जशपुर, टीम पत्रवार्ता, 30 सितंबर 2026
जिले के पत्थलगांव में दो मजदूरों की मौत के बाद भड़का विरोध अब महज हादसे के बाद का प्रदर्शन नहीं रह गया है। 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग, शव लेने से इनकार और एनएच-43 पर चक्काजाम के बीच पत्थलगांव में वर्ष 2021 की वह घटना फिर सुर्खियों में है, जब गौरव अग्रवाल की मौत के बाद इसी शहर में मुआवजे और कार्रवाई को लेकर सड़क से सत्ता तक हड़कंप मच गया था।
फर्क सिर्फ इतना है कि तब सत्ता में कांग्रेस थी और भाजपा विपक्ष में।आज सत्ता भाजपा के हाथ में है और कांग्रेस विपक्ष में।
2021 में गौरव अग्रवाल की मौत के बाद सुलग उठा था पत्थलगांव
अक्टूबर 2021 में पत्थलगांव में दुर्गा विसर्जन जुलूस के दौरान तेज रफ्तार कार की चपेट में आने से गौरव अग्रवाल की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। घटना के बाद पत्थलगांव में जबरदस्त आक्रोश फूट पड़ा था। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गौरव अग्रवाल के परिवार को 50 लाख रुपये की सहयोग राशि देने की घोषणा की थी। पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई भी हुई थी।
उस समय पत्थलगांव के विधायक रामपुकार सिंह कांग्रेस से थे, जबकि भाजपा विपक्ष में थी। घटना के विरोध में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी पत्थलगांव में मोर्चा खोला था। उपलब्ध समकालीन रिपोर्टों में भाजपा के प्रदेश नेता अनुराग सिंह देव,ओपी चौधरी और अन्य भाजपा के दिग्गज नेता धरने में शामिल हुए थे है।
तब मृतक गैर-आदिवासी परिवार से था, आज मृतक आदिवासी परिवारों से हैं।
वर्ष 2021 में मृतक गौरव अग्रवाल गैर-आदिवासी परिवार से थे। उस समय कांग्रेस सरकार ने उनके परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता दी थी। आज भाजपा सरकार के कार्यकाल में जिन दो मजदूरों की मौत हुई है, वे आदिवासी परिवारों से हैं। मृतकों के परिजन और ग्रामीणों का कहना है कि सहायता और न्याय के मामले में परिवारों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
आज सत्ता बदली, सवाल वही
पांच साल बाद पत्थलगांव में फिर दो मौतों के बाद 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग को लेकर सड़क जाम है। इस बार सत्ता में भाजपा सरकार है और पत्थलगांव की विधायक गोमती साय भाजपा से हैं।
हादसे में जान गंवाने वाले दोनों मजदूर आदिवासी परिवारों से हैं। मृतकों के परिजन और ग्रामीण साफ कह रहे हैं कि उन्हें भी 50-50 लाख रुपये का मुआवजा चाहिए।
परिजनों का सवाल सीधा है—यदि वर्ष 2021 में एक गैर-आदिवासी परिवार के युवक की मौत के बाद 50 लाख रुपये की सहायता दी जा सकती है, तो आज आदिवासी मजदूरों की मौत पर वही मदद क्यों नहीं?
उनका कहना है कि मुआवजे के नाम पर आदिवासी परिवारों के साथ दोहरा मापदंड नहीं चल सकता।
कांग्रेस का आरोप: भाजपा सरकार आदिवासी परिवारों की उपेक्षा कर रही
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार आदिवासी परिवारों की उपेक्षा कर रही है। उनका कहना है कि जब गैर-आदिवासी परिवार के मृतक को 50 लाख रुपये की सहायता दी गई थी, तो आज आदिवासी मजदूरों के परिजनों को समान मुआवजा देने में सरकार पीछे क्यों हट रही है।
कांग्रेस का कहना है कि सरकार को मृतकों की सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर नहीं, बल्कि समानता और न्याय के आधार पर मुआवजा तय करना चाहिए।
जिस एनएच-43 पर भाजपा ने कभी धरना दिया था, वहीं आज कांग्रेस का मोर्चा
आज का राजनीतिक दृश्य 2021 से पूरी तरह उलट है। तब भाजपा विपक्ष में रहकर पत्थलगांव में कार्रवाई और मुआवजे की मांग कर रही थी। आज कांग्रेस विपक्ष में है और उसके नेता उसी एनएच-43 पर मृतक परिवारों के समर्थन में धरने पर बैठे हैं।
चक्काजाम में कांग्रेस के तीन पूर्व विधायक रामपुकार सिंह, यूडी मिंज और हृदयराम राठिया शामिल हुए। इनके साथ नगर पंचायत कुनकुरी के अध्यक्ष एवं कांग्रेस नेता विनयशील गुप्ता, डीडीसी आरती सिंह, रत्ना पैंकरा समेत अन्य कांग्रेस नेता और बड़ी संख्या में समर्थक भी मौजूद हैं।
कांग्रेस नेताओं और मृतक परिवारों की मांग है कि दोनों मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये की सहायता दी जाए। साथ ही हादसे के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और विद्युत विभाग के संबंधित जेई के खिलाफ एफआईआर की मांग भी जोर पकड़ रही है।
तब भाजपा सड़क पर थी, आज कांग्रेस सड़क पर है
पत्थलगांव की राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि 50 लाख रुपये का मुआवजा अब सिर्फ राहत की रकम नहीं, बल्कि सियासी कसौटी बन चुका है।
2021 में भाजपा ने गौरव अग्रवाल के परिवार के लिए मुआवजे की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाया था। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 50 लाख रुपये की सहायता की घोषणा की।
आज वही पत्थलगांव भाजपा सरकार के कार्यकाल में दो आदिवासी मजदूरों की मौत के बाद 50 लाख रुपये प्रति परिवार की मांग को लेकर आंदोलन का केंद्र बना हुआ है।
अब लड़ाई रकम की नहीं, बराबरी की है
मृतक परिवारों के लिए यह लड़ाई सिर्फ आर्थिक सहायता की नहीं है। उनके सामने बड़ा सवाल यह भी है कि क्या सरकारें बदलने के साथ मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे का मापदंड भी बदल जाना चाहिए?
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार आदिवासी परिवारों की उपेक्षा कर रही है और उन्हें वही सम्मान व सहायता नहीं दी जा रही, जो पहले गैर-आदिवासी परिवार को दी गई थी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर दोनों परिवारों को 50-50 लाख रुपये की सहायता देनी चाहिए।
प्रशासन मामले में मजिस्ट्रियल जांच की बात कह रहा है। जांच में हादसे की परिस्थितियों, ठेकेदार की भूमिका, विभागीय जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था जैसे पहलुओं की पड़ताल होगी।
फिलहाल परिजन शव लेने से इनकार कर रहे हैं और एनएच-43 पर चक्काजाम जारी है। पत्थलगांव में पांच साल पुरानी 50 लाख रुपये की मिसाल और आज उसी रकम की मांग के बीच सियासत ने करवट ले ली है—लेकिन सवाल अब भी वही है: मुआवजे में बराबरी कब होगी?


0 Comments