रायपुर, टीम पत्रवार्ता,31 दिसंबर 2025।
दूरस्थ और घने वनांचल वाले आदिवासी क्षेत्रों में अब स्वास्थ्य सुविधाएँ लोगों के घर-आँगन तक पहुँचेंगी। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान “पीएम जनमन” के अंतर्गत बुधवार को नवा रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि तथा स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में रहने वाले आदिवासी परिवारों को इलाज और जाँच के लिए अब लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएँ सीधे गाँवों और बसाहटों तक पहुँचेंगी। उन्होंने इसे आदिवासी समुदायों की स्वास्थ्य सुरक्षा और सर्वांगीण विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।
इन मोबाइल मेडिकल यूनिटों की तैनाती से प्रदेश के18 जिलों के 2100 से अधिक गाँवों और बसाहटों में नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। इससे दो लाख से अधिक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) की आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लगभग 3 करोड़ की आबादी में विशेष पिछड़ी जनजाति के करीब 2 लाख 30 हजार लोग 18 जिलों की 2100 बसाहटों में निवासरत हैं। यह मोबाइल मेडिकल यूनिट उनके लिए वरदान साबित होंगी।
इन सर्वसुविधायुक्त 57 मोबाइल मेडिकल यूनिटों में डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और स्थानीय स्वास्थ्य स्वयंसेवक तैनात रहेंगे। यूनिटों में 25 प्रकार की जाँच सुविधाएँ तथा 106 प्रकार की आवश्यक दवाइयाँ निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएँगी।मुख्यमंत्री ने इस पहल के लिए स्वास्थ्य विभाग, सीजीएमएससी तथा सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई और शुभकामनाएँ दीं।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए केंद्र और राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। यह मोबाइल मेडिकल यूनिट उन सुदूर वनांचलों के लिए शुरू की गई हैं, जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच सीमित रही है। आज पूरे प्रदेश को 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट समर्पित की गई हैं, जो जनजातीय समाज के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएँगी।
स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने बताया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना की शुरुआत 15 नवंबर 2023 को विशेष पिछड़ी जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना का लक्ष्य बुनियादी सुविधाओं को सीधे बसाहटों तक पहुँचाना है।
उन्होंने कहा कि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को इन यूनिटों के माध्यम से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों तक शीघ्र पहुँचाया जा सकेगा। प्रत्येक यूनिट हर 15 दिन में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करेगी, जिसमें जाँच, उपचार और दवाइयों का वितरण किया जाएगा। गंभीर मरीजों को आवश्यकता अनुसार उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि अब तक संसाधनों की कमी के कारण दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ नियमित रूप से नहीं पहुँच पाती थीं। नए वाहन, आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता से यह व्यवस्था अब लगातार संचालित होगी। इससे टीबी, मलेरिया, एनीमिया और कुपोषण जैसी बीमारियों की समय पर पहचान और रोकथाम संभव हो सकेगी।





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