जशपुर/बगीचा, टीम पत्रवार्ता 24 जून 2026
सरकारी स्कूलों के बच्चों को गणित में दक्ष बनाने के लिए जशपुर जिले में एक अभिनव शैक्षणिक पहल की शुरुआत की गई है। कर्नाटक में सफल रहे कनेक्टेड मॉडल से प्रेरित ‘जश-लर्न’ मिशन के तहत अब शिक्षक स्कूल समय के बाद मोबाइल फोन के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूप से गणित की कोचिंग देंगे। शिक्षा विभाग और यूथ इम्पैक्ट के संयुक्त प्रयास से शुरू की जा रही यह पहल जिले में बुनियादी गणितीय दक्षता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
फोन कॉल से होगी व्यक्तिगत मैथ्स कोचिंग
कार्यक्रम के तहत गणित शिक्षक ऐसे विद्यार्थियों की पहचान करेंगे जिन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग की आवश्यकता है। स्कूल समय समाप्त होने के बाद अभिभावकों की सुविधा के अनुसार समय निर्धारित कर शिक्षक सीधे विद्यार्थियों को फोन कॉल करेंगे और गणित की मूलभूत अवधारणाएं समझाएंगे। प्रत्येक कॉल लगभग 30 मिनट से एक घंटे तक की होगी।
विशेष रूप से भाग, गुणा, जोड़ और घटाव जैसी बुनियादी प्रक्रियाओं को सरल तरीके से समझाकर बच्चों की गणितीय समझ को मजबूत किया जाएगा। निर्धारित दक्षता हासिल करने के बाद अन्य विद्यार्थियों को भी चरणबद्ध तरीके से कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा।
बगीचा में हुआ प्रशिक्षण
कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए बुधवार को आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल, बगीचा के सभागार में संकुल समन्वयकों का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में कार्यक्रम की कार्यप्रणाली, विद्यार्थियों के चयन, अभिभावकों की सहभागिता और सीखने के परिणामों में सुधार के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रशिक्षक सुभाष प्रभाकरन ने बताया कि प्रारंभिक चरण में यह कार्यक्रम कक्षा पांचवीं के विद्यार्थियों पर केंद्रित रहेगा। इसका उद्देश्य बच्चों को व्यक्तिगत शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराकर गणित विषय के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाना है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप पहल
विकासखंड शिक्षा अधिकारी सुदर्शन पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान विकसित करना विभाग की प्राथमिकता है। ‘जश-लर्न’ मिशन विद्यार्थियों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान करेगा, जिससे सीखने के स्तर में उल्लेखनीय सुधार आने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि यह पहल शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक के बीच बेहतर शैक्षणिक समन्वय स्थापित करेगी तथा बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाएगी।
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए तकनीक आधारित यह मॉडल काफी प्रभावी साबित हो सकता है। मोबाइल फोन के माध्यम से व्यक्तिगत कोचिंग न केवल बच्चों की सीखने की गति बढ़ाएगी, बल्कि उन विद्यार्थियों को भी अतिरिक्त सहायता मिलेगी जो कक्षा में अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में इसे अन्य विषयों और कक्षाओं तक भी विस्तार दिया जा सकता है।


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