... विरोध : "रात भर फूल एन्जॉय" और डांस भी करने को मिलेगा, बाकी कोई दिक्कत होगी तो हम साथ खड़े रहेंगे,बिलकुल छूट...फुल एन्जॉय मात्र 1900 में.....इस पोस्ट के बाद मचा बवाल,विरोध शुरु,"फूहड़ता" के खिलाफ लामबंद हुआ "जनजातीय समाज" सड़कों पर उतरकर दी आन्दोलन की चेतावनी...."सरना एथनिक रिसोर्ट"में नाईट कार्यक्रम का मामला

विरोध : "रात भर फूल एन्जॉय" और डांस भी करने को मिलेगा, बाकी कोई दिक्कत होगी तो हम साथ खड़े रहेंगे,बिलकुल छूट...फुल एन्जॉय मात्र 1900 में.....इस पोस्ट के बाद मचा बवाल,विरोध शुरु,"फूहड़ता" के खिलाफ लामबंद हुआ "जनजातीय समाज" सड़कों पर उतरकर दी आन्दोलन की चेतावनी...."सरना एथनिक रिसोर्ट"में नाईट कार्यक्रम का मामला

जशपुर,टीम पत्रवार्ता,31 दिसंबर 2020

जशपुर के नवनिर्मित सरना एथनिक रिसोर्ट में 31 दिसंबर की रात आयोजित होने वाले के रॉक बैंड शो के आयोजन को लेकर जनजातीय समाज लामबंद हो गया है।सोशल मिडिया में जिस प्रकार से कार्यक्रम का फूहड़ प्रचार किया जा रहा है उससे जनजातीय समाज आहत हुआ है।आपको बता दें कि यहाँ रॉक बैंड शो के नाम पर रात्रिकालीन डांस व संगीत  का आयोजन किया जा रहा है जिसके लिए 1999 रूपए प्रवेश शुल्क निर्धारित किया गया है। जिसमें युवा वर्ग खासे आकर्षित हो रहे हैं वहीँ जनजातीय समाज ने इसे संस्कृति व समाज के खिलाफ घातक बताते हुए ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने की मांग की है।

कोरोना काल में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जहाँ नए साल के जश्न के लिए प्रशासन ने गाईड लाईन जारी करते हुए भीड़ करने से मना किया है वहीँ उक्त आयोजन में कोरोना के लिए बने नियमों को दरकिनार कर कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।हालाकि आयोजकों का कहना है कि कोरोना से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गए हैं वहीँ जनजातीय समाज ने पुरे मामले की शिकायत जिला कलेक्टर से  करते हुए कड़ी कार्यवाही की मांग की है।

कलेक्टर जशपुर को सौपे गए आवेदन में बताया गया है कि भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के द्वारा देश के सुदूर इलाकों में रहने वाले विभिन्न जनजातीय समाज जिनकी पवित्र संस्कृति एवं परंपरा से देश के अन्य भाग में रहने वाले लोग अनभिज्ञ थे।उन्हें जनजातियों की पवित्र संस्कृति परंपरा एवं इतिहास से परिचित कराने के उद्देश्य से ऐसे स्थानों पर एथेनिक रिसोर्ट का निर्माण कराया गया है।जिसमें क्षेत्र विशेष की प्रमुख जनजाति परंपराओं के नाम से उक्त रिसोर्ट को प्रचारित भी किया गया है।

इसी क्रम में जशपुर जिले में निवासरत 13 प्रकार से भी अधिक जनजातीय की आस्था का प्रमुख केंद्र सरना के नाम से उक्त रिसोर्ट को सरना एथेनिक रिसोर्ट नाम दिया गया है और उक्त नाम से ही प्रथम दृष्टया उक्त स्थल के प्रति जनजातीय समाज की आस्था दृष्टिगोचर होती है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि उक्त परिसर को भी जनजातियों की प्राचीन संस्कृति एवं परंपरा के अनुरूप सजाया एवं संवारा गया है।

कलेक्टर महादेव कावरे से मामले की शिकायत करते हुए बताया गया है कि जनजातियों की संस्कृति एवं परंपरा को प्रदर्शित करने वाले रिसोर्ट में 31 दिसंबर की रात रॉक बैंड शो के नाम पर ऐसा आयोजन किया जा रहा है जिससे ना तो जनजाति समाज से कोई संबंध है और ना ही उक्त कार्यक्रम जशपुर जैसे क्षेत्र की परंपरा संस्कृति के अनुकूल है।

उक्त आयोजन के तथाकथित आयोजकों के द्वारा सोशल मीडिया में जिस प्रकार से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है वह भी उक्त स्थल की मर्यादा के विपरीत है। उक्त कार्यक्रम को करवाने के लिए प्रति टिकट 1999 में बुक किया जा रहा है। जो भी उचित नहीं है एवं आपत्तिजनक है,यह शुल्क इतना अधिक है कि हर कोई इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बन सकता। सोशल मीडिया में किए जा रहे उक्त स्क्रीनशॉट की छाया प्रति के साथ में मामले की शिकायत जिला कलेक्टर से की गई है।

समस्त जनजातीय प्रतिनिधियों ने जशपुर जिले की सामाजिक संस्कृति एवं परंपरा का संरक्षण करते हुए जिले की सांस्कृतिक परंपरा के विरुद्ध आयोजित उक्त कार्यक्रम पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उक्त आयोजन की अनुमति देने वाले व्यक्ति तथा आयोजकों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने की मांग भी जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों ने की है।वहीँ कार्यवाही न करने पर आयोजन के विरोध में बाध्य होकर जनजातीय एवं जशपुर के नागरिको ने संयुक्त रूप से सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

मामले में आयोजक मंडल के विनोद यादव ने बताया उक्त आयोजन स्वदेश नाम के एनजीओ द्वारा कराया जा रहा है जिसमे उड़ीसा, झारखण्ड और छत्तीसगढ़ी संस्कृति ,साज ,और पाराम्परिक गीत संगीत से मंजे कलाकारों का समावेश होगा। पश्चिमी संस्कृति से जुड़ा ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं है।जिले में पहली बार ऐसा आयोजन हो रहा है और कार्यक्रम का विरोध कर रहे लोगो को कार्यक्रम की सच्च्चाई जानने की जरूरत है ।बगैर सच्च्चाई समझे ऐसे कार्यक्रम का विरोध अनुचित है।

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