जन्मदिन विशेष :- कट्टरवादी हिंदुत्व के साथ क्या है पूर्व मंत्री गणेश राम भगत के मजबूत कन्धों का राज ...?


"तन समर्पित,मन समर्पित
और यह जीवन समर्पित
सोचता हूँ जशपुर की धरती
तुझे कुछ और भी दूँ .."

जशपुर 01 जनवरी 2019 (योगेश थवाईत,पत्रवार्ता) इन पक्तियों के साथ 
गणेश राम भगत के संघर्ष की कहानी आपके सामने है 

वर्ष 2018 में पूर्व मंत्री की धर्मपत्नी के निधन के बाद आसान नहीं था पूर्व मंत्री गणेश राम भगत के लिए जन्मोत्सव का आयोजन और पहले भी कभी कोई ऐसा बड़ा आयोजन जन्मदिन पर नहीं हुआ।इस बार तो पूर्व मंत्री ने मना ही कर दिया था पर उन्हें क्या पता था कि जीवन भर उन्होंने जो संघर्ष किया उससे न केवल एक बड़ा कारवां बन गया है बल्कि अब भी लोग बूढ़े कन्धों को उसी मजबूती के साथ विश्वास भरी नजरों से देख रहे हैं

अपना सर्वस्व जशपुर के हित 
में समर्पित करने वाले पूर्व मंत्री 
गणेश राम भगत दिखने में 
अधेड़ हो सकते हैं पर उनकी दृढ़ता 
व फौलादी हौसलों का परिणाम है
 कि आज जशपुर में 
हिंदुत्व का झंडा बुलंद है

1970 के दशक में जब यहाँ सामाजिक बिखराव की स्थिति थी,मिशनरी अपनी जमीन तैयार करने की जोर जुगत में लगे थे,जनजातीय समाज में टकराव चरम पर था ऐसी परिस्थिति में उभरते नक्सलवाद और धर्मान्तरण पर अंकुश लगाने के लिए बाला साहब देशपांडे के नेतृत्व में कल्याण आश्रम ने कमर कसी और हिंदुत्व के मुद्दे पर जनजातीय समाज को समेटने का कार्य शुरू किया गया


स्वर्गीय बालासाहब देशपांडे के साथ पूर्व मंत्री गणेश राम भगत व जगदेव राम ने अपने सामाजिक जीवन की शुरुआत की।10 वर्षों तक कल्याण आश्रम के सान्निध्य में सामाजिक संघर्ष के बाद जनजातीय समाज को एकजुट करने में सफलता हासिल हुई।जिसके बाद आवश्यकता महसूस करते हुए गणेश राम भगत को राजनीति के क्षेत्र में उतारा गया जहाँ उनके राजनीति की शुरुआत जशपुर नगर पालिका पार्षद के चुनाव से हुई

1985 में उन्होंने जशपुर विधानसभा से विधायक का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद अगला विधानसभा चुनाव 1990 में भी जशपुर सीट से ही लड़ा और उनकी जीत हुई।परिणामतःअविभाजित मध्यप्रदेश में सुन्दर लाल पटवा की सरकार बनी जिसमे उन्हें संसदीय सचिव की जिम्मेदारी मिली।दिसंबर 1992 में बाबरी काण्ड के बाद1993 में पांच राज्यों में धारा 356 का प्रयोग करते हुए सरकार भंग कर दी गई जिसके बाद 1993 में फिर से विधानसभा का चुनाव हुआ और 1998 तक कांग्रेस शासन काल में वे जशपुर के फिर से विधायक बने1998 से 2003 तक जशपुर जिले की बगीचा विधानसभा सीट से वे विधायक हुए।2003 से 2008 में फिर से उन्होंने बगीचा विधानसभा सीट पर जीत हासिल की और बीजेपी सरकार में आदिवासी मंत्री बने

लगातार जीत की ऊँचाइयों के साथ गणेश राम भगत की राजनैतिक उड़ान चरम पर थी इस बीच स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव और राजपरिवार के साथ खटास के कारण उन्हें 2008 से 2013 के विधानसभा चुनाव में जशपुर,बगीचा से टिकट नहीं दी गयी और पार्टी ने उन्हें सरगुजा के सीतापुर से टिकट दिया जहाँ उन्हें 1300 मतों से हार का सामना करना पड़ा

