जशपुर, टीम पत्रवार्ता, 24 जुलाई, 2026
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर में डिजिटल इंडिया के दावों के बीच आज भी 25 गांव मोबाइल नेटवर्क से पूरी तरह वंचित हैं। दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के ग्रामीण संचार सुविधा के अभाव में शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, सरकारी योजनाओं और आपातकालीन सेवाओं तक समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। लगातार मिल रही शिकायतों और जनप्रतिनिधियों की मांग के बाद जशपुर कलेक्टर कार्यालय के ई-गवर्नेंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने 24 जून 2026 को भारत संचार निगम लिमिटेड के उप महाप्रबंधक को पत्र लिखकर नेटवर्क व्यवस्था में तत्काल सुधार तथा नए मोबाइल टावर स्थापित करने का आग्रह किया है।
कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि जिले के विभिन्न ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्रों में दूरसंचार नेटवर्क अत्यंत कमजोर है अथवा पूरी तरह उपलब्ध नहीं है। नेटवर्क की समस्या के कारण ग्रामीणों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं से संपर्क, पुलिस एवं प्रशासन को सूचना देने, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल बैंकिंग, कृषि संबंधी जानकारी प्राप्त करने और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पत्र में नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में नए मोबाइल टावर स्थापित करने तथा तकनीकी समस्या वाले क्षेत्रों में नेटवर्क की गुणवत्ता और क्षमता में सुधार करने का आग्रह किया गया है।
जिले के इन 25 गांवों में नहीं है मोबाइल नेटवर्क
बगीचा विकासखंड के ग्राम पंचायत एकम्बा (ग्राम एकम्बा), कामारिमा (ग्राम खैरापाठ), सरबकोम्बो (ग्राम जामपानी), तम्बाकाछार (ग्राम जबला सखाझरन), मरोल (ग्राम समदुरा) और रनपुर नेटवर्क विहीन हैं।
कांसाबेल विकासखंड के खारपानी, डांडपानी, कोटानपानी (ग्राम टाटीडांड) और शब्दमुंडा में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है।
जशपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सारूडीह के ग्राम कोमडो में भी नेटवर्क सुविधा नहीं है।
मनोरा विकासखंड के गीधा (लोवमुरहा), सोनक्यारी (डुमटोली एवं माँझाटोली), रेमने (गेदई), अलोरी (मटलोंगा), पोडीपटकोना (खरवाटोली बस्ती) तथा आराकोना भी नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में शामिल हैं।
दुलदुला विकासखंड के कस्तूरा और मकरीबांधा में भी मोबाइल नेटवर्क नहीं है।
फरसाबहार विकासखंड के मेंडरबहार, बारो, बरकसपाली, अंकिरा तथा बुलडेगा (बीजापुर सुकुवासुपारा बस्ती) में भी नेटवर्क सुविधा उपलब्ध नहीं है।
पत्थलगांव विकासखंड के जामझोर (यादवपारा बस्ती) में भी ग्रामीण वर्षों से नेटवर्क की समस्या झेल रहे हैं।
एकम्बा पंचायत में मोबाइल टावर लगाने की मांग
सन्ना तहसील की ग्राम पंचायत एकम्बा के ग्रामीणों ने भी लंबे समय से मोबाइल टावर लगाने की मांग उठाई है।
ग्रामीणों के आवेदन पर कलेक्टर ने BSNL के उप महाप्रबंधक को पत्र लिखकर एकम्बा में मोबाइल टावर स्थापित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। ग्रामीणों का कहना है कि कमजोर नेटवर्क के कारण सामान्य फोन कॉल करना भी मुश्किल हो जाता है और आपात स्थिति में परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।
जशपुर जैसे भौगोलिक रूप से दुर्गम जिले में मोबाइल नेटवर्क अब केवल बातचीत का माध्यम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा, बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सरकारी योजनाओं और आपातकालीन सेवाओं की महत्वपूर्ण कड़ी बन चुका है। ऐसे में मुख्यमंत्री के गृह जिले के 25 गांवों का आज भी नेटवर्क विहीन होना डिजिटल कनेक्टिविटी के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
गौरतलब है कि जिले के इन दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में केवल बीएसएनएल ही नहीं, बल्कि निजी दूरसंचार कंपनियां भी बेहतर मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध कराने में विफल रही हैं।
अधिकांश गांवों में निजी कंपनियों के सिग्नल या तो बेहद कमजोर हैं या पूरी तरह अनुपलब्ध हैं। इससे ग्रामीणों को संचार, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल बैंकिंग, टेलीमेडिसिन,आपातकालीन सेवाओं तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में बीएसएनएल के साथ-साथ निजी टेलीकॉम कंपनियों द्वारा भी इन नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में मोबाइल टावर स्थापित कर गुणवत्तापूर्ण नेटवर्क उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता बन गया है।
मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के बावजूद यदि दूरस्थ गांव आज भी मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं और सुधार की प्रक्रिया अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही है, तो यह सुशासन और डिजिटल कनेक्टिविटी के दावों पर कई प्रश्नचिह्न खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल पत्राचार या आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर मोबाइल टावरों की स्थापना और नेटवर्क सुधार के लिए ठोस एवं समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता है। अब लोगों की निगाहें बीएसएनएल और निजी टेलीकॉम कंपनियों की पहल पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री के गृह जिले के इन 25 गांवों तक निर्बाध मोबाइल नेटवर्क की सुविधा आखिर कब पहुंचेगी।


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