... बीजेपी के वटवृक्ष "देवकी महाराज"।मजबूत जड़ों से निकलेंगी नई कोपलें।

बीजेपी के वटवृक्ष "देवकी महाराज"।मजबूत जड़ों से निकलेंगी नई कोपलें।


जशपुर(पत्रवार्ता.कॉम) आत्मा जन्म मरण से परे होती है,शरीर पंचतत्व में विलीन हो जाता है।जागृत आत्माएं जो जीते जी कुछ कर गुजरती है उस अमिट नाम को कोई नष्ट नहीं कर सकता।राजनीति के गलियारों के साथ हर दिल मे आप जीवंत बने रहेंगे।

राजनीति के अजेय योद्धा
स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव एवं
केंद्रीय राज्य मंत्री विष्णुदेव साय
के गुरु बालकृष्ण शर्मा (देवकी महाराज)
का महाप्रयाण भाजपा के लिये
एक युग का अंत है।

आजादी के बाद छग का इलाका भले ही कांग्रेस के लिए अभेद किला रहा हो लेकिन जशपुर जिले में जनसंघी नेतृत्व के साथ अपना झंडा बुलंद करने वाले देवकी महाराज कार्य सदा स्तुत्य रहेंगे।

एक दौर वह भी था जब भाजपा का झंडा उठाने के लिए लोग नहीं मिला करते थे उस दौर में देवकी महाराज युवा जोश के साथ ऐसे कार्य बखूबी किया करते थे।भाजपा के लिए सत्ता का सिंहासन देवकी महाराज जैसे व्यक्तित्व की निष्ठा एवं उनकी जीवटता के संभव हो सका।

स्वर्गीय देवकी महाराज का जन्म 20 दिसंबर 1934 को हुआ
स्कूली शिक्षा हरियाणा के भिवानी में हुई 1952 में उन्होंने वैश्य कॉलेज भिवानी से स्नातक की शिक्षा पूरी की। इस बीच 1945 में वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सम्पर्क में अन्नू जी प्रान्त प्रचारक पंजाब के जरिये आये। कॉलेज की शिक्षा पूरी करने के पहले उन्होंने 1950 में संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर्ष की शिक्षा हासिल की इस बीच पिता को हीराकुंड बांध में ठेकेदारी के सिलसिले में ओडिसा के राजगांगपुर आना पड़ा।

जशपुर में 1952 के दौरान आरके देशपाण्डे द्वारा वनवासी कल्याण आश्रम की नींव डाली गई,1953 में ओडिशा, बिहार, मध्यप्रदेश के आरएसएस के स्वयं सेवको की जमशेदपुर में बैठक हुई जिसमें प.पु. गुरुजी भी आये।इस बैठक में देशपांडे द्वारा ईसाई मिशनरी की गतिविधियों को रोकने की कार्य योजना बनाई,ईसाई मिशनरीज की गतिविधियों की शुरुवात देवकी महाराज ने शुरू की जो बाद में ऑपरेशन घर वापसी में तब्दील हो गया।

इस कार्य की शुरुवात के लिए देवकी महाराज कुनकुरी (जशपुर) आये इस दौरान उन्होंने स्व.भीमसेन चोपड़ा के साथ नियोगी कमीशन के सामने सभी तथ्यों को प्रस्तुत किया।समय बीतता गया,उनके कार्य का दायरा बढ़ता गया,स्वर्गीय लखीराम जी की सलाह पर उन्होंने1957 में जनसंघ की नींव मजबूत करने का काम प्रारम्भ किया। 1958 के दौरान जनसंघ के रायगढ़ जिलामंत्री का दायित्व उन्हें दिया गया था।

जनसंघ के कार्य के दौरान उन्हें माननीय मोरू भाऊ गद्रे जी का सानिंध्य प्राप्त हुआ,यही से सक्रिय राजनीति में कदम बढने शुरू हुए और 26 जून 1975 का आपात काल जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओ के सर पर कहर बन कर टूटा आपातकाल लगने के 2 दिनों के बाद ही सबसे पहले देवकी महाराज को मीसाबंदी में जेल में डाल दिया गया।

