... त्यौहार : "हरितालिका तीज " व्रत को लेकर न हों परेशान,जानिए कब रखें व्रत कब करें पूजा.....? ज्योतिष व पंडितों की क्या है राय...?

त्यौहार : "हरितालिका तीज " व्रत को लेकर न हों परेशान,जानिए कब रखें व्रत कब करें पूजा.....? ज्योतिष व पंडितों की क्या है राय...?





नई दिल्‍ली(पत्रवार्ता)हरतालिका तीज सुहागिन महिलाओं के प्रमुख व्रतों में से एक है। हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार यह व्रत पति की लंबी उम्र और मंगल कामना के लिए रखा जाता है। इस दौरान महिलाएं निर्जला व्रत रखकर माता गौरी और भगवान भोले नाथ की आराधना करती हैं।हिन्‍दू पंचांग के अनुसार यह व्रत हर साल भादो माह की शुक्‍ल पक्ष तृतीया को आता है।

इस बार जन्‍माष्‍टमी की ही तरह हरतालिका तीज की तिथि को लेकर महिलाओं में असमंजस की स्थिति बन गई है। महिलाओं को समझ नहीं आ रहा है कि आखिर किस दिन हरतालिका तीज का व्रत रखा जाना चाहिए।कुछ लोग कह रहे हैं कि व्रत 1 सितंबर को होगा, जबकि कुछ लोग 2 सितंबर को व्रत रखने की सलाह दे रहे हैं।

कब रखें हरतालिका तीज व्रत
हरतालिका तीज का व्रत भादो माह की शुक्‍ल पक्ष तृतीया याने कि गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले रखा जाता है।अब समस्‍या यह है कि इस साल पंचांग की गणना के अनुसार तृतीया तिथि का क्षय हो गया है याने कि पंचांग में द्वितीया जे सूर्योदय के कारण तृतीया तिथि का मान ही नहीं है।इस हिसाब से 1 सितंबर को जब सूर्योदय होगा तब द्वितीया तिथि होगी,जो कि 08 बजकर 27 मिनट पर खत्‍म हो जाएगी।

इसके बाद तृतीया तिथि लग जाएगी।ज्‍योतिषियों के मुताबिक तृतीया तिथि अगले दिन दो सितंबर को सूर्योदय से पहले ही सुबह 04 बजकर 57 मिनट पर समाप्‍त हो जाएगी।ऐसे में असमंजस इस बात का है कि जब तृतीया तिथि को सूर्य उदय ही नहीं हुआ तो व्रत किस आधार पर रखा जाए।

01 सितंबर को रखें हरतालिका तीज का व्रत
इस बार हरतालिका तीज की तिथि को लेकर काफी असमंजस है।व्रत किस दिन रखा जाए इस बात को लेकर पंचांग के जानकार और ज्‍योतिषियों में भी मतभेद है।कुछ जानकारों का कहना है कि हरतालिका तीज का व्रत 1 सितंबर को ही रखा जाना चाहिए क्‍योंकि तब दिन भर तृतीया रहेगी।

तर्क यह भी है कि हरतालिका तीज का व्रत हस्‍त नक्षत्र में किया जाता है, जो कि 1 सितंबर को है।इसलिए व्रत 1 सितंबर को रखा जाना चाहिए।जानकारों का कहना है अगर आप 2 सितंबर को व्रत रखते हैं तो उस दिन सूर्योदय के बाद चतुर्थी लग जाएगी।ऐसे में तृतीया तिथि का व्रत न ही पूर्ण होगा न ही मान्‍य होगा।

आचार्य रामानंद बताते हैं कि तीज का पूजन तृतीया तिथी में ही किया जाना हितकर माना गया है।ऐसे में 1 सितंबर 2019 को हस्त नक्षत्र में तीज का व्रत रखकर 02 सितंबर को ब्रम्ह मुहूर्त में तीज पूजन करना श्रेष्ठ है।


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