खबर लगातार - दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो करेंगे बड़ा आन्दोलन- प्रबल प्रताप सिंह जूदेव,छात्र छात्राओं के कपड़े उतरवाए जाने के मामले ने पकड़ा तूल,जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले में शिक्षा सचिव छग शासन को भेजा पत्र,मामले में लीपापोती का किया जा रहा प्रयास...?


कपड़े उतारे जाने के मामले को जिला प्रशासन ने किया एक सिरे से खारिज 

जशपुर(योगेश @पत्रवार्ता) बोर्ड की परीक्षा में 1 छात्र व 2 छात्राओं के कपड़े उतरवाकर जांच किये जाने के मामले में लीपापोती शुरु हो गई है।प्रशासन इस मामले को एक सिरे से खारिज करने में लगा हुआ है।वहीँ भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष  प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने मामले में दोषियों पर कार्रवाई न होने की दशा में बड़े आन्दोलन की चेतावनी दी है।

जिला प्रशासन द्वारा बोर्ड परीक्षाओं में नकल रोके जाने को लेकर सहायक आयुक्त एस के वाहने के नेतृत्व में उड़नदस्ता टीम का गठन किया गया है।जिसमें जशपुर बीईओ मिथलेश सेंगर व अन्य शिक्षिका शामिल हैं।

1 मार्च को आयोजित 10 वीं बोर्ड की परीक्षा में पंडरापाठ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के परीक्षा केंद्र में उक्त टीम द्वारा 1छात्र समेत 2 छात्राओं के कपड़े उतरवाकर जांच किये जाने के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने अपना प्रतिवेदन छग शासन को भेज दिया है।

मामला है बगीचा विकासखंड के पंडरापाठ का जहां मानवता को शर्मसार करने वाली खबर राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बनी हुई है।इसके बावजूद पूरे मामले पर शासन प्रशासन द्वारा अब तक उड़नदस्ता टीम पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।यह सवाल अब तक बना हुआ है कि उड़नदस्ता टीम को कपड़े उतारकर जांच का अधिकार किसने दिया....? जब छात्र छात्रा स्वयं बता रहे हैं कि उनके कपड़े उतरवाए गए तो कार्रवाई के लिए किसका इंतजार किया जा रहा है....।

दरअसल 10 वीं की एक छात्रा द्वारा सुसाईड किये जाने के बाद मामला प्रकाश में आया जिसमें पंडरापाठ स्कूल में उड़नदस्ता टीम द्वारा छात्र छात्राओं के कपड़े उतरवाए जाने का मामला सामने आया।हांलाकि जिला शिक्षा अधिकारी के प्रतिवेदन के अनुसार यह स्पष्ट हो गया कि मृतिका छात्रा के कपड़े नहीं उतरवाए गए न ही उसकी कोई जांच की गई।

प्रदेश सरकार ने मामले में जांच का आदेश तो दे दिया पर छात्र छात्राओं के कपड़े उतारे जाने के मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई बल्कि जिला शिक्षा अधिकारी ने आनन फानन में मामले का प्रतिवेदन बनाकर शिक्षा सचिव को प्रेषित कर दिया है।

जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा शासन को भेजे गए प्रतिवेदन में बताया गया है कि 1 मार्च को उड़नदस्ता प्रभारी एसके वाहने की टीम द्वारा पंडरापाठ परीक्षा केंद्र का निरीक्षण किया गया जहां एक छात्र से नकल सामग्री बरामद कर उसका नकल प्रकरण दर्ज किया गया।

उड़नदस्ता टीम प्रभारी व सहायक आयुक्त द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को मौखिक रुप से बताया गया कि किसी भी छात्र छात्रा का कपड़ा उतरवाकर जांच नहीं किया है।प्रतिवेदन में यह बताया गया है कि महिला उड़नदस्ता दल के द्वारा एक बालिका की जांच की गई है जो परीक्षा में शामिल हो रही है।

मृतिका छात्रा की कोई जांच नहीं की गई है।यह भी उल्लेख किया गया है कि परीक्षा अवधि में मोबाईल खेलने से मना करने पर छात्रा द्वारा सुसाईड किया जाना बताया जा रहा है।मृतिका व परीक्षा केंद्र में जांच किये गए छात्रा दोंनो अलग अलग होना बताया गया है।वहीं मृतिका के परिजनों से बयान लेकर प्रतिवेदन भेजे जाने की बात कही गई है।

एक ओर जिला शिक्षा अधिकारी का प्रतिवेदन अपने आप में कई सवाल लिए हुए है वहीं कपड़े उतरवाकर जांच करने जैसे बेहद संवेदनशील मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है बल्कि उड़नदस्ता टीम पर लगे आरोपों को एक सिरे से नकारा जा रहा है।

आपको बता दें कि विशेष पिछड़ी जनजाति व आदिवासियों के विकास कार्य की जिम्मेदारी जिले के सहायक आयुक्त पर होती है और उनकी ही उड़नदस्ता टीम के द्वारा इस प्रकार छात्र छात्राओं से व्यवहार करना बेहद गंभीर मामला है।

फिलहाल मामले में हर पहलू की जांच की बात कही जा रही है।देखना होगा कि प्रदेश की संवेदनशील सरकार इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाती है।हांलाकि धरमजयगढ़ में आयोजित कोरवा सम्मलेन में भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने उक्त घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और दोषियों पर कार्रवाई न होने की दशा में आन्दोलन की बात कही है।



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