... राजनीति : " TS बाबा होंगे "मुख्यमंत्री" या बने रहेंगे "MLA"..? समर्थकों के बीच कयासों का दौर शुरु,मंत्री पद से इस्तीफे के बाद क्या होगा बाबा का अगला रुख...बदलेगी सरकार या बदलेंगे मुख्यमंत्री ? ढाई -ढाई साल के फार्मूले पर अब सबकी नजर,सरगुजा अंचल में चर्चा का बाजार गर्म,17 जून को भूपेश सरकार के ढाई साल होंगे पुरे,आलाकमान का क्या होगा निर्णय ....?

राजनीति : " TS बाबा होंगे "मुख्यमंत्री" या बने रहेंगे "MLA"..? समर्थकों के बीच कयासों का दौर शुरु,मंत्री पद से इस्तीफे के बाद क्या होगा बाबा का अगला रुख...बदलेगी सरकार या बदलेंगे मुख्यमंत्री ? ढाई -ढाई साल के फार्मूले पर अब सबकी नजर,सरगुजा अंचल में चर्चा का बाजार गर्म,17 जून को भूपेश सरकार के ढाई साल होंगे पुरे,आलाकमान का क्या होगा निर्णय ....?



रायपुर,टीम पत्रवार्ता,08 जून 2021

BY योगेश थवाईत 

छत्तीसगढ़ सरकार का ढाई साल का कार्यकाल आगामी 17 जून को पूरा हो रहा है।सरकार बनाने के समय आलाकमान के सामने ढाई ढाई साल मुख्यमंत्री बनाने की बात ख़बरों में सामने आई थी और अब वह समय नजदीक है जब एक बार फिर से कयासों का दौर शुरू हो गया है।ढाई साल से आस लिये कांग्रेसी कांर्यकर्ताओं का इंतजार अब खत्म हाने की कगार पर है। छत्तीसगढ़ के लिये दिल्ली दरबार के द्वारा बड़ा फैसला लेने का कयास लगाया जा रहा है। सिंह देव समर्थको का कहना है कि यदि दिल्ली दरबार 17 जून को अपने वायदों के अनुसार निर्णय नहीं लेता है तो महाराज टीएस सिंह देव मंत्री पद से इस्तीफा सौंप देंगे और केवल विधायक बने रहेंगे।

क्या है ढाई साल का फार्मूला .?

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 के 11 दिसंबर को छ.ग.राज्य में कांग्रेस की सरकार पूर्ण बहुमत से बनी थी,जिसके बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर निर्णय लेने में दिल्ली दरबार को 4 दिन का समय लग गया,4 दिन के हाई प्रोफाईल ड्रामें में कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता ताम्रध्वज साहू का नाम तो कभी कांग्रेस सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कांग्रेस के स्तंभ सरगुजा महाराज टीएस सिंह देव का नाम तो कभी उस समय के प्रदेशाध्यक्ष व पार्टी को एकजुटता की गाथा लिखने वाले भूपेश बघेल का नाम सामने आया।एक समय तो यह भी निर्मित हुआ की ताम्रध्वज साहू के नाम पर मुहर लगा उनके नामों का घोषणा भी कर दिया गया और पोर्टफोलियो से जुड़े समस्त सुरक्षाकर्मी उनके निवास पहुंच मोर्चा संभाल लिये।जिस वक्त यह घटना क्रम चल रही थी उस वक्त दिल्ली दरबार में राज्य के भूपेश बघेल,टीएस.सिंह देव,ताम्रध्यज साहू के साथ साथ कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता चरणदास महंत व मोती लाल वोरा,प्रदेश प्रभारी पी.एल.पुनिया व मल्लिकार्जुन खड़गे भी दिल्ली में ही मौजूद थे और पल पल बदल रहे समीकरण के गवाह भी दिल्ली दरबार के समक्ष ये ही बने रहे।

ताम्रध्वज साहू के नाम लगी मुहर के बाद भूपेश बघेल,टीएस.सिंह देव व चरणदास महंत एकजुट हो दुबारा दिल्ली दरबार के आलाकमानों से मिले और उनसे गहन चर्चा कर जीत के असली हकदार को राज्य का ताज पहनाने का निवेदन किये।जिसके बाद भूपेश बघेल के नामों का ऐलान मुख्यमंत्री के तौर पर 15 दिसंबर को हुआ और 16 दिसंबर को उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला राज्य में मंत्रीमंडल का गठन किया गया।इस मंत्री मंडल में टी.एस.सिंह देव व ताम्रध्वज साहू को मंत्री बनाया गया जबकि चरणदास महंत को स्पीकर बनाया गया।लेकिन इस घटनाक्रम के बीच एक हवा आंधी के रूप चली जिसमें ढ़ाई-ढ़ाई साल के फार्मूले की बात उजागर हुई।

