जशपुर, टीम पत्रवार्ता, 28 जुलाई 2026
जशपुर जिले के बादलखोल वन अभ्यारण्य क्षेत्र स्थित साहीडांड फॉरेस्ट कैंपस में सेमर के दो पेड़ों की कटाई का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि मधुमक्खियों के छत्ते हटाने की आड़ में बिना स्वीकृति सेमर के दो पेड़ों की कटाई कर दी गई तथा लकड़ियों का बिना ट्रांजिट परमिट टीपी परिवहन कर बिना नीलामी बेच दिया गया। मामले में वन विभाग के अधिकारियों और ग्राम पंचायत के बयानों में विरोधाभास सामने आने के बाद पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार पंचायत क्षेत्र में किसी भी पेड़ की कटाई के लिए ग्राम पंचायत का प्रस्ताव, वन विभाग का अभिमत तथा सक्षम प्राधिकारी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व की अनुमति आवश्यक होती है। इसके अलावा लकड़ियों के परिवहन के लिए ट्रांजिट परमिट और निस्तारण के लिए निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। आरोप है कि इस मामले में इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग के आवासीय परिसर में स्थित सेमर के पेड़ों की कटाई कर लकड़ियों का परिवहन किया गया और बाद में उन्हें बिना नीलामी लाखों में बेच दिया गया। आरोप यह भी हैं कि इस पूरे मामले में कुछ वन अधिकारी, कर्मचारी एवं स्थानीय लोगों की मिलीभगत रही। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और मामले की जांच की जानी शेष है।
वनपाल रामसाय केरकेट्टा ने बताया कि साहीडांड फॉरेस्ट परिसर के भीतर सेमर के दो पेड़ों की कटाई हुई है।लकड़ियों को काटकर उनका परिवहन भी किया गया, लेकिन लकड़ियों की नीलामी संबंधी कोई प्रक्रिया नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि पेड़ों की कटाई के संबंध में उन्हें कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ था।
वहीं, साहीडांड वन परिक्षेत्र में पदस्थ दरोगा हीरामनी पैंकरा ने बताया कि साहीडांड आवासीय परिसर बगीचा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आता है, जबकि शेष क्षेत्र बादलखोल वन अभ्यारण्य का हिस्सा है। उनके अनुसार दोनों सेमर के पेड़ों पर मधुमक्खियों के छत्ते लगे हुए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग से न तो कोई अभिमत लिया गया और न ही कोई लिखित अनुमति प्राप्त की गई।
बादलखोल वन अभ्यारण्य, नारायणपुर के डिप्टी रेंजर सुरेंद्र प्रधान ने बताया कि घटना के समय वे अवकाश पर थे, इसलिए उन्हें इसकी प्रत्यक्ष जानकारी नहीं है। अधीनस्थ कर्मचारियों से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत के द्वारा मधुमक्खियों की समस्या को दूर करने के उद्देश्य से वन विभाग के आवासीय परिसर में पेड़ों की कटाई कराई गई है। हालांकि, उन्होंने अनुमति, वन विभाग के अभिमत, परिवहन और नीलामी संबंधी प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने की बात कही।
दूसरी ओर साहीडांड ग्राम पंचायत सचिव उदयनारायण यादव ने वन विभाग के इस दावे का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत से पेड़ों की कटाई के लिए कोई प्रस्ताव जारी नहीं किया गया है और न ही ग्राम पंचायत द्वारा पेड़ों की कटाई कराई गई है। पंचायत सचिव के इस बयान के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है।
इस संबंध में एसडीएम प्रदीप राठिया ने बताया कि साहीडांड में पेड़ों की कटाई के लिए उनके कार्यालय से कोई अनुमति जारी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
अब इस मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जब पंचायत सचिव प्रस्ताव से इनकार कर रहे हैं तो वन विभाग किस प्रस्ताव के आधार पर कटाई होने की बात कह रहा है? यदि वन विभाग का अभिमत और एसडीएम की अनुमति नहीं ली गई, तो पेड़ों की कटाई किस आधार पर की गई? यदि ट्रांजिट परमिट जारी नहीं हुआ, तो लकड़ियों का परिवहन कैसे हुआ? और यदि लकड़ी निकाली गई, तो उसकी नीलामी क्यों नहीं कराई गई?
वन विभाग और ग्राम पंचायत के बयानों में सामने आए विरोधाभास ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पेड़ों की कटाई, लकड़ियों के परिवहन और उनके निस्तारण में किस स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ तथा इसके लिए जिम्मेदार कौन है।


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