... EXCLUSIVE :" कहाँ हैं स्वास्थ्य मंत्री..? " जशपुर स्वास्थ्य विभाग में "करोड़ों" का "फर्जीवाडा"..? बिना टेंडर हो गई खरीददारी,न क्रय नियम न क्रय समिति,सैकड़ों बिलों के भुगतान की रची जा रही साजिश,कलेक्टर को रखा अँधेरे में,अब सामने आया सच तो ...कलेक्टर ने कहा .....

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EXCLUSIVE :" कहाँ हैं स्वास्थ्य मंत्री..? " जशपुर स्वास्थ्य विभाग में "करोड़ों" का "फर्जीवाडा"..? बिना टेंडर हो गई खरीददारी,न क्रय नियम न क्रय समिति,सैकड़ों बिलों के भुगतान की रची जा रही साजिश,कलेक्टर को रखा अँधेरे में,अब सामने आया सच तो ...कलेक्टर ने कहा .....

 


जशपुर,टीम पत्रवार्ता,25 मई 2021

छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला इन दिनों अपने कारनामों से सुर्ख़ियों में बना हुआ है।स्वास्थ्य विभाग जशपुर में करोड़ों के फर्जीवाड़े का ताजा मामला सामने आया है जहाँ कार्यालय सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक जशपुर के द्वारा पिछले दो वर्षों में बिना क्रय नियमों का पालन किये,बिना टेंडर करोड़ों की खरीददारी कर ली गई।कागजों में खरीददारी का आंकड़ा देखें तो 2019-20 व् 2020-21 में लगभग 109 फर्मों से 1 करोड़ 36 हजार 9 सौ 74 रूपए की खरीददारी स्वास्थ्य विभाग ने की है।हांलाकि अब तक इन सामग्रियों का भौतिक सत्यापन नहीं हो पाया है।फिलहाल भुगतान को लेकर जद्दोजहद जारी है।कलेक्टर ने जाँच के बाद आगे की कार्यवाही की बात कही है

मामले में सारा फर्जीवाडा तब सामने आया जब लॉकडाउन का फायदा उठाते हुए चोरी छिपे इन खरीदी के भुगतान के लिए प्रयास शुरु हुआ।पत्रवार्ता को मिले अहम् दस्तावेजों से पता चलता है कि कार्यालय सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक जशपुर के द्वारा 2019-20 व् 2020-21 में स्वास्थ्य विभाग के लिए आवश्यक सामग्रियों की खरीदी की गई।सबसे खास बात यह कि सिविल सर्जन के द्वारा अपनी क्षमता से अधिक खरीददारी की गई जिसमें न तो क्रय नियमों का पालन किया गया न ही क्रय समिति बनी,न ही टेंडर निविदा आमंत्रित की गई और न ही ख़रीदे गए सामग्री का भौतिक सत्यापन किया गया।

खबर में आप और गहराई से जाएं इससे पहले देखें छत्तीसगढ़ ही नहीं मध्यप्रदेश की कुछ फर्म से भी स्वास्थ्य विभाग ने सारे नियमों को ताक में रखते हुए खरीददारी की।इसमें सबसे अधिक खरीदी के बिल रायगढ़ के फर्मों के  हैं जिनके द्वारा देयक बिल प्रस्तुत किया गया है।हांलाकि कोविड की खरीददारी में शासन ने कुछ छुट दी हुई है लेकीन यहां प्रस्तुत किये गए देयक कोविड से संबंधित नहीं हैं। इसके अलावा भी यहाँ खरीदी की बातें सामने आ रही हैं।

देखिये किस फर्म से हुई कितने की खरीददारी ..?



भुगतान के लिए शुरु हुआ षड्यंत्र

जब उक्त खरीददारी के लिए भुगतान की बात सामने आई तो क्रय एवं बिल भुगतान की जिम्मेदारी सम्हाल रहे कर्मचारी को उसके प्रभार से हटा दिया गया।दस्तावेजों से स्पष्ट पता चलता है कि नियम विरुद्ध स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी इन करोड़ों के लंबित बिलों का भुगतान आनन फानन में कराना चाहते हैं।दरअसल 01 अप्रैल को सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक जशपुर द्वारा जारी आदेश के मुताबिक क्रय एवं बिल भुगतान की जिम्मेदारी मुख्य लिपिक को दी गई थी।नियमानुसार उन्होंने भुगतान के लिए कार्यवाही आगे बढ़ाते हुए नियमों का हवाला दिया।जिसमें उन्होंने क्रय नियम व सिविल सर्जन के क्रय क्षमता व भुगतान का भी उल्लेख किया।

