जशपुर, टीम पत्रवार्ता, 03 नवंबर 2026
जिला कांग्रेस कमेटी जशपुर के महामंत्री मनमोहन भगत ने जिला प्रशासन द्वारा जारी राज्योत्सव के निमंत्रण पत्र में छत्तीसगढ़ महतारी का छायाचित्र शामिल नहीं किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ शासन को छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा एवं छायाचित्र से चिढ़ क्यों है?
मनमोहन भगत ने कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी केवल एक छायाचित्र या प्रतिमा नहीं, बल्कि प्रदेश की संस्कृति, परंपरा, स्वाभिमान और अस्मिता का प्रतीक हैं। राज्योत्सव छत्तीसगढ़ के गौरव, पहचान और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है। ऐसे महत्वपूर्ण आयोजन के निमंत्रण पत्र से छत्तीसगढ़ महतारी का छायाचित्र गायब होना कई सवाल खड़े करता है।
उन्होंने सवाल किया कि क्या राज्योत्सव के निमंत्रण पत्र से छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र को हटाना प्रदेश की जनता की भावनाओं और अस्मिता का अपमान नहीं है? जिला प्रशासन और राज्य सरकार को इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
मनमोहन भगत ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर सरकार छत्तीसगढ़ की संस्कृति और पहचान की बात करती है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रतीकों में से एक छत्तीसगढ़ महतारी को राज्योत्सव के निमंत्रण पत्र में स्थान नहीं दिया जाता। सरकार का यह दोहरा रवैया समझ से परे है।
उन्होंने आगे कहा कि बिहार दिवस मनाने वाली इस सरकार से छत्तीसगढ़ की अस्मिता और सांस्कृतिक प्रतीकों की ऐसी उपेक्षा की उम्मीद ही की जा सकती है। छत्तीसगढ़ की जनता जानना चाहती है कि आखिर अपनी माटी, संस्कृति और महतारी के सम्मान के मामले में सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं?
मनमोहन भगत ने जिला प्रशासन एवं छत्तीसगढ़ शासन से मांग की कि राज्योत्सव के निमंत्रण पत्र में छत्तीसगढ़ महतारी का छायाचित्र शामिल नहीं किए जाने के संबंध में स्पष्टीकरण दिया जाए तथा प्रदेश की संस्कृति, परंपरा और अस्मिता से जुड़े प्रतीकों को उचित सम्मान दिया जाए।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी का सम्मान प्रदेश के प्रत्येक नागरिक का सम्मान है। प्रदेश की अस्मिता और स्वाभिमान से जुड़े प्रतीकों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।


0 Comments