... मंतूराम ने कहा कि अजीत जोगी,अमित जोगी और डॉ रमन सिंह चाहते हैं कि वे चुनाव मैदान छोड़ दें,पूर्व मंत्री राजेश मूणत के बंगले में हुई थी डील

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मंतूराम ने कहा कि अजीत जोगी,अमित जोगी और डॉ रमन सिंह चाहते हैं कि वे चुनाव मैदान छोड़ दें,पूर्व मंत्री राजेश मूणत के बंगले में हुई थी डील





रायपुर,08 सितंबर 2019 (पत्रवार्ता)

छत्तीसगढ़ के चर्चित अंतागढ़ टेपकांड को लेकर मंतूराम पवार ने शनिवार को प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराया। मंतूराम ने कहा कि अंतागढ़ उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में नाम वापस लेने के लिए साढ़े सात करोड़ की डील हुई। मंतूराम ने इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी, डॉ. रमन सिंह, राजेश मूणत और अमित जोगी का नाम लिया। कोर्ट को बताया कि इन नेताओं से फोन पर फिरोज सिद्धिकी और अमीन मेमन ने बात कराई।

मंतूराम ने कोर्ट को बताया कि अंतागढ़ उपचुनाव मैदान से हटने को लेकर उन पर बेहद दबाव था। अपनी सुरक्षा को देखते हुए उन्होंने हटने का फैसला किया। उपचुनाव के लिए साढ़े सात करोड़ की जो डील हुई, उसमें से एक भी पैसा उनको नहीं मिला। मंतूराम ने कहा कि फिरोज सिद्धिकी ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से फोन पर कथित रूप से बात कराई। उस समय डॉ. रमन अपनी पत्नी के इलाज के लिए देश से बाहर थे।

मंतूराम ने कोर्ट में बताया कि फिरोज सिद्धिकी ने उनसे कहा कि अजीत जोगी, अमित जोगी और डॉ रमन सिंह चाहते हैं कि वे चुनाव मैदान छोड़ दें। यदि चुनाव मैदान से हटोगे नहीं, तो भूपेश बघेल का कद बढ़ जाएगा।

मैंने कहा कि मैं चुनाव लड़ना चाहता हूं, लेकिन फिरोज और अमीन ने दबाव डालकर कहा कि आपको सोचने का समय दे रहे हैं। मंतूराम ने कोर्ट में बताया कि फिरोज और अमीन ने पूर्व मंत्री राजेश मूणत के बंगले ले जाकर बड़ी रकम लेने का प्रलोभन दिया। मुझे पैसे का लालच नहीं था, सिर्फ जान की सुरक्षा के कारण दबाव में था।

गौरतलब है, 2013 में अंतागढ़ विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए भाजपा के विक्रम उसेंडी ने 2014 में कांकेर सीट से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद हुए उप चुनाव में कांग्रेस ने मंतू राम पवार को प्रत्याशी बनाया। भाजपा ने भोजराज नाग को प्रत्याशी बनाया था। करीब 13 लोगों ने नामांकन दाखिल किया, लेकिन भाजपा, कांग्रेस और एक क्षेत्रीय पार्टी के प्रत्याशी को छोड़कर सभी ने नाम वापस ले लिया। एन वक्त पर मंतूराम ने भी नाम वापस ले लिया। इस घटना के करीब एक वर्ष बाद 2015 में एक ऑडियो टेप वायरल हुआ, जिसके आधार पर मंतूराम पर पैसे लेकर नाम वापस लेने का आरोप लगा। इसकी जांच भी हुई, लेकिन वह किसी अंजाम तक नहीं पहुंच सकी। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद फिर नए सिरे से जांच की जा रही है।

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