जशपुर, टीम पत्रवार्ता, 31 अगस्त 2026
जशपुर जिले के केरसई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के बाद एक महिला की तबीयत बिगड़ने और करीब एक महीने तक अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चलने के बाद मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतिका प्रफुल्ला हंसड़ा के परिजनों ने केरसई PHC के डॉक्टर और स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
रविवार की रात कटक में महिला की मौत के बाद परिजन सुबह शव लेकर केरसई अस्पताल पहुंचे और अस्पताल परिसर में शव रखकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। मौके पर तहसीलदार, एसडीएम और पुलिस की टीम पहुंची। आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों को स्थानीय प्रशासन ने समझाइश देकर शांत कराया।
29 जुलाई को केरसई PHC में हुआ था प्रसव
परिजनों द्वारा तहसीलदार को दिए गए शिकायत आवेदन के मुताबिक, प्रफुल्ला हंसड़ा का प्रसव 29 जुलाई 2026 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केरसई में हुआ था। आरोप है कि प्रसव के बाद अस्पताल स्टाफ ने महिला को कॉपर-टी लगाया।
परिजनों का दावा है कि कॉपर-टी लगाए जाने के कुछ दिनों बाद महिला को तेज दर्द होने लगा। दर्द की शिकायत लेकर महिला अपने पति के साथ दोबारा केरसई अस्पताल पहुंची और कॉपर-टी निकालने की मांग की। शिकायत के अनुसार, उस समय अस्पताल स्टाफ ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
परिजनों का आरोप है कि उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया गया कि संबंध बनाने के कारण कॉपर-टी अंदर चली गई है। शिकायत में अस्पताल स्टाफ के व्यवहार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
दर्द बढ़ा तो कुनकुरी से रायगढ़ तक भागते रहे परिजन
महिला की तकलीफ बढ़ने पर परिजन उसे कुनकुरी के हॉलीक्रॉस अस्पताल लेकर पहुंचे। सोनोग्राफी के बाद डॉक्टरों ने बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसके बाद महिला को रायगढ़ ले जाया गया, जहां परिजनों के मुताबिक ऑपरेशन कर कॉपर-टी निकाली गई।
लेकिन ऑपरेशन के बाद भी महिला की तकलीफ पूरी तरह खत्म नहीं हुई। घर लौटने के कुछ दिनों बाद तबीयत फिर बिगड़ने पर परिजन उसे ओडिशा के सुंदरगढ़, फिर बुरला और अंततः कटक अस्पताल लेकर पहुंचे। 30 अगस्त की रात कटक में उपचार के दौरान प्रफुल्ला हंसड़ा की मौत हो गई।
'केरसई अस्पताल से ही शुरू हुई गड़बड़ी'- आरोप
मृतिका के परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे मामले की शुरुआत ही केरसई PHC से हुई। उनका कहना है कि अस्पताल में डॉक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ की कार्यप्रणाली और व्यवहार को लेकर पहले से शिकायतें हैं।
परिजनों ने मांग की है कि डिलीवरी के समय ड्यूटी पर मौजूद सभी कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाए और दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो।
शव अस्पताल में रखकर प्रदर्शन, प्रशासन ने कराया शांत
मौत के बाद शव को केरसई अस्पताल परिसर में रखकर परिजनों और ग्रामीणों ने विरोध जताया। मौके पर प्रशासन और पुलिस के अधिकारी पहुंचे और लोगों को समझाइश दी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से डॉक्टरों की टीम गठित कर पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
सीएमएचओ जशपुर जीएस जात्रा ने कहा कि परिजनों ने जो आरोप लगाए हैं, उनकी जांच के लिए टीम गठित की जाएगी। डॉक्टरों की टीम के माध्यम से पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
तहसीलदार को सौंपा शिकायत आवेदन, मुआवजे और कार्रवाई की मांग
परिजनों और ग्रामीणों ने तहसीलदार तपकरा को शिकायत आवेदन सौंपते हुए मृतिका के परिवार को तत्काल मुआवजा देने, उच्चस्तरीय जांच टीम गठित करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
आवेदन में प्रसव के समय ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ को निलंबित करने की मांग भी की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण चक्काजाम कर आंदोलन करेंगे।
सबसे बड़ा सवाल: क्या कॉपर-टी की वजह से बिगड़ी थी हालत?
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि कॉपर-टी लगाने के बाद महिला को हुई तकलीफ, उसके बाद हुए ऑपरेशन और अंततः मौत के बीच क्या सीधा चिकित्सकीय संबंध था? फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
परिजनों के आरोप बेहद गंभीर हैं। अब जांच समिति, मेडिकल रिकॉर्ड, ऑपरेशन की रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट होगा कि महिला की मौत की वास्तविक वजह क्या थी और यदि इलाज में लापरवाही हुई तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है।
केरसई PHC पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच अब स्वास्थ्य विभाग के लिए भी बड़ी चुनौती बन गई है।


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