सामाजिक नींव के सहारे राजनैतिक उड़ान भरने वाले गणेश राम भगत को पता था कि अंत उसी शुरुआत से होने वाला है जहाँ से उन्होंने अपने सामाजिक जीवन की शुरुआत की थी लिहाजा उन्होंने 2007 में ही जनजातीय सुरक्षा मंच का गठन कर लिया था और हार के बाद 2008 से उन्होंने जनजातीय सुरक्षा मंच के बैनर तले अपनी आवाज को बुलंद रखा।हिंदुत्व,धर्मान्तरण व नक्सलवाद के मुद्दे पर जनजातीय समाज के बीच अपनी पैठ मजबूत करते रहे

इसका असर यह हुआ कि जनजातीय समाज पूर्व मंत्री के साथ हजारों की संख्या में कंधे से कन्धा मिलाकर खड़े हो गया और 2013 में उन्होंने जशपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय नामांकन भरा।इसी दरम्यान दिलीप सिंह जूदेव के निधन के बाद लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि स्वरुप वोट देते हुए बीजेपी को जीत दिलाई और गणेश राम भगत फिर से हार गए


इस हार के बाद पूर्व मंत्री को बीजेपी से निष्कासित कर दिया गया।इसके बाद भी उनकी दृढ़ता को कोई डिगा न सका और सतत समाज के जागरण का काम वे करते रहे।हिंदुत्व का झंडा बुलंद करते करते उनकी खासी पकड़ जनजातीय समाज के बीच बन चुकी थी अब उनका जीवन उस दिशा की ओर बढ़ चला है जहाँ उन्हें सामाजिक रुप से सर्वमान्य नेतृत्व के रूप में देखा जाने लगा है

जशपुर में पत्थरगढ़ी समेत सामाजिक विध्वंसकारी शक्तियों के बढ़ते प्रभाव व बीजेपी के घटते जनाधार को देखते हुए संघ का दबाव बना और 2018 में फिर से गणेश राम भगत को भाजपा में वापस ले लिया गया।हांलाकि तत्काल वापसी का लाभ पार्टी को नहीं मिला पर इसके दूरगामी परिणाम को लेकर अब भी लोग आश्वस्त बने हुए हैं

बात करें पूर्व मंत्री के कार्यकाल की तो पिछले 30 वर्षों की राजनीती में नक्सलवाद,धर्मान्तरण पर अंकुश लगने के साथ 100 वर्षों से चल रहा जशपुर का मवेशी बाजार भी पूर्व मंत्री की पहल पर बंद हुआ है वहीँ जनजातीय समाज में जो बिखराव की स्थिति थी उसमे खासी कमी आई है

1 जनवरी उनके जन्म दिवस पर सामाजिक पहल की गई जिसमें तमाम सामाजिक व राजनैतिक चेहरों ने शिरकत कर उन्हें बधाई दी।रामप्रकाश पाण्डेय,सत्यप्रकाश तिवारी ने मेजबानी की वहीँ राज्यसभा सांसद रणविजय सिंहदेव,बीजेपी जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश सिन्हा,पूर्व विधायक राजशरण भगत,विधायक प्रत्याशी गोविन्द भगत,महामंत्री योगेश बापट,प्रकाश काले,रायमुनी भगत,रजनी प्रधान,भगवत नारायण सिंह,प्रदीप नारायण सिंह,शंकर प्रसाद गुप्ता,मुकेश शर्मा,हरिनारायण शर्मा,रम्मू शर्मा,विशु शर्मा,सूरज चौरसिया समेत अन्य आगंतुकों ने बधाई देकर उनके उज्जवल भविष्य की कामना की

हालांकि उनके निवास पर उनके जन्म दिन का यह कार्यक्रम पुर्णतः सामाजिक था पर जिस समाज के साथ उन्होंने राजनीति की दिशा में कदम बढाया था आज वही समाज फिर से उन्हें उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है .....

By योगेश @ 9424187187



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