रायपुर, टीम पत्रवार्ता,16 जुलाई 2026
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा में कहा कि दशकों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा बस्तर अब शांति, सुरक्षा और विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन, सुरक्षा बलों के साहस और बस्तर की जनता के सहयोग को दिया।
मुख्यमंत्री ने नक्सल विरोधी अभियान में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित रणनीति, प्रभावी सुरक्षा अभियान और पुनर्वास नीति के कारण नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, भूमि, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर देकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
साय ने कहा कि सरकार ने सुरक्षा के साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी है। 'बस्तर रोडमैप 2.0', 'नियद नेल्ला नार 2.0' और 'बस्तर मुन्ने अभियान' के माध्यम से 5,542 गांवों के 39 लाख से अधिक लोगों तक 31 योजनाएं और 14 सामुदायिक सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि बस्तर में 6.79 लाख राशन कार्ड, 17 लाख जनधन खाते, 22 लाख आयुष्मान कार्ड, 24.66 लाख आधार कार्ड, 1.18 लाख वनाधिकार पत्र और 3.89 लाख किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं। वहीं 1.76 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं तथा नक्सल प्रभावित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 15 हजार अतिरिक्त आवास भी स्वीकृत हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के 458 बंद विद्यालयों में से 421 विद्यालय दोबारा शुरू किए गए हैं और 36 नए विद्यालय स्वीकृत किए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के तहत 34 लाख से अधिक लोगों का डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि 3,513 करोड़ रुपये की जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना, रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे, जगदलपुर हवाई सेवा विस्तार और सभी विकासखंडों में कौशल प्रशिक्षण केंद्र जैसी परियोजनाएं बस्तर को नई आर्थिक गति देंगी। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों में चार लाख से अधिक लोगों की भागीदारी ने सामाजिक और सांस्कृतिक एकजुटता को भी मजबूत किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल नक्सलवाद का अंत नहीं, बल्कि बस्तर को देश का अग्रणी जनजातीय संभाग बनाना है, जहां सुरक्षा, विकास और जनकल्याण के माध्यम से लोगों के जीवन स्तर में स्थायी सुधार सुनिश्चित किया जा सके।


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