... BIG ब्रेकिंग पत्रवार्ता जशपुर: पहाड़ी कोरवा बच्चों के टीसी के लिए स्कुल के प्रबंधक ने बकरे के साथ माँगा दस हजार रुपए.....? जशपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था बदहाल,निजी स्कूलों की मनमानी चरम पर,बिना मापदंड के धड़ल्ले से चल रहे निजी स्कूल,भटकने को मजबूर पहाड़ी कोरवा बच्चे,DEO कार्यालय की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में......?

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BIG ब्रेकिंग पत्रवार्ता जशपुर: पहाड़ी कोरवा बच्चों के टीसी के लिए स्कुल के प्रबंधक ने बकरे के साथ माँगा दस हजार रुपए.....? जशपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था बदहाल,निजी स्कूलों की मनमानी चरम पर,बिना मापदंड के धड़ल्ले से चल रहे निजी स्कूल,भटकने को मजबूर पहाड़ी कोरवा बच्चे,DEO कार्यालय की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में......?

 


जशपुर,टीम पत्रवार्ता,24 जून 2022 

BY  योगेश थवाईत 

जशपुर जिले में इन दिनों निजी स्कूलों की मनमानी चरम पर है जिसके कारण जिले की शिक्षा व्यवस्था बदनाम होती नजर आ रही है।राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवा बच्चों के परिजनों से एक निजी स्कुल के प्रबंधक ने टीसी देने के लिए बकरे की मांग कर डाली इतना ही नहीं परिजनों का आरोप है कि प्रबंधक ने टीसी के लिए 10  हजार रुपयों की भी मांग की।

देखिये VIDEO परिजनों ने क्या कहा 

मामला है जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड का जहाँ सेंधवार अम्बाडीपा में संचालित गुरुकुल संस्कृत विद्यालय में प्रबंधक द्वारा पहाड़ी कोरवा बच्चों के टीसी के लिए उनके परिजनों से दस हजार रुपयों के साथ एक बकरे की मांग की गई।जब मामले की जानकारी मिडिया को लगी तो स्कुल प्रबंधन से इस मामले में बात की गई तो आनन फानन में प्रबंधन से टीसी व अंकसूची बिना पैसों के देने की बात कही।

प्रियंका व रेवती की माँ पार्वती ने बताया कि पहले उनके दोनों बच्चे लमदरहा स्कूल में पढ़ते थे जहाँ सीट  खाली न होने के कारण उनके बच्चों का एडमिशन उन्होंने सेंधवार अम्बाडीपा में संचालित गुरुकुल संस्कृत विद्यालय में कराया ।यहाँ गरीबी के कारण वे स्कूल  का फीस  नहीं भर पाए।स्कूल  प्रबंधन के दबाव से वे परेशान हो गए और अपने बच्चों को यहाँ से निकालने के लिए टीसी की मांग करने लगे।

जिसपर स्कुल के प्रबंधक व् प्रधान पाठक फुलेश्वर यादव ने पहाड़ी कोरवा बच्चों की मां से टीसी व अंकसूची के लिए दस हजार रूपए के साथ बकरे की मांग कर डाली।माँ पार्वती ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति खराब है और वे अब अपने बच्चों को पंडरापाठ पहाड़ी कोरवा आश्रम में पढ़ाना हैं पर टीसी व अंकसूची नहीं  मिलने के कारण उनका एडमिशन वहां नहीं हो पा रहा है।

अब समझिये इस स्कुल को जो सेंधवार अम्बाडीपा में गुरुकुल संस्कृत विद्यालय के नाम से वर्ष 2011 से संचालित है जहाँ सारे नियम कायदों को ताक  में रखकर 12 वीं तक की कक्षाएं संचालित हैं।न बच्चों को क्लासरुम की सुविधा न ही स्कूल के लिए आवश्यक मापदंडों का पालन इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ऐसी मेहरबानी कि 12 तक की कक्षाएं यहाँ संचालित की जा रहीं हैं।आपको जानकार आश्चर्य होगा कि इस स्कुल में पहली से सातवीं तक के बच्चे एक ही क्लास रुम में बैठकर शिक्षा ग्रहण करते हैं।इतना ही नहीं निजी स्कूल का एक बोर्ड तक नहीं लगा है। 

जब स्कुल के प्रबंधक फुलेश्वर यादव से शिक्षकों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया की फिलहाल उनके साथ 3 शिक्षक हैं बाकी 7  शिक्षक इस महीने के आखिरी तक आ जाएंगे।अब बड़ा सवाल यह है कि बिना शिक्षकों के बिना क्लासरुम के यह कैसा स्कूल जहाँ बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

"मामले में गुरुकुल संस्कृत विद्यालय के प्रबंधक फुलेश्वर यादव ने बताया कि दूसरे बच्चे 10 हजार फीस देके पढ़ाई करते हैं पहाड़ी कोरवा बच्चों से पैसा नहीं लेता हूँ,बकरा का मांग गाय के बदली में किया गया है,बच्चों को टीसी और अंकसूची प्रदान किया जा रहा है।"

स्कुल प्रबंधन द्वारा इस तरह की डिमांड करना गलत है,मामले में जांच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कार्यवाही की जाएगी,स्कूल सञ्चालन के लिए प्रबंधन को नियमों व मापदंडों का पालन करना अनिवार्य है । छात्राओं के एडमिशन के लिए विभाग द्वारा आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।

आरएल कोसले,बीईओ बगीचा 

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