... "CM भूपेश बघेल" की घोषणा का असर,प्रदेश सरकार को मिलेगा "आम जनता का विश्वास",अन्य नए जिलों की मांग पर सरकार गंभीर....

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"CM भूपेश बघेल" की घोषणा का असर,प्रदेश सरकार को मिलेगा "आम जनता का विश्वास",अन्य नए जिलों की मांग पर सरकार गंभीर....









रायपुर17 अगस्त 2019 (पत्रवार्ता) छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तीन महत्वपूर्ण घोषणा का असर आम आदमी के जीवन में बेहतर बदलाव के रूप में देखने को मिलेगा।उच्च प्रशासन से लेकर आम जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो इसके लिए प्रदेश में नए तहसीलों के गठन के साथ नया जिला भी बनाया गया है।इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने ओबीसी आरक्षण बढ़ाकर प्रदेश की 50 फीसदी आबादी को राहत दी है। छत्तीसगढ़ में करीब 52 फीसदी आबादी ओबीसी वर्ग की है।

ऐसे में ओबीसी का आरक्षण 14 फीसदी बढ़ाकर सरकारी नौकरी से लेकर रोजगार के अवसरों में समाज की लाभ मिलेगा। छत्तीसगढ़ की उद्योग नीति में ओबीसी के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गस्र्वा से लेकर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगाने में भी समाज की भागीदारी बढ़ेगी।

उच्च प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो नई तहसील के गठन से सरकार आम जनता के नजदीक पहुंचेगी। बस्तर की तहसील को जब जिला बनाया गया तो वहां विकास की रफ्तार तेज हुई। नए प्रोजेक्ट की मानिटरिंग शुरू हुई और विकास योजनाओं को पंख लग गए। अब सरकार ने नई तहसील और पेंड्रा को जिला बनाने की घोषणा की है।वहीँ आगामी दिनों में अन्य नए जिलों के प्रस्तावों पर भी सरकार गंभीर बनी हुई है।

पेंड्रा आदिवासी बहुल इलाका है और यहां लंबे समय से जिला बनाने की मांग की जा रही थी। पेंड्रा सामाजिक और धार्मिक रूप से काफी मायने रखता है। इसके साथ ही जैव विविधता भी यहां है। जानकारों की मानें तो छत्तीसगढ़ के पर्यटन के नक्शे पर पेंड्रा एक पहचान के रूप में उभरेगा।
अब नए जिलों की ओर नजर 
नए जिले की घोषणा के साथ जशपुर जिले में पत्थलगांव व बगीचा के पाठ इलोके में खुडिया जिला बनाने की मांग तेज हो गई है।पूर्व विधायक युद्धवीर सिंह जूदेव ने पत्थलगांव को जिला नहीं बनाने को लेकर सरकार पर निशाना साधा और कहा कि सरकार ने एक बार फिर ठगने का काम किया है।



जशपुर का पाठ ईलाका पिछले 70 वर्षों से उपेक्षित है जहाँ राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवाओं की बहुलता है जो आज भी विकास की मुलभुत सुविधाओं से कोसों दूर हैं।बगीचा का राजस्व ईलाका काफी बड़ा है वहीँ  जशपुर जिला मुख्यालय व पत्थलगाँव यहाँ से लगभग 100 किलोमीटर दूर है।ऐसे में बगीचा को खुडिया जिला बनाकर इस पिछड़े क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। प्रदेश में और भी नए जिले बनाने की मांग चल रही है जिसपर सरकार गंभीर बनी हुई है।
इसमें जशपुर का पत्थलगाँव,जशपुर से अलग कर बगीचा के खुडिया क्षेत्र को स्वतंत्र खुडिया जिला,कोरिया जिले से चिरमिरी-मनेंद्रगढ़ को अलग करके एक नया जिला, प्रतापपुर व वाड्रफनगर को मिलाकर एक जिला, बलौदाबाजार-भाटापारा जिले से भाटापारा को अलग कर स्वतंत्र जिला, महासमुंद से सांकरा से लेकर बंजारीनाका तक (फुलझर अंचल) नया जिला, राजनांदगांव जिले से खुज्जी, मोहला, मानपुर को मिलाकर अंबागढ़ चौकी अलग जिला बनाने की मांग है।

ऐसे बढ़े छत्तीसगढ़ में नए जिले
अविभाजित मध्यप्रदेश में छत्तीसगढ़ अंचल में आठ जिले थे। वर्ष 1998 में मध्यप्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ में आठ नए जिले बनाए। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया, तब जिलों की संख्या 16 थी। वर्ष 2007 दो नए जिले नारायणपुर व बीजापुर बनाए गए थे। 15 अगस्त 2011 को नौ नए जिले सुकमा, कोंडागांव, गरियाबंद, बलौदाबाजार, बालोद, बेमेतरा, मुंगेली, सूरजपुर, बलरामपुर की घोषणा की गई थी।

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