रायपुर, टीम पत्रवार्ता, 16 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा “रक्षक (RAKSHAK) पाठ्यक्रम” को राज्य के महाविद्यालयों में लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समाज में बाल सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है।
इस दिशा में पूर्व में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े तथा उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा के सहयोग से एमओयू संपन्न किया गया था, जो इस पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन की दिशा में अहम कदम साबित हुआ।
इसी क्रम में बुधवार को रायपुर स्थित Hotel Babylon में विश्वविद्यालय स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित की गई, जिसमें “रक्षक” पाठ्यक्रम की उप-इकाइयों को अंतिम रूप दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। आयोग के सचिव प्रतीक खरे एवं डायरेक्टर संगीता बिंद ने अतिथियों का स्वागत किया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम केवल शैक्षणिक पहल नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा का एक सशक्त सामाजिक अभियान है।”
बैठक में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव और विशेषज्ञ शामिल हुए।
बैठक में पाठ्यक्रम की संरचना, उपयोगिता और व्यवहारिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। सभी प्रतिनिधियों ने इस पहल को समय की आवश्यकता बताते हुए इसके सफल क्रियान्वयन के लिए सहयोग का आश्वासन दिया।
आयोग को उम्मीद है कि आगामी शैक्षणिक सत्र से यह पाठ्यक्रम लागू होगा, जिससे विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों की सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।


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