... खबर पत्रवार्ता : बगीचा में 31 हजार दीपों से जगमगाया डोंड़की नदी छठ घाट, दिखा श्रम,सेवा और समर्पण का अद्भुत संगम,आदियोगी की विशाल प्रतिमा के सानिध्य में गूंजे वैदिक मंत्र,काशी के पुरोहितों ने संपन्न कराई भव्य गंगा आरती,हजारों की संख्या में नगरवासी बने भव्य आयोजन के साक्षी।

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खबर पत्रवार्ता : बगीचा में 31 हजार दीपों से जगमगाया डोंड़की नदी छठ घाट, दिखा श्रम,सेवा और समर्पण का अद्भुत संगम,आदियोगी की विशाल प्रतिमा के सानिध्य में गूंजे वैदिक मंत्र,काशी के पुरोहितों ने संपन्न कराई भव्य गंगा आरती,हजारों की संख्या में नगरवासी बने भव्य आयोजन के साक्षी।

 


जशपुर/बगीचा, टीम पत्रवार्ता, 19 अक्टूबर 2026

नवरात्र के पावन पर्व की महानवमी के पावन अवसर पर बगीचा के डोंड़की नदी तट स्थित छठ घाट पर 31 हजार दीपों के प्रज्वलन के साथ भव्य गंगा आरती का आयोजन किया गया। मां दुर्गा युवा शक्ति की पहल और नगरवासियों के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में आस्था, आध्यात्मिकता, सामाजिक एकजुटता और मातृशक्ति की सहभागिता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। हजारों दीपों की रोशनी से नदी तट जगमगा उठा और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

कार्यक्रम में काशी से आए पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां गंगा का आवाहन और दीप पूजन संपन्न कराया। इसके बाद मातृशक्ति ने 31 हजार दीप प्रज्वलित कर श्रद्धा और भक्ति की अनुपम छटा बिखेरी। नदी के चारों ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने।

आदियोगी की विशाल प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र

डोंड़की नदी के मध्य लगभग 20 फीट ऊंची आदियोगी की प्रतिमा स्थापित की गई थी, जिसके चारों ओर आकर्षक ढंग से दीप सजाए गए थे। दीपों से मशाल, स्वास्तिक, ॐ, त्रिशूल और कलश सहित भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक परंपराओं को प्रदर्शित करती विभिन्न आकृतियां तैयार की गई थीं। हजारों दीपों की जगमगाहट और आदियोगी की विशाल प्रतिमा ने आयोजन को विशेष भव्यता प्रदान की।

कार्यक्रम की शुरुआत ‘ॐ नमः शिवाय’ के जप से हुई। इसके बाद गायत्री मंत्र के उच्चारण ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालु आदियोगी की प्रतिमा के सानिध्य में मां गंगा की आरती में शामिल हुए और भक्ति भाव से पूजा-अर्चना की।

कई दिनों की मेहनत से साकार हुआ भव्य आयोजन

इस विशाल आयोजन को सफल बनाने के लिए मां दुर्गा युवा शक्ति की टीम ने नेतृत्व किया। पूरे ब्लॉक में अलग-अलग टीमें गठित की गई थीं, जिन्होंने समन्वय और व्यवस्थित तरीके से दीपों को सजाने तथा प्रज्वलित करने का कार्य किया। आयोजन के पीछे युवाओं की मेहनत, अनुशासन, सामूहिक सहभागिता और समर्पण साफ नजर आया।

नगरवासियों के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में मातृशक्ति ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। दीपों को सजाने से लेकर उनके प्रज्वलन तक महिलाओं की सक्रिय भूमिका रही, जिसने आयोजन को सामाजिक एकता और सामूहिक आस्था का प्रतीक बना दिया।

नदी की सफाई कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

गंगा आरती के आयोजन के साथ मां दुर्गा युवा शक्ति के सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। कार्यक्रम की तैयारियों के दौरान नदी तट की सफाई कर गंदगी हटाई गई। स्वयंसेवकों ने एकजुट होकर श्रमदान किया और नदी के आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ बनाने में योगदान दिया।

युवाओं की इस पहल ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आयोजन केवल आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से सामाजिक जिम्मेदारी, स्वच्छता और प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई जा सकती है। डोंड़की नदी तट पर श्रम, सेवा और समर्पण का यह संगम आयोजन की खास पहचान बना।

प्रशासन का मिला सहयोग, बनी रही व्यवस्था

कार्यक्रम के दौरान पुलिस प्रशासन, स्थानीय एसडीएम और तहसीलदार सहित प्रशासनिक अमले का सहयोग मिला। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए यातायात एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास किए गए, जिससे आयोजन व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।नगर पंचायत प्रशासन ने साफ सफाई में अहम योगदान दिया।

अतिथियों का काशी के पुरोहितों ने किया सम्मान

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व नगर पंचायत उपाध्यक्ष प्रमोद गुप्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप सिन्हा, व्यापारी संघ अध्यक्ष राजेश अग्रवाल, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष अरविंद गुप्ता और शारदा ऑटो के संचालक अनिल गुप्ता उपस्थित रहे। काशी से पधारे पुरोहितों ने अतिथियों को तिलक लगाकर सम्मानित किया।

कार्यक्रम का संचालन पत्रकार योगेश थवाईत ने किया। उन्होंने दीप प्रज्वलन के दौरान ‘चलो करें स्वागत आरती सजा लें, दीप जला लें, नया युग चला आ रहा है’ गीत का गान किया, जिससे श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्तिभाव का संचार हुआ।

महानवमी के अवसर पर आयोजित इस भव्य गंगा आरती ने बगीचा में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता, पर्यावरण संरक्षण और युवा शक्ति के सामूहिक प्रयासों की एक प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की। 31 हजार दीपों की रोशनी से जगमगाता डोंड़की नदी तट लंबे समय तक श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार दृश्य बन गया।

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