... ब्रेकिंग पत्रवार्ता : जशपुर के पाठ क्षेत्र में 3500 मेगावाट के दो पंप भंडारण जलविद्युत प्रोजेक्ट प्रस्तावित,रौनी में 2100 और दनगरी में 1400 मेगावाट की परियोजना, कई गांव और आरक्षित वन क्षेत्र दायरे में,प्रस्ताव सामने आते ही ग्रामीणों में चिंता।

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ब्रेकिंग पत्रवार्ता : जशपुर के पाठ क्षेत्र में 3500 मेगावाट के दो पंप भंडारण जलविद्युत प्रोजेक्ट प्रस्तावित,रौनी में 2100 और दनगरी में 1400 मेगावाट की परियोजना, कई गांव और आरक्षित वन क्षेत्र दायरे में,प्रस्ताव सामने आते ही ग्रामीणों में चिंता।

 


जशपुर, टीम पत्रवार्ता, 26 सितंबर 2026। 

जशपुर के पाठ क्षेत्र में आने वाले दिनों में विकास की एक बड़ी परियोजना आकार ले सकती है, लेकिन इसके साथ ही जमीन, जंगल और जलस्रोतों को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल भी उठने लगे हैं। बगीचा तहसील क्षेत्र में कुल 3500 मेगावाट क्षमता की दो पंप भंडारण जलविद्युत परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें रौनी परियोजना 2100 मेगावाट और दनगरी परियोजना 1400 मेगावाट की है। परियोजनाओं के प्रारंभिक दस्तावेजों में कई गांवों के साथ आरक्षित वन क्षेत्रों का भी उल्लेख है। प्रस्ताव की जानकारी सामने आने के बाद परियोजना क्षेत्र से जुड़े ग्रामीणों और किसानों में अपनी जमीन तथा प्राकृतिक संसाधनों को लेकर चिंता दिखाई देने लगी है।

भारत सरकार के पर्यावरण पोर्टल पर उपलब्ध प्रारंभिक तकनीकी एवं पर्यावरणीय दस्तावेजों के अनुसार दोनों परियोजनाओं को विकसित करने के लिए ऊपरी और निचले जलाशय, भूमिगत बिजलीघर, सुरंगों तथा अन्य संरचनाओं का निर्माण प्रस्तावित है। हालांकि परियोजनाएं अभी प्रारंभिक एवं वैधानिक प्रक्रिया में हैं और भूमि अधिग्रहण तथा प्रभावित परिवारों की अंतिम स्थिति अभी तय नहीं हुई है।

रौनी में 2100 मेगावाट की परियोजना

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार रौनी पंप भंडारण जलविद्युत परियोजना बगीचा तहसील के भट्ठीकोना, रौनी, छिछली तथा राजपुरी आरक्षित वन क्षेत्र में प्रस्तावित है। परियोजना के प्रारंभिक दस्तावेजों में करीब 327.68 हेक्टेयर भूमि का उल्लेख है, जिसमें वन भूमि भी शामिल है।

परियोजना में ऊपरी एवं निचले जलाशय के साथ भूमिगत बिजलीघर, जल सुरंग, दबाव सुरंग तथा अन्य विद्युत संरचनाएं प्रस्तावित हैं। दस्तावेजों के अनुसार ऊपरी जलाशय छिछली क्षेत्र के पास तथा निचला जलाशय रौनी मार्ग स्थित गांगरिया क्षेत्र में डोड़की नाला पर प्रस्तावित है।

रौनी परियोजना में 350-350 मेगावाट की छह प्रतिवर्ती फ्रांसिस जल टरबाइन इकाइयों वाला भूमिगत बिजलीघर प्रस्तावित है। इससे परियोजना की कुल क्षमता 2100 मेगावाट होगी।

