... बिलासपुर "शहर" "अमर" और "पोस्टर" का क्या है चुनावी कनेक्शन।

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बिलासपुर "शहर" "अमर" और "पोस्टर" का क्या है चुनावी कनेक्शन।

बिलासपुर(पत्रवार्ता. कॉम)  कहते हैं जब जनता मुखर हो जाये और अपने ही शासन का विरोध करने लगे तो अच्छी से अच्छी राजशाही भी ध्वस्त हो जाती है।


बिलासपुर के कद्दावर मंत्री इन दिनों ऐसे ही विरोध से जूझ रहे हैं,सीवरेज,सड़क को लेकर पहले ही लोगों में काफी रोष पनप चुका है।भले ही गड्ढे को पाटने की पुरी कोशिश की गई हो पर कसक तो बनी हुई है।

अब चुनावी साल है तो विपक्ष भी एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है।बीते दिनों शहर में"अबकी बार बीजेपी सरकार के पोस्टर पर" "क्यों" लिखकर जमकर राजनीति हुई थी।

वहीं इस बार "सेठ तो गयो" के पोस्टर से 
पूरे शहर में नए चर्चे शुरू हो गए हैं।अचानक
 हमारी भी नजर पड़ी एक कचरे के कंटेनर में 
पोस्टर चिपका हुआ था,पहले तो लगा कोई फिल्मी 
पोस्टर होगा पर पास आए देखने पर दिखे
" सेठ जी" और उस पर लिखा था "सेठ तो गयो"।

फिलहाल इस मुद्दे पर यह तो स्पष्ट है कि  चुनावी साल है और पोस्टर वार जारी है। काँग्रेस भाजपा का पोस्टर वार आमने सामने हैं।फिलहाल यह पोस्टर शहर की राजनीति में खूब चर्चा बटोर रहा है।

आखिर पोस्टर में शहर विधायक व सूबे के कद्दावर मंत्री अमर अग्रवाल जो दिख रहे हैं। जिसमें "सेठ तो ग्यो" लिख उनके विफलता को प्रदर्शित करते हुए आगामी चुनाव में सत्ता से बाहर होने के संकेत दिए गए हैं। 

बेशक इस पोस्टर के पीछे काँग्रेस है, लेकिन शहर में पहली बार ऐसा हो रहा है कि काँग्रेसी मंत्री महोदय से सीधे टकराने के मूड में नज़र आ रहे हैं। तभी तो शहर के चौक चौराहों सड़कों में किसी फिल्म के पोस्टर की तरह इसे प्रचारित किया जा रहा है।

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