जशपुर,टीम पत्रवार्ता,05 फरवरी 2026
बाल विवाह के खिलाफ संघर्ष को राज्य के अंतिम छोर तक पहुंचाने और ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने गृह नगर जशपुर से ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस रथ पर बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता संदेशों के साथ लोगों से शपथ लेने हेतु एक विशेष शपथ-पट भी लगाया गया है। यह रथ 8 मार्च (अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस) तक प्रदेश के गांवों और कस्बों से गुजरेगा।
यह अभियान भारत सरकार के 100 दिवसीय राष्ट्रव्यापी गहन जागरूकता अभियान के तहत संचालित किया जा रहा है। जिले में यह रथ समर्पित सेंटर फॉर पावर्टी एलिविएशन एंड सोशल रिसर्च द्वारा निकाला जा रहा है, जो बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्यरत देश के सबसे बड़े नागरिक नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) का सहयोगी संगठन है। जेआरसी के 250 से अधिक सहयोगी संगठन देश के 450 जिलों में बाल विवाह उन्मूलन और बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने के लिए कार्यरत हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रथ को रवाना करने के बाद कहा,
“राज्य में बाल विवाह की प्रथा में काफी कमी आई है। हम बालोद जिले को बाल विवाह मुक्त घोषित कर चुके हैं। सरकार, नागरिक समाज संगठनों और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से हमें विश्वास है कि छत्तीसगढ़ जल्द ही बाल विवाह से पूरी तरह मुक्त होगा।”
दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचेगा जागरूकता संदेश
पोस्टर, लाउडस्पीकर संदेशों और शपथ-पट से सुसज्जित यह रथ विशेष रूप से इस तरह तैयार किया गया है कि यह सुदूर एवं हाशिये के समुदायों तक पहुंच सके। चारपहिया वाहन प्रमुख मार्गों को कवर करेंगे, जबकि दूरस्थ गांवों में मोटरसाइकिल और साइकिल कारवां के माध्यम से अभियान चलाया जाएगा।
समर्पित संस्था के निदेशक डॉ. संदीप शर्मा ने कहा,
“यह रथ पंचायतों, शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को जोड़ते हुए जमीनी स्तर पर मजबूत जनजागरण करता है। बाल विवाह की रोकथाम के लिए समुदाय आधारित चेतना जरूरी है, और यह रथ घर-घर तक वही संदेश पहुंचा रहा है।”
छत्तीसगढ़ की अग्रणी भूमिका
बाल विवाह उन्मूलन की दिशा में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी रहा है।
बालोद जिला वर्ष 2025 में देश का पहला बाल विवाह मुक्त जिला बना
सूरजपुर जिले की 75 ग्राम पंचायतें बाल विवाह मुक्त घोषित की जा चुकी हैं
‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ से उम्मीद है कि यह अभियान राज्य के अंतिम गांव तक जागरूकता का संदेश पहुंचाएगा।
यात्रा के दौरान होंगे विविध कार्यक्रम
यह रथ पंचायतों, जिला प्रशासन, बाल विवाह निषेध अधिकारियों (CMPO) एवं अन्य विभागों के सहयोग से
स्कूलों
ग्राम सभाओं
धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों
तक पहुंचेगा। अभियान के दौरान नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सर्वाइवरों की कहानियों के माध्यम से जनजागरूकता फैलाई जाएगी।
देशभर में इस समय जेआरसी के ऐसे ही रथ 25 राज्यों के 451 जिलों में चल रहे हैं। छत्तीसगढ़ के 11 जिलों में जेआरसी के 6 सहयोगी संगठन सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
कानूनी प्रावधान
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (PCMA), 2006 के अनुसार बाल विवाह का आयोजन, समर्थन, भागीदारी या इससे संबंधित किसी भी प्रकार की सेवा प्रदान करना दंडनीय अपराध है, जिस पर कानूनी कार्रवाई की जाती है।



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