रायपुर/बानबरद, टीम पत्रवार्ता, 25 अक्टूबर 2026।
छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस के अवसर पर दुर्ग जिले के अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बानबरद में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महान पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के लिए उनके नाम पर इसी वर्ष से लोककला अलंकरण शुरू करने की घोषणा की। साथ ही, उनके गृह ग्राम गनियारी को कला ग्राम के रूप में विकसित करने तथा वहां के हाईस्कूल का नामकरण तीजन बाई के नाम पर करने की पहल की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने महासम्मेलन में शामिल 70 लोककला दलों को 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा भी की। इनमें पंडवानी कलाकारों के साथ चार पंथी और तीन आदिवासी नृत्य दल शामिल हैं। इस अवसर पर उन्होंने बानबरद मिडिल स्कूल को हाईस्कूल में उन्नत करने और अहिवारा रेलवे क्रॉसिंग से अटल परिसर तक बीटी रोड बनाने की घोषणा भी की।
विश्व पटल पर छत्तीसगढ़ की पहचान बनी पंडवानी
महासम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककलाएं प्रदेश के इतिहास, जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। इनका संरक्षण करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार लोककलाओं के संवर्धन के साथ कलाकारों को प्रोत्साहन और व्यापक मंच उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
उन्होंने पद्म विभूषण तीजन बाई को याद करते हुए कहा कि उनकी अद्वितीय कला-साधना ने पंडवानी को देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाई। पंडवानी ऐसी लोकविधा है, जिसमें कलाकार गायन, अभिनय और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से महाभारत की कथाओं और पात्रों को जीवंत कर देते हैं। तीजन बाई ने अपनी प्रतिभा से इस कला को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया।
गनियारी को कला ग्राम बनाने की पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजन बाई की सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए उनके गृह ग्राम गनियारी को कला ग्राम के रूप में विकसित करने की पहल की जाएगी। उनके नाम पर लोककला अलंकरण इसी वर्ष राज्योत्सव के अवसर पर प्रदान किया जाएगा। इससे प्रदेश के लोक कलाकारों को अपनी परंपरागत कलाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
फिल्म सिटी से कलाकारों को मिलेंगे नए अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा और स्थानीय कलाकारों को व्यापक मंच देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड का गठन किया गया है। नवा रायपुर में फिल्म सिटी विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इससे फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ कलाकारों और युवाओं के लिए रोजगार तथा रचनात्मक अवसरों के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।
उन्होंने ज्ञानश्रोत कला मंच के 46 वर्षों से लोककला एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने पद्मश्री डॉ. उषा बारले और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी।
लोककलाएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा : गजेन्द्र यादव
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि पंडवानी, पंथी, भरथरी, ददरिया और सुवा जैसी लोकविधाएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं। ये केवल गीत-संगीत और नृत्य नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा हैं। उन्होंने कलाकारों से महासम्मेलन की परंपरा को आगे भी उत्साहपूर्वक जारी रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम को विधायक रिकेश सेन ने भी संबोधित किया। पद्मश्री डॉ. उषा बारले ने स्वागत उद्बोधन दिया और कलाकारों से जुड़ी विभिन्न मांगों की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट किया।
इस अवसर पर दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, साजा विधायक ईश्वर साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोक कलाकार और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


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