... खबर पत्रवार्ता : त्रिकुंडा जलाशय हादसा: लापरवाही के आरोपों के बीच बुजुर्ग का शव बरामद, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग।

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खबर पत्रवार्ता : त्रिकुंडा जलाशय हादसा: लापरवाही के आरोपों के बीच बुजुर्ग का शव बरामद, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग।

 

बलरामपुर, टीम पत्रवार्ता,26 अगस्त 2026

त्रिकुंडा जलाशय में तेज बहाव में बहे बुजुर्ग का शव आखिरकार बरामद कर लिया गया है। एनडीआरएफ और रेस्क्यू टीम की कड़ी मशक्कत के बाद शव मिलने से तलाश अभियान समाप्त हुआ, लेकिन हादसे के बाद जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि बुजुर्ग स्लूज गेट से निकल रहे तेज बहाव की चपेट में आकर बह गए थे। आरोप है कि मौके पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी और बिना सेफ्टी बेल्ट तथा लाइफ जैकेट के तेज बहाव वाले क्षेत्र में उतरने की स्थिति बनी। हादसे के बाद विभागीय अधिकारियों की भूमिका को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है।

मामले को लेकर जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता एन.पी. डहरिया के कथित बयान—“शायद नशे में था व्यक्ति”—पर भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। मृतक के परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की गंभीरता के बजाय जिम्मेदारी से बचने वाला रवैया अपनाया गया।

पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह भी मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर ढांढस बंधाया। उन्होंने घटना को गंभीर लापरवाही बताते हुए मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में यह पहली गंभीर घटना नहीं है। चनान नदी और लुत्ती बांध की पूर्व घटनाओं का हवाला देते हुए ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि लगातार हादसों के बावजूद जल संसाधन विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ठोस कदम क्यों नहीं उठाए।

सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि यदि जलाशय का क्षेत्र प्रतिबंधित और संवेदनशील था, तो आम नागरिक वहां तक कैसे पहुंचा? सुरक्षा घेरा, चेतावनी बोर्ड, निगरानी और मौके पर तैनात अमले की भूमिका को लेकर भी जांच की मांग उठ रही है।

घटना के बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल है। ग्रामीणों ने शासन से रामानुजगंज जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर कार्रवाई और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

अब निगाह इस बात पर है कि हादसे के लिए जिम्मेदारी तय होती है या मामला सिर्फ जांच और कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।

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