाएगी या कोई नया राजनीतिक प्रयोग करेगी?

टिकट का फैसला अभी दूर है, लेकिन टिकट की राजनीति की तैयारी काफी पहले शुरू हो चुकी है।

जशपुर में विनय भगत का वोट बैंक भी भूले नहीं

जशपुर विधानसभा की राजनीति में विनय भगत का दौर भी कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण रहा। कांग्रेस का वोटबैंक 50 हजार के आसपास से आगे बढ़कर 70 हजार के पार पहुंचा—यह बदलाव पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संकेत था।

लेकिन राजनीति में एक वोट बढ़ता है तो दूसरा वोट कहीं और से खिसकता भी है।

हिंदुत्व के मुद्दे पर कांग्रेस की सक्रियता ने उसके परंपरागत मतदाताओं के एक हिस्से को असहज किया,ऐसी राजनीतिक चर्चा भी होती रही। दूसरी ओर भाजपा ने नए मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश की और वर्तमान विधायक रायमुनि भगत ने जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की।

नतीजा सामने है।

कांग्रेस के पास वोट था, भाजपा के पास चुनावी मैनेजमेंट।

कुनकुरी,सबसे गर्म कुर्सी

अब आते हैं उस विधानसभा पर, जहां मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र भी है, भाजपा के जिलाध्यक्ष भी हैं और कांग्रेस के जिलाध्यक्ष भी।

जी हां "कुनकुरी"

यह सीट आने वाले समय में सिर्फ विधानसभा चुनाव का मैदान नहीं होगी, बल्कि संगठनात्मक ताकत की परीक्षा भी होगी।

एक तरफ भाजपा के भरत सिंह, दूसरी ओर कांग्रेस के यूडी मिंज और मैदान में लगातार सवाल उठाते विनयशील गुप्ता।

यहां की राजनीति में अभी बहुत कुछ खुलकर सामने नहीं आया है।

क्योंकि राजनीति में युद्ध से पहले की खामोशी कई बार सबसे ज्यादा शोर करती है।

पत्थलगांव की पहेली

पत्थलगांव में जिला बनाने का मुद्दा कांग्रेस के लिए पुराना राजनीतिक घाव है।

रामपुकार सिंह की हार ने यह साबित किया कि लंबे समय से मजबूत माने जाने वाले राजनीतिक समीकरण भी एक मुद्दे पर उलट सकते हैं।

आज भी पत्थलगांव में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला बेहद रोचक है। विधायक गोमती साय राजनीतिक रूप से अनुभवी हैं और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने में माहिर मानी जाती हैं।

अगर पत्थलगांव जिला बनता है तो यह सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं होगा,इसके राजनीतिक फायदे-नुकसान का हिसाब भी चुनावी पंडित अपनी-अपनी डायरी में लिखेंगे।

कांग्रेस को तब नई रणनीति के साथ मैदान में उतरना पड़ेगा।

तो आखिर कांग्रेस का खेवनहार कौन?

यही तो असली सवाल है।

यूडी मिंज के पास संगठन है और पुराना राजनीतिक अनुभव।

विनयशील गुप्ता के पास युवा आक्रामकता, स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता और संगठन से बाहर अपनी राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश।

आशिका कुजूर के पास युवा और आदिवासी नेतृत्व का चेहरा बनने की संभावनाएं हैं।

वहीं कांग्रेस के पुराने नेताओं के पास अपना अनुभव, जनाधार और राजनीतिक नेटवर्क है।

लेकिन कांग्रेस की सबसे बड़ी जरूरत किसी एक व्यक्ति की नहीं, एक ऐसी टीम की है जो जशपुर की तीनों विधानसभा सीटों को एक राजनीतिक रणनीति में बांध सके।

क्योंकि भाजपा ने जशपुर को सिर्फ चुनावी मैदान नहीं समझा। उसने इसे संगठन की प्रयोगशाला बनाया।

कांग्रेस को भी अब तय करना होगा कि वह सिर्फ चुनाव के समय जागने वाली पार्टी बनेगी या अगले चुनाव से काफी पहले बूथ से लेकर दिल्ली तक अपनी राजनीतिक पटकथा लिखेगी।

फिलहाल जशपुर कांग्रेस के सागर में हिलोरें तेज हैं।

नावें कई हैं। पतवारें भी कई हाथों में हैं।

लेकिन किनारे तक कौन पहुंचेगा?

यह अभी सागर के गर्त में छिपा है।

और राजनीति की सबसे मजेदार बात यही है

जिसका नाम आज खेवनहारों की सूची में नहीं है,जो अपने नाम की तलाश में हैं हो सकता है कल वही पूरी नाव का कप्तान बनकर सामने आ जाए।

जशपुर की राजनीति में अभी मौसम सुहावना है... लेकिन चुनाव तक तूफान आने की पूरी संभावना है।

Post a Comment

0 Comments

Random Posts

पत्रवार्ता में अपनी ख़बरों के लिए 7000026456 पर व्हाट्सप करें

यह भी पढ़ें

खबर पत्रवार्ता : जिस पंचायत में दी सेवा, उसी पंचायत की निस्तारी जमीन पर किया कब्जा! ग्रामीणों में आक्रोश, सचिव दंपति ने उठाया प्रशासनिक शून्यता का फायदा।

जशपुर : ये है जल जीवन मिशन की हकीकत!देखिए ग्राउंड रिपोर्ट