रायपुर,टीम पत्रवार्ता,24 फरवरी 2026
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एक महत्वपूर्ण मामले में सख्ती दिखाते हुए 10 माह बाद एक बच्चे को उसका हक दिलाया। आयोग के हस्तक्षेप के बाद न सिर्फ शिक्षा विभाग का RTE पोर्टल दोबारा खोला गया, बल्कि स्कूल को 16,000 रुपये की पूरी फीस वापस करनी पड़ी।
मामला एक जरूरतमंद वर्ग के पालक से जुड़ा है, जिसने अपने बच्चे के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल में आरक्षित निःशुल्क सीट के लिए आवेदन किया था। अप्रैल माह में प्रथम चरण की लॉटरी में बच्चे का चयन हो गया था, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने पालक से संपर्क न होने की बात कही, जबकि नोडल अधिकारी ने फोन न उठाने की दलील दी।
स्थिति से अनभिज्ञ पालक ने मजबूरी में उसी स्कूल में 16,000 रुपये देकर सशुल्क प्रवेश ले लिया। बाद में जानकारी मिलने पर उसने लगभग 10 माह बाद आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
आयोग ने मामले की गंभीरता से सुनवाई करते हुए आदेश जारी किया कि—
बच्चे की पूरी फीस पालक को लौटाई जाए।
शिक्षा विभाग RTE पोर्टल खोलकर बच्चे का नाम निःशुल्क सीट में दर्ज करे, ताकि आगे की पढ़ाई भी मुफ्त हो सके।
23 फरवरी 2026 को आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की उपस्थिति में स्कूल द्वारा 16,000 रुपये का अकाउंट पेयी चेक पालक को सौंपा गया।
डॉ. शर्मा ने स्पष्ट कहा, “बच्चों के हक से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
आयोग के इस निर्णय को जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि RTE के तहत चयनित बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए आयोग पूरी तरह प्रतिबद्ध है।



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