जशपुर,टीम पत्रवार्ता,07 अक्टूबर 2026
राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के सबसे जरूरतमंद परिवारों तक स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और आजीविका जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना है।जशपुर जिले के सन्ना तहसील क्षेत्र से सामने आई यह तस्वीर पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है।जब जरूरतमंद परिवार तक योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर नहीं पहुंचता, तो आप समझ सकते हैं कि सिस्टम क्या कर रहा है।
मामला है सन्ना तहसील के ग्राम कर्रीकोना का जो दीवान हर्रा डीपा से करीब तीन किलोमीटर आगे है।यहां रहने वाले पहाड़ी कोरवा 32 वर्षीय कालू राम पिता पूसे राम पिछले करीब 12 वर्षों से पैर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। बीमारी ने अब इतना गंभीर रूप ले लिया है कि पैर में सड़न शुरू हो गई है और पैर गलने लगा है। परिजनों के अनुसार चिकित्सकों ने इसे पैर का कैंसर बताया है। हालांकि इसकी अंतिम चिकित्सकीय पुष्टि संबंधित विशेषज्ञ अस्पताल की जांच और रिपोर्ट से ही होगी।
कालू राम का परिवार बेहद गरीब है। उनके माता-पिता हैं, पत्नी विकलांग हैं और दो बच्चे हैं। बीमारी के इलाज के लिए परिवार अपनी जमीन तक बेच चुका है। इलाज में जो कुछ था, वह भी खर्च हो गया। अब स्थिति यह है कि परिवार के पास न तो नियमित दवाइयां खरीदने के पैसे हैं और न ही किसी बड़े अस्पताल तक मरीज को ले जाने का साधन।
12 साल की बीमारी ने परिवार को तोड़ दिया
कालू राम पिछले 12 वर्षों से बीमारी का दर्द झेल रहे हैं। लंबे समय से इलाज कराने के प्रयास के बावजूद उनकी स्थिति लगातार गंभीर होती गई। आज पैर में सड़न और गलने की स्थिति ने परिवार की चिंता और बढ़ा दी है।
परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना ही मुश्किल है। ऐसे में महंगे इलाज, जांच, दवाइयां और बाहर के अस्पताल तक पहुंचना परिवार की क्षमता से पूरी तरह बाहर हो गया है।
दो स्थानीय लोग लगातार कर रहे मदद
इस कठिन समय में मनोरा के कांटाबेल गांव के बंटी नायक और सोनक्यारी के राकेश सोनी कालू राम और उनके परिवार की मदद के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। दोनों अपनी क्षमता के अनुसार परिवार का सहयोग कर रहे हैं और इलाज की व्यवस्था कराने के लिए प्रयासरत हैं।
बीमारी की गंभीरता और परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए व्यक्तिगत स्तर पर होने वाली मदद पर्याप्त नहीं है। अब प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
जमीनी स्तर की व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
गांव में पंचायत स्तर पर सचिव,पंच-सरपंच,मितानिन तथा जनपद और जिला पंचायत के जनप्रतिनिधियों की जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने गंभीर रूप से बीमार और अत्यंत गरीब पहाड़ी कोरवा परिवार तक अब तक स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं का प्रभावी लाभ क्यों नहीं पहुंच सका।
यह मामला केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि उन सरकारी योजनाओं की जमीनी पहुंच पर भी सवाल खड़े करती है, जिनका उद्देश्य विशेष पिछड़ी जनजातियों के सबसे कमजोर परिवारों तक सहायता पहुंचाना है।
कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की उम्मीद
कालू राम और उनके परिवार की स्थिति को देखते हुए जिला कलेक्टर रोहित व्यास से आग्रह है कि वे मामले की स्वयं मॉनिटरिंग करते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल निर्देश दें, ताकि कालू राम की स्वास्थ्य जांच, आवश्यक उपचार, दवाइयों और जरूरत पड़ने पर उच्च स्तरीय अस्पताल में इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और उपलब्ध सहायता का तत्काल लाभ दिलाया जाना जरूरी है। साथ ही मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने और उपचार की पूरी प्रक्रिया में प्रशासनिक सहयोग मिलना चाहिए।
आज कालू राम के परिवार को किसी राजनीतिक आश्वासन से अधिक तत्काल इलाज की जरूरत है। एक गरीब पहाड़ी कोरवा युवक जिंदगी और बीमारी के बीच संघर्ष कर रहा है। उसके पास इलाज के लिए जमीन भी नहीं बची, पैसे भी नहीं बचे—अब उम्मीद केवल उस व्यवस्था से है, जिसका उद्देश्य ही ऐसे जरूरतमंद परिवारों तक मदद पहुंचाना है।
सरकार और प्रशासन से यही उम्मीद है कि कालू राम की पुकार समय रहते सुनी जाए और इलाज शुरू हो, ताकि बीमारी के कारण एक और गरीब परिवार अपना सब कुछ खोने को मजबूर न हो।


0 Comments