दनगरी में 1400 मेगावाट की परियोजना

दूसरी परियोजना दनगरी पंप भंडारण जलविद्युत परियोजना है, जिसकी प्रस्तावित क्षमता 1400 मेगावाट है। उपलब्ध दस्तावेजों में परियोजना का क्षेत्र दनगरी/नवापारा, मड़िया तथा राजपुरी आरक्षित वन क्षेत्र, बगीचा तहसील, जिला जशपुर बताया गया है।

परियोजना के लिए 401.74 हेक्टेयर भूमि का संशोधित आंकड़ा दर्ज है। इसमें 80.03 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है।दनगरी परियोजना में भी ऊपरी एवं निचले जलाशय, भूमिगत बिजलीघर, जल सुरंग, दबाव सुरंग, जलवाहक नलिका और निकासी सुरंग जैसी संरचनाएं प्रस्तावित हैं।

दनगरी परियोजना के लिए हो चुका है समझौता

दनगरी परियोजना के विकास को लेकर 10 मार्च 2025 को टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच समझौता ज्ञापन हुआ था। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

पानी को ऊपर चढ़ाकर जरूरत के समय बनाई जाएगी बिजली

पंप भंडारण परियोजना में बिजली की मांग कम होने के समय पानी को निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय में चढ़ाया जाता है। बिजली की मांग बढ़ने पर ऊपरी जलाशय से पानी नीचे छोड़ा जाता है, जिससे जल टरबाइन घूमती है और बिजली का उत्पादन होता है। इस व्यवस्था का उपयोग बिजली के भंडारण और विद्युत व्यवस्था को संतुलित रखने में किया जाता है।

3500 मेगावाट की क्षमता, जमीन और जंगल पर भी नजर

दोनों परियोजनाओं को मिलाकर बगीचा क्षेत्र में 3500 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता की योजना है। रौनी परियोजना के लिए प्रारंभिक दस्तावेजों में 327.68 हेक्टेयर तथा दनगरी परियोजना के लिए 401.74 हेक्टेयर भूमि का उल्लेख है। दोनों को मिलाकर यह क्षेत्र 729.42 हेक्टेयर होता है। 

दनगरी परियोजना में ही 80.03 हेक्टेयर वन भूमि दर्ज है, जबकि रौनी परियोजना में भी वन भूमि शामिल होने का उल्लेख है।

हालांकि ये आंकड़े परियोजनाओं के प्रारंभिक दस्तावेजों पर आधारित हैं। इन्हें अंतिम भूमि अधिग्रहण या अंतिम प्रभावित क्षेत्र नहीं माना जा सकता। विस्तृत सर्वेक्षण, परियोजना रिपोर्ट, पर्यावरणीय अध्ययन तथा आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

ग्रामीणों में बढ़ी चिंता, विरोध की भी बात सामने आई

परियोजना के प्रस्तावित क्षेत्र से जुड़े किसानों और ग्रामीणों में जमीन, जंगल और जलस्रोतों को लेकर चिंता दिखाई देने लगी है। स्थानीय स्तर पर कुछ ग्रामीणों द्वारा परियोजना का विरोध किए जाने की बात भी सामने आई है। ग्रामीणों की प्रमुख चिंता अपनी जमीन, आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों पर संभावित प्रभाव को लेकर बताई जा रही है।

वहीं परियोजनाओं की प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में होने के कारण भूमि अधिग्रहण, प्रभावित परिवारों और पुनर्वास से संबंधित अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में आने वाले चरणों में विस्तृत सर्वेक्षण और पर्यावरणीय अध्ययन के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि परियोजनाओं का वास्तविक प्रभाव कितने गांवों, कितनी भूमि और कितने परिवारों पर पड़ेगा।

बगीचा के पाठ क्षेत्र में प्रस्तावित 3500 मेगावाट की ये दोनों परियोजनाएं जहां प्रदेश की बिजली व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण प्रस्ताव हैं, वहीं इनके संभावित सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर स्थानीय ग्रामीणों की चिंताएं भी अब सामने आने लगी हैं।

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