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ब्रेकिंग पत्रवार्ता:-बीजेपी में प्रत्याशी चुनाव की लेकर दबाव की राजनीति,बीजेपी को बड़े नुकसान की सम्भावना..?




जशपुर(पत्रवार्ता) जिले के सियासतदान अब भी दबाव की राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे।विशेष सूत्रों से छनकर जो खबरें आर नहीं हैं और जनचर्चा का विषय बनी हुई है उससे यहां की राजनीति में खासा उबाल देखने को मिल रहा है।

दरअसल बीते दिनों बीजेपी प्रत्याशी के चयन को लेकर केंद्रीय संगठन द्वारा मंडल कार्यकर्त्ताओं से गुप्त मतदान कराया गया था।जिसमें कार्यकर्ताओं से दबाव पूर्वक किसी प्रत्याशी के पक्ष में वोट डलवाये जाने को लेकर कुछ कार्यकर्ता रुष्ट नजर आ रहे हैं।

आपको बता दें कि सूत्रों के हवाले से जो खबर आ रही है उसमें जशपुर सीट पर रायमुनी भगत के नाम की चर्चा से पार्टी के अंदर बगावत की सुगबुगाहट शुरु हो गई है।

दरअसल शीर्षस्थ नेता कृष्ण कुमार राय समेत संगठन की ओर से पहले नंबर पर रायमुनी भगत का नाम है वहीं पैलेस की ओर से गोविंद राम की चर्चा है।आरएसएस ने पूर्व मंत्री गणेश राम भगत का नाम केंद्रीय संगठन को भेजा है वहीं पूर्व विधायक जगेश्वर राम भगत व राजशरण भगत ने भी दावेदारी की है

वहीं पत्थलगांव में सिटिंग विधायक शिवशंकर पैंकरा से संगठन के लोग ही नाराज चल रहे हैं।एनएच का मुद्दा और पत्थलगांव के साथ छलावपूर्ण व्यबहार को लेकर लोगों में भी शिवशंकर के प्रति विरोध है।ऐसे में नए प्रत्याशी की मांग लोगों ने की है।

जिस महिला प्रत्याशी को लेकर संगठन के शीर्षस्थ नेताओं द्वारा चुनाव के दौरान मंडल कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाए जाने की चर्चा है उसे लेकर कार्यकर्त्ताओं की नाराजगी साफ दिखाई दे रही है।असंतुष्ट कार्यकर्ता बताते हैं कि जिला पंचायत का चुनाव रायमुनी हार चुकी हैं वहीं पाठ इलाके में भी लोगों का खासा विरोध है।राजपरिवार से भी कड़वाहट जग जाहिर है।

ऐसे समय में सही प्रत्याशी का चुनाव आवश्यक है जब यहां आदिवासी नगेशिया किसान समेत बीजेपी के वोट बैंक माने जाने वाले कोरवा अपने स्वतंत्र नेतृत्व की मांग को लेकर मुखर हो चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि 1980 के दशक से पूर्व यहां कॉंग्रेस का शासन हुआ करता था जिसके बाद जूदेव की आंधी चली और लगातार बीजेपी की मजबूत सीट के रुप मे जशपुर की पहचान बनी।वह समय और था जब स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव का हाथ ही जीत के लिए काफी होता था।अब मतदाता प्रत्याशी का चयन कर अपने मत का प्रयोग करता है।लिहाजा संगठन को कर्मठ प्रत्याशी की ओर ध्यान देना चाहिए।

बहरहाल टिकट वितरण से ठीक पहले पार्टी के अंदर उपज रहा आक्रोश आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए ठीक नहीं लिहाजा केंद्रीय नेतृत्व को निर्विवाद प्रत्याशी का चयन करना जशपुर जिले के लिए हितकर हो सकता है।
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