जशपुर, टीम पत्रवार्ता, 29 सितंबर 2026
पत्थलगांव थाना क्षेत्र के पाकरगांव में प्राइवेट जमीन पर बिजली के लोहे के खंभे की शिफ्टिंग के दौरान मंगलवार को बड़ा हादसा हो गया। शिफ्टिंग के दौरान खंभे में करंट प्रवाहित होने से काम में लगे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। हादसे में दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो मजदूर गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। अन्य मजदूरों को भी चोटें आने की जानकारी है।
बताया जा रहा है कि खंभा शिफ्टिंग के कार्य में करीब 10 से 12 मजदूर लगे हुए थे। काम के दौरान अचानक खंभे में करंट दौड़ गया, जिससे मौके पर अफरातफरी मच गई। मृतकों की पहचान ठामन ध्रुव और अलेक भगत के रूप में हुई है।
विभाग ने कहा- पाकरगांव में जारी नहीं हुआ था कोई परमिट
हादसे के बाद विद्युत विभाग के अधिकारियों के बयान ने मामले को और गंभीर बना दिया है। पत्थलगांव के कार्यपालन यंत्री सत्येंद्र मरकाम के अनुसार पाकरगांव में खंभा शिफ्टिंग के लिए विभाग की ओर से कोई परमिट जारी नहीं किया गया था।
यदि विभागीय बयान की पुष्टि जांच में होती है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि बिना अनुमति विद्युत खंभे की शिफ्टिंग का काम किसके स्तर पर और किन परिस्थितियों में कराया जा रहा था।
अधीक्षण अभियंता ने एफआईआर के दिए निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए विद्युत विभाग ने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कुनकुरी के अधीक्षण अभियंता सत्य प्रकाश कुमार ने बताया कि संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि खंभा शिफ्टिंग का काम किसके कहने पर शुरू हुआ, इसमें किसकी जिम्मेदारी थी और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
पुलिस ने दर्ज किया मर्ग, जांच जारी
पत्थलगांव एसडीओपी डॉ. धुर्वेश जायसवाल के अनुसार पाकरगांव में प्राइवेट जमीन पर खंभा शिफ्टिंग के दौरान दो मजदूरों की मौत हुई है। दोनों मृतकों की पहचान ठामन ध्रुव और अलेक भगत के रूप में हुई है। घटना के संबंध में पत्थलगांव थाना में मर्ग कायम कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
एसडीएम ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से की मुलाकात
हादसे की सूचना मिलने के बाद पत्थलगांव एसडीएम क्षितिज गुरभेले सिविल अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती घायलों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों को घायलों का समुचित उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
हादसे ने खड़े किए कई गंभीर सवाल घटना के बाद विद्युत सुरक्षा और जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल सामने आए हैं—
जब विभाग के अनुसार कोई परमिट जारी नहीं हुआ था तो खंभा शिफ्टिंग का काम किसने शुरू कराया?
काम के दौरान विद्युत लाइन और खंभे को सुरक्षित करने की प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं?
मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे या नहीं?
बिना विभागीय अनुमति काम शुरू करने की स्थिति कैसे बनी?
संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर कब दर्ज होगी?
हादसे में विभागीय स्तर पर किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं?
मृतकों के परिवारों और घायलों के लिए मुआवजे की क्या व्यवस्था होगी?
निष्पक्ष जांच की मांग
हादसे के बाद ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि जांच में जो भी जिम्मेदार पाया जाए, उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा और घायलों के इलाज की पूरी व्यवस्था की मांग भी उठ रही है।
अब जांच का मुख्य बिंदु यही है कि विभागीय अनुमति के बिना खंभा शिफ्टिंग का काम कैसे शुरू हुआ और सुरक्षा व्यवस्था में चूक के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।


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