जशपुर, टीम पत्रवार्ता, 29 जून 2026
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की हरी-भरी पहाड़ियों और घने साल के जंगलों के बीच स्थित रानीदाह जलप्रपात प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम उदाहरण है। जशपुर नगर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित यह पर्यटन स्थल स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है। घुमावदार सुंदर सड़कों से होकर जब कोई इस स्थल तक पहुँचता है, तो चारों ओर फैली हरियाली, ऊँची चट्टानों से गिरती दूधिया जलधारा और पक्षियों का मधुर कलरव मन को एक अलग ही सुकून का एहसास कराता है।
बरसात के मौसम में रानीदाह का स्वरूप सबसे अधिक मनमोहक होता है। इस समय झरने का जल कई धाराओं में विभाजित होकर ऊँचाई से नीचे गिरता है, जिससे अद्भुत प्राकृतिक दृश्य निर्मित होता है। वहीं गर्मियों में जलप्रवाह कुछ कम हो जाता है, लेकिन आसपास का शांत वातावरण, घना वन क्षेत्र और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करता रहता है।
लोककथा से जुड़ी है रानीदाह की पहचान
रानीदाह केवल प्राकृतिक सुंदरता के कारण ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी लोककथा भी इसे विशेष पहचान देती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, बहुत समय पहले ओडिशा की राजकुमारी रानी शिरोमणि इन पहाड़ियों में आ पहुँची थीं। जब उनके पिता और पाँच भाई उनका पीछा करते हुए यहाँ पहुँचे, तब रानी ने अपमान और जबरन विवाह से बचने के लिए इसी गहरी खाई में छलांग लगाकर अपने प्राण त्याग दिए।
तभी से इस जलप्रपात का नाम रानीदाह पड़ गया, जिसका अर्थ है रानी का जलप्रपात। झरने के समीप स्थित कुछ चट्टानों को आज भी स्थानीय लोग "पाँच भैया" के नाम से जानते हैं, जिन्हें रानी के पाँच भाइयों का प्रतीक माना जाता है। यह लोककथा आज भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती है और इस स्थल को रहस्य तथा आस्था से जोड़ती है।
पिकनिक और प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श स्थल
रानीदाह जलप्रपात परिवार और मित्रों के साथ समय बिताने के लिए एक बेहतरीन पिकनिक स्पॉट है। यहाँ पर्यटक प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने के साथ फोटोग्राफी, ट्रैकिंग और पक्षियों के अवलोकन जैसी गतिविधियों का भी आनंद उठाते हैं। सप्ताहांत और वर्षा ऋतु में यहाँ बड़ी संख्या में पर्यटक पहुँचते हैं। हालांकि, बरसात के दौरान चट्टानें फिसलन भरी हो जाती हैं, इसलिए सावधानी बरतना आवश्यक है।
पर्यटन की अपार संभावनाएँ
रानीदाह जशपुर जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। यदि यहाँ पर्यटकों की सुविधाओं जैसे बेहतर पार्किंग, विश्राम स्थल, पेयजल, शौचालय, सुरक्षा व्यवस्था और जानकारी देने वाले संकेतक विकसित किए जाएँ, तो यह स्थल राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बना सकता है। प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण के साथ पर्यटन विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए तो यह क्षेत्र स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक विकास का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
प्रकृति की गोद में सुकून के कुछ पल बिताने, झरनों की मधुर ध्वनि सुनने और जशपुर की अनछुई प्राकृतिक सुंदरता को करीब से महसूस करने के लिए रानीदाह जलप्रपात का एक बार अवश्य भ्रमण करें।





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