इसके बाद उक्त मुख्य लिपिक को क्रय बिल भुगतान के प्रभार से हटाकर अन्य कर्मचारी को प्रभार दे दिया गया।जिससे स्पष्ट है कि नियम का पालन करने वाले कर्मचारी को हटाकर गलत तरीके से विभाग उक्त बिलों का भुगतान कराना चाहता है।

 



01 अप्रैल को सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक जशपुर द्वारा जारी आदेश के बाद पुनः 06 मई को नया आदेश जारी कर मुख्य लिपिक का प्रभार फिर से बदल दिया गया

मुख्य लिपिक से प्रभारी को दिया भुगतान का जिम्मा

मुख्य लिपिक द्वारा उक्त बिलों के भुगतान के लिए अनुमोदन पश्चात सिविल सर्जन को नस्ती अग्रेषित करने का आदेश दिया गया था।जिसे बदलकर प्रभारी लिपिक के अनुमोदन पश्चात प्रस्तुत करने का आदेश सिविल सर्जन द्वारा जारी कर दिया गया।नियमानुसार मुख्य लिपिक को ही यह अधिकार दिया गया है।


ये हैं क्रय नियम 

यहाँ बताया गया है कि उक्त देयकों का भुगतान कार्यालय प्रमुख की वित्तीय शक्तियों से अधिक हैं जिसमें सिविल सर्जन को भुगतान करने का अधिकार नहीं है।आप देख सकते हैं नीचे सूची में सिविल सर्जन को किन सामग्रियों के लिए कितना वित्तीय अधिकार प्राप्त है इसके बावजूद करोड़ों के बिलों के भुगतान की कवायद सिविल सर्जन द्वारा की जा रही है।वह भी तब जब सामग्री की खरीददारी सरे नियम कायदों को ताक में रखकर की गई है।नियमानुसार निविदा जारी कर स्थानीय व् राष्ट्रीय अख़बारों में इसे प्रकाशित कराया जाना चाहिए था जिसमें टेंडर प्रक्रिया संपन्न की जानी थी।जबकि ऐसा कुछ भी नहीं किया गया।न ही निविदा का प्रकाशन हुआ न क्रय समिति बनी और न ही सामग्री का भौतिक सत्यापन हुआ और करोड़ों की खरीददारी कर ली गई।



फर्जी बिल लगाकर आहरण का दबाव 

आप देखेंगे कई ऐसे बिल हैं जो संदेहास्पद हैं जिनमे दिनांक का भी उल्लेख नहीं है।लम्बे समय से बिल लगाकर फर्जी आहरण के मामले सुनाई आते रहे हैं।ऐसे में आवश्यक है सभी बिलों की जाँच कर इसका भौतिक सत्यापन भी किया जाना चाहिए।फिलहाल इस नियम विरुद्ध खरीददारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग सवालों के घेरे में हैं।मामले में  जाँच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि इस भ्रष्टाचार में कौन कौन संलिप्त है।

आडिट भी सवालों के घेरे में

मामले में स्वास्थ्य विभाग के सालाना आडिट को लेकर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं।जब इतनी बड़ी खरीददारी बिना क्रय नियमों के कर ली गई तो लेखा जोखा रखने वाले आडिटर भी सवालों के घेरे में आ गए हैं।जशपुर स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार का खेल लम्बे समय से चल रहा है इसके बावजूद अब तक न तो जाँच हुई न ही कार्यवाही जिसके कारण जिले का स्वास्थ्य विभाग निरंकुश बना हुआ है।

खास बात तो यह कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कभी भी जिला कलेक्टर से कार्योत्तर स्वीकृति नहीं ली गई है।जो कि नियम विरुद्ध है।अब देखना होगा उच्चाधिकारी इस भुगतान पर अपनी कलम फंसाते हैं या नियमानुसार जांच कर कार्यवाही करते हैं।

कलेक्टर को नहीं है जानकारी 

उक्त खरीदी के मामले में  जब जिला कलेक्टर महादेव कावरे से बात की गई तो उन्होंने कहा की स्वास्थ्य विभाग की सभी खरीददारी कार्यालय सिविल सर्जन के द्वारा निष्पादित की जाती है।कोविड सम्बन्धी खरीददारी के लिए शासन ने कुछ छुट दी है।पिछले दो वर्षों के खरीदी की जानकारी नहीं है।यहाँ भुगतान सम्बन्धी कोई फाईल नहीं पंहुची है।फाईल आने के बाद नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।

 



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