... लोकप्रिय कहानीकार"तुलसी देवी तिवारी"के 31वें कहानी संग्रह"आना मेरे घर" का विमोचन, जिलाधीश डॉ.संजय अलंग, पूर्व राजभाषा अध्यक्ष विनय पाठक,प्रसिद्ध साहित्यकार परदेशी राम वर्मा और नंदकिशोर तिवारी हुए कार्यक्रम में शामिल..

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लोकप्रिय कहानीकार"तुलसी देवी तिवारी"के 31वें कहानी संग्रह"आना मेरे घर" का विमोचन, जिलाधीश डॉ.संजय अलंग, पूर्व राजभाषा अध्यक्ष विनय पाठक,प्रसिद्ध साहित्यकार परदेशी राम वर्मा और नंदकिशोर तिवारी हुए कार्यक्रम में शामिल..







बिलासपुर,18 अगस्त2019(पत्रवार्ता) लोकप्रिय कहानीकार तुलसी देवी तिवारी की 31वीं पुस्तक कहानी संग्रह "आना मेरे घर" का रविवार को विमोचन हुआ। मुख्य अतिथि के तौर पर कलेक्टर बिलासपुर डाॅ. संजय अलंग व डाॅ. विनय कुमार पाठक पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। श्री नंदकिशोर तिवारी, संपादक छत्तीसगढ़ी पत्रिका लोकाक्षर, डाॅ. परदेशी राम वर्मा वरिष्ठ कथाकार भिलाई, श्री विक्रम सिंह राजभाषा अधिकारी दक्षिण मध्य पूर्व रेलवे बिलासपुर , श्री प्रभात कुमार राजभाषा अधिकारी एस.ई सी.एल.बिलासपुर, विशिष्ट आतिथि के तौर पर कार्यक्रम में शामिल रहे।

माँ वीणा पाणि के छाया चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। अतिथियों के स्वागत सत्कार के बाद तुलसी देवी तिवारी की 31वीं पुस्तक कहानी संग्रह ’आना मेरे घर' का विमोचन मंचस्थ पदाधिकारियों द्वारा किया गया। संदर्भ साहित्यिक संस्था के अध्यक्ष श्री कृष्णकुमार भट्ट’पथिक, महासचिव डाॅ राजेश कुमार ’ मानस और उपाध्यक्ष डाॅ बुधराम यादव ने लेखिका का शाॅल श्रीफल से सम्मान किया। 


अपनी लेखन प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए तुलसी तिवारी ने कहा- समाज ही मेरा साँचा है । इसमें उपस्थित समग्र विषय मेरी कहानियों की पीठिका बनते हैं और बनते रहेंगे। समाज को सही दिशा देना भी कहानियों का दायित्व है। मैंने छोटा सा प्रयास किया है। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिलासपुर जिलाधीश डॉक्टर संजय ने कहा कि तुलसी देवी तिवारी की कहानियां आज के परिवार पर केंद्रित हैं। कहानी संग्रह की सभी कहानियां सामाजिक परिवेश व   स्त्री शक्ति के बारे में कहती हैं। उन्होंने कहा कि तुलसी देवी की कहानियां में महिलाओं के बारे में विस्तृत रूप से कहा गया है। इस कहानी संग्रह  कि एक लाइन जिसमें कहा गया कि महिला का कोई धर्म नहीं होता, अपने आप पूरी कहानी का सारांश लिए हुए है। श्रीमति तिवारी को इस कहानी संग्रह के लिए बहुत-बहुत बधाई है।

डाॅ. परदेशीराम वर्मा ने कहा, तुलसी देवी तिवारी की कहानियां विभिन्न परिवेश व विभिन्न विषयों से ली गई है। कहानियों में कहीं भी एकरसता दिखाई नहीं देती । कहानीकार को कई भाषाओं का ज्ञान है कहानीकार सदेव अपनी कहानी में उपस्थित रहता है। उसी तरह तुलसी अपनी सभी कहानियों में खुद उपस्थित रही हैं।

डाॅ रेखा पालेश्वर, डाॅ अनिता सिंह ने कहा-तुलसी तिवारी गहरे अनुभव के साथ ही पैनी सामाजिक दृष्टि,युगयुगान्तर से समाज में उभरते अनेक स्वरों एवं भावों से निकलते शब्दों एवं स्वतंत्र सोच में आकार लेते चिंतन को सही दिशा देने में पूर्णतः समर्थ कथाकार हैं। डाॅ राजेश मानस, और श्री कृष्णकुमार भट्ट ’पथिक ने  ’आना मेरे घर’ में संगृहित कहानियों को समय के आर-पार की कहानियाँ कहा। डाॅ राजेशकुमार मानस ने विमोचित कृति की परिचयात्मक समीक्षा की।

श्री नंदकिशोर तिवारी ने विमोचित कृति को  सराहा है और कहा है कि तुलसी देवी तिवारी की कहानियों का अंत लोगों को सोचने पर विवश कर देता है। 

डाॅ विनय कुमार पाठक ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा, तुलसी देवी तिवारी छत्तीसगढ़ की कहानीकारों में अग्रिम पंक्ति में है, उनकी कहानियों पर वर्तमान में शोध किए जा रहे हैं और आगे भी उनकी कहानियों में सोध किए जाएंगे। उनकी कहानी "आना मेरे घर" उनकी लोकप्रिय कहानियों का संग्रह है जिस पर रिसर्च किया जाना समीचीन है।

कर्यक्रम का सफल संचालन श्री हरबंश शुक्ला ने किया।

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