... खबर पत्रवार्ता : गढ़पहाड़ की गुफा में मिली हजारों साल पुरानी सभ्यता की झलक, जयमरगा बना प्रागैतिहासिक धरोहर का केंद्र।

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खबर पत्रवार्ता : गढ़पहाड़ की गुफा में मिली हजारों साल पुरानी सभ्यता की झलक, जयमरगा बना प्रागैतिहासिक धरोहर का केंद्र।

 


जशपुर, टीम पत्रवार्ता,03 अप्रैल 2026

प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहचाने जाने वाले जशपुर जिले में अब प्रागैतिहासिक सभ्यता के महत्वपूर्ण प्रमाण भी सामने आए हैं। जिले के मनोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम जयमरगा स्थित गढ़पहाड़ की गुफा में आदिमकालीन शैलचित्र मिलने से यह क्षेत्र पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। यह खोज इस बात के स्पष्ट संकेत देती है कि हजारों वर्ष पूर्व यहां आदिमानवों का निवास रहा होगा और उन्होंने अपने जीवन, शिकार और परिवेश को इन चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त किया।

जंगल और पहाड़ों के बीच छिपा है इतिहास

जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित जयमरगा ग्राम, ग्राम पंचायत डड़गांव का आश्रित गांव है, जिसकी आबादी लगभग 1400 है। गांव तक पहुंचने के लिए सड़क सुविधा उपलब्ध है, लेकिन गुफा तक पहुंचने के लिए गढ़पहाड़ पर करीब 300 मीटर की कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है। घने जंगलों और प्राकृतिक वातावरण से घिरा यह क्षेत्र अपने भीतर हजारों साल पुराना इतिहास समेटे हुए है।

स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह गुफा आस्था का केंद्र भी है, जहां वे पूजा-अर्चना करते हैं। अब यह स्थल धार्मिक के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व भी प्राप्त कर चुका है।

शैलचित्रों में दर्ज है आदिमानव का जीवन

पुरातत्त्ववेत्ता डॉ. अंशुमाला तिर्की और बालेश्वर कुमार बेसरा के अनुसार, जयमरगा क्षेत्र प्रागैतिहासिक स्थलों से समृद्ध है। यहां के पहाड़, जंगल और समीप बहने वाले जल स्रोत आदिमानवों के लिए आदर्श निवास स्थल रहे होंगे।

गुफा में बने शैलचित्रों में—

मानव आकृतियों के समूह

शिकार करते हुए दृश्य

पशु आकृतियां जैसे बैल, तेंदुआ और हिरण

विभिन्न ज्यामितीय आकृतियां और रहस्यमयी चिन्ह

इन चित्रों में लाल और सफेद रंग का उपयोग किया गया है, जो संभवतः हेमाटाइट पत्थर से तैयार किए गए थे। इन चित्रों की शैली से यह भी संकेत मिलता है कि ये अलग-अलग कालखंडों में बनाए गए हैं।

मध्य पाषाण काल के उपकरणों की भी पुष्टि

इस स्थल से मध्य पाषाण काल (Mesolithic Period) के माइक्रोलिथिक उपकरण भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें लुनैट, स्क्रैपर, पॉइंट, ट्रैपेज, साइड स्क्रैपर और ब्लेड शामिल हैं। ये उपकरण शिकार, काटने और अन्य दैनिक कार्यों में उपयोग किए जाते थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गुफा केवल निवास स्थल नहीं बल्कि एक रणनीतिक स्थान भी रही होगी, जहां से आदिमानव ऊंचाई पर बैठकर शिकार के लिए जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखते थे।

संरक्षण और शोध की जरूरत

इतिहास और पुरातत्व के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण इस स्थल पर अभी तक व्यापक स्तर पर संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है। यदि समय रहते इस गुफा और शैलचित्रों को संरक्षित नहीं किया गया, तो यह अमूल्य धरोहर क्षति का शिकार हो सकती है।

पर्यटन के रूप में उभर सकता है नया केंद्र

गढ़पहाड़ की यह गुफा जशपुर जिले के पर्यटन मानचित्र पर एक नया आकर्षण बन सकती है। प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और रोमांचक ट्रैकिंग का संगम इस स्थान को विशेष बनाता है। यदि यहां बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएं और प्रचार-प्रसार किया जाए, तो यह क्षेत्र पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।

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