जनसंघ से जुड़े रहने वालों के लिए यह जेल यात्रा मानो उनका मनोबल बढ़ाने का जरिया रहा,रायगढ़ जेल में भी उन्हें प्रताड़ित करने का प्रयास जारी रहा तात्कालिक जिलाधीश के शंकर नारायण के निर्देश पर केंद्रीय जेल रायपुर भेजा गया, जेल में अव्यवस्था के खिलाफ मुखर होकर विरोध किया जिस पर जेल प्रबंधन को झुकना पड़ा और व्यवस्थाएं सुधरी, कांग्रेसी चाहे कोई भी हो कितना भी ताकतवर हो उनके पुरजोर विरोध की परिपाटी देवकी महाराज के जरिये कुनकुरी से प्रारंभ की गई।

4 फरवरी 1977 में 20 माह की यात्रा के बाद देवकी महाराज रिहा हुए और जिले की राजनीति में ताकतवर बनकर उभरे।स
अपने जीवन को चुनौती में रुप मे मानने वाले देवकी महाराज ने कभी अपने आप से समझौता नहीं किया जिसका परिणाम है कि वे आधार स्तंभ बनकर आज भी खड़े हैं। 1962 में गौ रक्षा आंदोलन में शामिल हुए इस हेतु उन्हें तीन दिन तिहाड़ जेल दिल्ली में बंद कर दिया गया।

सन 1970 में भोपाल में जेल भरो आन्दोलन के दौरान अपनी गिरफ्तारी दी।अविभाजित रायगढ़ में 1989 के दौरान जिला भाजपाध्यक्ष निर्विरोध चुने गए।वे राष्ट्रीय परिषद के सदस्य भी रहे।स्व. दिलीप सिंह जूदेव,विष्णुदेव साय और गणेश राम भगत के राजनीतिक गुरु के रुप में उन्हें जाना जााता है।

देवकी महाराज के साथ पी के तामस्कर, बद्रीधर दीवान, महरनलाल पांडेय,बलिहार सिंह, ननकी राम कंवर,दाऊ कल्याण सिंह,पं.रेवती रमन मिश्र, लरंग साय, प्रभु नारायण त्रिपाठी, पंडरी राव कृदत्त जैसे कद्दावर नेताओ ने कार्य किया है।अपनी तेज बुलंद आवाज ओजस्वी भाषण के लिए पहचाने वाले देवकी महाराज का जीवन संघर्षों से भरा रहा।

अंतकाल में भी पार्टी ने नहीं दिया ध्यान।

पिछले 15 दिनों से बीमार चल रहे देवकी महाराज अपनी सरकार के क्रियाकलापो से भी नाराज चल रहे थे,कभी पार्टी की जड़ो को मजबूत करने वाले देवकी महाराज अक्सर कहा करते थे कि आज भाजपा के इस वृक्ष पर लगे फलों के लिए होने वाली लड़ाई को देख दुख होता है,सत्ता की कुर्सी को देख आपस में लड़ेंगे तो कांग्रेसियो ओर भाजपाइयों में बुनियादी फर्क क्या होगा,जिले में हर भाजपाई की आंखे इस विरले नेता को खोने के गम में गीली हो गई है भाजपा की राजनैतिक पाठशाला का प्रधानपाठक ही चला गया अब सिद्धांतो आदर्शों का पाठ कौन पढ़ायेगा यह सवाल रह रहकर सबके दिलों में कौंध रहा है।

पोतों को मिला महाराज का गुरु ज्ञान।

देवकी महाराज के पुत्र राजेन्द्र का बड़ा पुत्र अमन तथा बेटी अनिता शर्मा का सबसे छोटा पुत्र सुमित शर्मा अपने दादा के नक़्शे कदम पर चल रहे हैं। आने वाले भविष्य में देवकी महाराज की राजनैतिक विरासत को यही सम्हालेंगे।

अमन संगठन के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए नगर पंचायत कुनकुरी में एल्डरमैन है वहीं सुमित अभाविप के रायपुर महानगर महामंत्री के पद पर रहते हुये संगठन की जड़ों को मजबूत कर रहे हैं।

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