... खबर पत्रवार्ता : सिम्स में जटिल लिम्ब रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी सफल, चार साल से पैर की विकृति से जूझ रहे मरीज को मिली राहत।

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खबर पत्रवार्ता : सिम्स में जटिल लिम्ब रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी सफल, चार साल से पैर की विकृति से जूझ रहे मरीज को मिली राहत।

 


रायपुर, टीम पत्रवार्ता, 13 अगस्त 2026/

छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में एक जटिल लिम्ब रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। चार वर्ष पूर्व सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए मरीज कन्हैया के बाएं पैर में उत्पन्न विकृति को सर्जरी के माध्यम से ठीक करने का प्रयास किया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक है तथा उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

मरीज कन्हैया का करीब चार वर्ष पहले एक सड़क दुर्घटना में बाएं पैर में गंभीर फ्रैक्चर हुआ था। निजी अस्पताल में उपचार के दौरान पैर में रॉड एवं प्लेट लगाई गई। 

बाद में जटिलताओं और संक्रमण के कारण एक्सटर्नल फिक्सेटर की सहायता से उपचार किया गया। लगभग एक वर्ष बाद एक्सटर्नल फिक्सेटर को एम्स रायपुर में हटाया गया। इसके बाद मरीज के पैर में टेढ़ापन एवं विकृति उत्पन्न हो गई और उसे पैर पर वजन डालने तथा सामान्य रूप से चलने में परेशानी होने लगी।

पैर की बढ़ती विकृति और कार्यक्षमता में आ रही कमी को देखते हुए मरीज को सिम्स बिलासपुर लाया गया। यहां ऑर्थोपेडिक्स विभाग की टीम ने मरीज की स्थिति का विस्तृत चिकित्सकीय मूल्यांकन किया। जांच के बाद प्रभावित पैर की संरचना को सुधारने और उसकी कार्यक्षमता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जटिल लिम्ब रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी करने का निर्णय लिया गया।

चिकित्सकीय टीम के सामूहिक प्रयास से जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की गई।

सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि सिम्स में गंभीर और जटिल मामलों के उपचार के लिए विभिन्न विशेषज्ञ विभागों की टीम समन्वय के साथ कार्य कर रही है। लिम्ब रिकंस्ट्रक्शन जैसी चुनौतीपूर्ण सर्जरी के सफल परिणाम से मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में सिम्स की क्षमता और विशेषज्ञता मजबूत होती है। हमारा प्रयास है कि मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ संस्थान में ही उपलब्ध कराया जाए।

सिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि जटिल ऑर्थोपेडिक मामलों में समय पर सही मूल्यांकन और विशेषज्ञ उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। सिम्स की टीम ने इस मामले में बेहतर समन्वय के साथ उपचार किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के बाद मरीज की नियमित निगरानी, फिजियोथेरेपी और चिकित्सकों द्वारा बताए गए उपचार का पालन उसकी आगे की रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मरीज का संपूर्ण उपचार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पूर्णतः निःशुल्क किया गया। सर्जरी का उद्देश्य प्रभावित पैर की संरचना एवं कार्यक्षमता में सुधार करना तथा मरीज को बेहतर गतिशीलता प्रदान करना है।

ऑपरेशन के बाद मरीज चिकित्सकीय निगरानी में है और उसकी स्थिति संतोषजनक बताई जा रही है। चिकित्सकों के अनुसार नियमित फॉलो-अप और फिजियोथेरेपी के माध्यम से मरीज की चलने-फिरने की क्षमता में आगे और सुधार की संभावना है।

सिम्स में हुई यह सफल लिम्ब रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी जटिल ऑर्थोपेडिक समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए उपचार की नई संभावनाओं को दर्शाती है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के माध्यम से जटिल मामलों का उपचार सिम्स में ही उपलब्ध कराया जा रहा है।

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