17 जून को सरकार के ढाई साल पूरे

अब इस फार्मूले के आधार पर ही टीएस.समर्थकों में 17 का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है।बताया जा रहा है कि इस दिन दिल्ली दरबार कोई बड़ा निर्णय ले सकती है इस कारण 17 जून को सभी की निगाहें दिल्ली दरबार पर टिकी हुई हैं।सूत्रों का कहना है कि दिल्ली दरबार के बातों व जुबान का अपना महत्व है जिसके आधार पर ही वे इस दिन का काफी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस दिन को लेकर समूचे सरगुजांचल सहित राज्य भर में चर्चा जारी है वहीं टीएस समर्थकों के दिल्ली दरबार में लगातार उनके वायदों को याद दिलाने प्रयासरत होने की भी जानकारी सामने आ रही है।सूत्रों के हवाले से जानकारी आ रही है कि इस समय समर्थकों का एक प्रतिनिधी मंडल दिल्ली रवाना होने वाला है जो दिल्ली दरबार में ढ़ाई-ढ़ाई साल के फार्मूले को लेकर सौजन्य मुलाकात भी करेगा व साथ ही टीएस सिंह देव के मुख्यमंत्री बनाये जाने की राज्यवासियों की उम्मीदों से अवगत भी करायेगा।

क्या बाबा देंगे मंत्री पद से इस्तीफा ..?

कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस्तीफा का मांग वे इस कारण कर रहे हैं कि अब बात है सम्मान की,यदि दिल्ली दरबार अपने कथनों पर खरा उतरता है तो महाराज श्री देव मुख्यमंत्री पद का शपथ लेकर राज्य की बागडोर संभालें और यदि दिल्ली दरबार की कथनी व करनी में अंतर आता है तो महाराज श्री देव मंत्री पद से इस्तीफा देकर कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी के कार्यों में आगे बढ़ें।17 जून को दिल्ली दरबार के फैसले का इंतजार अब राज्यवासियों को बेसब्री से है।नाम न उजागर करने की शर्तों पर समर्थकों का कहना है कि 17 जून को जो भी फैसला दिल्ली दरबार ले वे उस फैसले का सम्मान करेंगे और विधायक बने रहेंगे।

ढाई साल तक फंसा रहा लाल बत्ती का पेंच 

भूपेश सरकार ने निगम/मंडल/आयोग के विभिन्न पदों पर नियुक्ति करने में अपना लगभग आधा कार्यकाल गुजार दिया है।अब तक चंद पदों पर ही कुछ नियुक्तियां सरकार की तरफ से की गई है।जिसमें कई विधायकों को भी तवज्जो दिया गया है, 32 कार्यकर्ताओं के नामों की पहली सूची निकालने के बाद अब 10 माह से भी ज्यादा गुजरने को है सरकार ने दूसरी लिस्ट जारी नहीं किया है।जानकारों का कहना है कि लिस्ट बनकर तैयार भी है लेकिन अंर्तकलह व एकजुटता के अभाव के कारण नामों का ऐलान करने में दिक्कतों का समाना करना पड़ रहा है।कार्यकर्ताओं का मानना है कि ढ़ाई-ढ़ाई साल के फार्मूले के कारण ही कहीं पेंच भी तो नहीं फंसा हुआ है।लोगों में चर्चा का विषय है कि 17 जून के बाद दिल्ली दरबार के निर्देशों से लालबत्ती के विभिन्न पदों में नियुक्तियों की प्रक्रिया में तेजी आयेगी।चर्चा में यह भी कहते सुना जा रहा है कि लगभग 6 माह पूर्व ही नामों पर चर्चा कर लिस्ट बना ली गई है लेकिन टीएस व महंत गुट के कुछ नामों को लेकर पेंच फंस गया है,जिस पर जल्द ही निर्णय लेने योजना भी तैयार हो रही है।

टूटता जा रहा कार्यकर्ताओं का मनोबल 

भूपेश सरकार में इन दिनों अंदरखाने से जो जानकारी छन कर सामने आ रही है वह वाकई पार्टी के लिये चिंता का विषय बना हुआ है। अब तक सत्ता व संगठन में तालमेल नहीं बैठ पाने के कारण कार्यकर्ता अब घर बैठने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं। प्रत्येक कार्यों के लिये राज्य से ही सेंट्रलाईज्ड कार्य पद्धति ने स्थानीय कार्यकर्ताओं के हक के कार्यों पर सेंधमारी का काम किया है जिससे कार्यकर्ताओं को काम नहीं मिल पाने के कारण कार्यकर्ताओं का मनोबल अब टूटा है।कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब तक के इतिहास में पहली बार वे अपने आप को छला हुआ महसूस कर रहे हैं,संगठन को महत्व नहीं मिलने व चंद लोगों के इशारे पर पार्टी चलाने के कारण उनकी उपेक्षा हो रही है,अपनी अनदेखी से वे अब घरों में ही बैठना ज्यादा अच्छा समझ रहे हैं।

कार्यकर्ताओं का कहना है राज्य में सरकार जिस कार्य प्रणाली से आगे जा रही है उससे काफी बदनामी सरकार की हो रही है,राज्य में अनियमितता,भ्रष्टाचार व कमीशनखेरी के मामले उजागर होने के बाद भी कार्यवाही न करने से विपक्ष लगातार हमलावर है,वहीं सरकार के कुछ मंत्री इन्हें संरक्षण देकर सरकार की छवि और भी ज्यादा धूमिल कर रहे हैं ।

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