... ब्रेकिंग पत्रवार्ता : "अंधेरी" बस्ती को नहीं मिली "रोशनी" की किरण,बदहाली का जीवन जी रहे "पहाड़ी कोरवा" महिला की "मौत",सही समय पर नहीं मिल सका ईलाज,परिजन कराते रहे झाड़ फूँक,अंधेरी बस्ती में भटकते रहे परिजन।

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ब्रेकिंग पत्रवार्ता : "अंधेरी" बस्ती को नहीं मिली "रोशनी" की किरण,बदहाली का जीवन जी रहे "पहाड़ी कोरवा" महिला की "मौत",सही समय पर नहीं मिल सका ईलाज,परिजन कराते रहे झाड़ फूँक,अंधेरी बस्ती में भटकते रहे परिजन।

 

जशपुर ,टीम पत्रवार्ता,03 सितंबर 2021

BY योगेश थवाईत

जशपुर जिले के नगर पंचायत बगीचा के वार्ड 10 की पहाड़ी कोरवा अंधेरी बस्ती में रहने वाली पहाड़ी कोरवा महिला ने सिस्टम की लचर व्यवस्था सहते हुए दम तोड़ दिया।इस विशेष संरक्षित जनजाति पहाड़ी कोरवा महिला के जीवन में प्रशासन उजियारा नहीं कर सका।इतना ही नहीं न तो उसे सही समय पर ईलाज मिल सका और न उसकी जान बच सकी।

उल्लेखनीय है कि नगर पंचायत बगीचा के रौनी रोड स्थित पहाड़ी कोरवा बस्ती में आजादी के 75 वर्षों बाद भी अंधेरा कायम है।यहां उस वक्त सिस्टम की लाचारी देखने को मिली जब पहाड़ी कोरवा महिला को सही समय पर सही ईलाज नहीं मिल पाया और उसकी मौत हो गई।

वार्ड 10 की रहने वाली पहाड़ी कोरवा महिला सनियारो बाई कुछ दिनों से बीमार थी।जिसे चार दिन पहले ईलाज के लिए 108 की मदद से बगीचा अस्पताल ले जाया गया था।जहां प्रारंभिक ईलाज कर उसे वापस भेज दिया गया।हांलाकि उसकी तबियत नहीं सुधरी थी और वह परेशान थी।मृतक महिला के पुत्र सुधन ने बताया कि अस्पताल से वापस आने के बाद उसके मां की तबियत और बिगड़ गई जिसके बाद उन्होंने झाड़ फूँक का सहारा लिया।

गुरुवार की रात 9 बजे उसकी तबियत बिगड़ने लगी और 10 बजे रात में उसकी मौत हो गई।जब महिला की तबियत ज्यादा खराब होने लगी तो परिजन काफी परेशान रहे और अंधेरे बस्ती में भटकते रहे।उन्हें सही समय पर ईलाज नहीं मिल सका।

आपको बता दें कि यह नगर पंचायत की वही कोरवा बस्ती है जहां पिछले 2 साल से बिजली के खंभे नमूने बनकर खड़े हैं।बिजली विभाग की ऐसी नाकामी की अब तक उन खंभों में बिजली के तार नहीँ खींचे जा सके हैं।अब तक न तो संबंधित ठेकेदार पर एफआईआर हुआ है न ही नए ठेकेदार से काम कराया जा रहा है ।जिसके कारण पहाड़ी कोरवा आज भी अंधेरे में बदहाली का जीवन जी रहे हैं।

फिलहाल वार्ड पार्षद श्रीमती प्रेमा थवाईत ने मृतक महिला के परिवार से मिलकर उन्हें ढाढ़स बंधाते हुए श्रद्धांजलि राशि देकर उनकी सहायता की है और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है।

अब देखना होगा कि सिस्टम का लाचार रवैया कब दुरुस्त होता है. और पहाड़ी कोरवाओं के अंधेरे जीवन में कब उजियारा हो पाता है।अब तक यहां न तो सड़क है न बिजली है न पानी।

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