जशपुर,टीम पत्रवार्ता,02 अक्टूबर 2026
जशपुर जिले में करमा पर्व के आयोजन को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में कुछ लोगों ने जिले के शहरों और गांवों में स्थित चर्च अथवा अन्य अनाधिकृत स्थानों पर करमा पर्व से जुड़े उत्सव, महोत्सव और प्रतियोगिताओं के आयोजन पर पूर्ण रोक लगाने की मांग की है। ज्ञापन में कुछ ईसाई मिशनरियों पर करमा पर्व की धार्मिक परंपरा, आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं।
करमा को आस्था और परंपरा का पर्व बताया
ज्ञापन में कहा गया है कि भादो-कुंवार माह में मनाया जाने वाला करमा पर्व जशपुर के विशेषकर उरांव जनजाति समाज के लिए आस्था और श्रद्धा का महत्वपूर्ण पर्व है। ज्ञापन के अनुसार करमा के अनुयायी विधि-विधान से पूजा-अर्चना और उपवास करते हैं। करम पेड़ की डाल को पारंपरिक गीत और वाद्ययंत्रों के साथ अखड़ा तक लाया जाता है, जहां रातभर करम राजा की उपासना की जाती है।
इसके बाद गांव के घर-घर करम राजा की पूजा-अर्चना तथा निर्धारित विधि से करम डाल का नदी या तालाब में विसर्जन किए जाने का उल्लेख भी ज्ञापन में किया गया है। आवेदनकर्ताओं ने करमा को महज उत्सव या मनोरंजन नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा बताया है।
मिशनरियों पर परंपरा के स्वरूप से छेड़छाड़ का आरोप
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कुछ ईसाई मिशनरियों द्वारा चर्च अथवा अन्य स्थानों पर करमा पर्व को बिना पारंपरिक विधि-विधान के उत्सव, महोत्सव अथवा प्रतियोगिता के रूप में आयोजित किया जा रहा है।
डिलिस्टिंग के मुद्दे का भी ज्ञापन में हवाला
ज्ञापन में डिलिस्टिंग के मुद्दे और वर्ष 2004 के केरल राज्य बनाम चन्द्रमोहनन मामले का उल्लेख करते हुए धर्मांतरित ईसाइयों को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आवेदनकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में कुछ धर्मांतरित ईसाई मिशनरियों द्वारा स्वयं को आदिवासी परंपरा और संस्कृति से जुड़ा दिखाने के उद्देश्य से करमा पर्व का आयोजन किया जा रहा है।
ज्ञापन के अनुसार, कुछ स्थानों पर चर्च अथवा अन्य जगहों पर करम पेड़ की डाल तोड़कर लाई जाती है और बिना पारंपरिक विधि-विधान एवं पूजा-अर्चना के उसे स्थापित किया जाता है।
आवेदनकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इसके बाद ऐसे आयोजनों के वीडियो बनाकर प्रसारित किए जाते हैं तथा करम डाल को बाद में उखाड़कर कहीं भी फेंक दिया जाता है।
आवेदनकर्ताओं ने इसे करमा पर्व के अनुयायियों की धार्मिक आस्था और भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य बताया है। ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि ईसाई धर्म अपनाने के बाद धर्मांतरित लोगों ने जनजातीय तीज-त्योहार, रूढ़ि-प्रथा, धर्म-संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों को छोड़ दिया है, इसलिए करमा पर्व के आयोजन को लेकर आपत्ति जताई गई है।
आवेदनकर्ताओं का दावा है कि कुछ स्थानों पर करम पेड़ की डाल लाकर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तथा उनके वीडियो बनाए और प्रसारित किए जाते हैं। ज्ञापन में ऐसे आयोजनों को करमा पर्व की पारंपरिक आस्था और स्वरूप को प्रभावित करने वाला बताया गया है।
धार्मिक स्थलों और परंपराओं को लेकर भी गंभीर आपत्ति
ज्ञापन में धर्मांतरण के बाद आदिवासी समाज की पारंपरिक रीति-रिवाज, धर्म-संस्कृति और परंपराओं में बदलाव को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। आवेदनकर्ताओं ने धार्मिक ग्रंथों के संदर्भ देते हुए हिंदुओं के पूजा स्थलों और धार्मिक प्रतीकों को नुकसान पहुंचाने अथवा नष्ट करने जैसी बातों को लेकर भी आरोप लगाए हैं।
ज्ञापनकर्ताओं का कहना है कि करमा जैसे आस्था पर्व को अलग स्वरूप में आयोजित किए जाने से पर्व की मूल परंपरा और अनुयायियों की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
2018 की शांति भवन चर्च की करमा प्रतियोगिता का भी उल्लेख
ज्ञापन में 2018 में जशपुर स्थित शांति भवन चर्च में करमा प्रतियोगिता आयोजित किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। आवेदनकर्ताओं के अनुसार उस आयोजन को लेकर मामला तत्कालीन समय में अनुविभागीय अधिकारी जशपुर के समक्ष पहुंचा था।
ज्ञापन में दावा किया गया है कि उस समय आयोजकों की ओर से भविष्य में किसी भी प्रकार के उत्सव, महोत्सव अथवा प्रतियोगिता का आयोजन नहीं किए जाने की बात कही गई थी। इसी पुराने मामले का हवाला देते हुए आवेदनकर्ताओं ने अब जिले में चर्च अथवा अन्य स्थानों पर करमा पर्व से जुड़े आयोजनों पर रोक लगाने की मांग उठाई है।
कलेक्टर से पूर्ण प्रतिबंध की मांग
ज्ञापन में कलेक्टर से मांग की गई है कि जशपुर जिले के किसी भी शहर अथवा गांव में स्थित चर्च या अन्य स्थानों पर करमा पर्व से संबंधित उत्सव, महोत्सव अथवा प्रतियोगिता आयोजित किए जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए तथा इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी किया जाए।
ज्ञापन की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक जशपुर, अनुविभागीय राजस्व दंडाधिकारी, तहसीलदार तथा जिले के संबंधित थाना प्रभारियों को भी भेजी गई है।
प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
ज्ञापन में गंगा राम भगत, अरविंद कुमार भगत, मनीजर राम, गोविंद राम भगत, शारदा प्रधान, कृपाशंकर भगत, लालदेव राम भगत, सियाराम भगत, सिकंदराम भगत, सत्तर राम भगत, अभय बैरागी सहित अन्य लोगों के नाम और हस्ताक्षर दर्ज हैं। दस्तावेज के अनुसार कुल 25 लोगों ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
अब इस शिकायत पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है और क्या मामले की जांच अथवा कोई प्रशासनिक निर्देश जारी किए जाते हैं, इस पर नजर बनी हुई है।


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