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आचार संहिता का मखौल उड़ाते अधिकारी .....? बिना मापदंड के कार्यवाही को लेकर खड़े हो रहे सवाल ..?


पत्थलगांव (पत्रवार्ता) जशपुर जिले में इन दिनों आचार संहिता को लेकर लोग आपातकाल को याद कर रहे हैं वो भी तब जब लोकतंत्र का पर्व बिलकुल करीब है....ऐसे में स्वतंत्र व् निष्पक्ष चुनाव को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं ....सवाल उठाना भी लाजिमी है जब  जिम्मेदार अधिकारी भी गैर जिम्मेदारी वाली बात कहें ?

जी हाँ सार्वजनिक माता के जगराते से शुरू हुई हलचल अब जन चर्चा का विषय बनती नजर आ रही है ....रात्रि 10 बजे के बाद धार्मिक भजन जगराते में भी आचार संहिता की कैंची चलने से रात्रिकालीन ध्वनि पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है जिससे जशपुर,बगीचा,तपकरा,कुनकुरी समेत कई स्थानों पर होने वाले कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं..... 

जिले में आचार संहिता का मजाक तब सामने आया जब एक जिम्मेदार अधिकारी ने पत्थलगाँव चौक पर लगे इंदिरा गांधी के मूर्ति को ढकने का मौखिक आदेश दे दिया जिसपर अमल करते हुए अधीनस्थ कर्मचारी ने एसडीएम पत्थलगाँव के आदेश का पालन करते हुए इंदिरा चौक पर लगे इंदिरा गांधी के मूर्ति को सफ़ेद कपड़ों से ढकवा दिया .....

इस घटना के बाद कांग्रेसियों ने जशपुर महाराजा चौक पर लगे राजा विजयभूषण  सिंहदेव की मूर्ति को न ढके जाने पर सवाल उठाया तो आनन् फानन में स्थानीय प्रसाशन द्वारा पत्थलगाँव में ढके गए इंदिरा के मूर्ति से कपड़ा हटवा दिया गया ....

सबसे बड़ा सवाल कि क्या निर्वाचन आयोग के अधिकारीयों के पास आचार संहिता का कोई मापदंड नहीं इस प्रकार जग हंसाईं करने वाले कृत्य से आचार संहिता का मखौल उडाना कहाँ तक उचित है ....

जब उक्त मामलें में पत्रवार्ता  ने पत्थलगाँव एसडीएम से बात की तो उनका जवाब बिलकुल गैर जिम्मेदाराना था जिसे जानकार आप भी दंग रह जाएँगे .....हमारा सवाल था क्या आचार संहिता को लेकर कोई मापदंड नहीं जो कभी भी मूर्ति को ढक दिया जाता है और फिर हटा दिया जाता है .....

जिसपर एसडीएम साहब ने कहा 
"क्या फर्क पड़ता है"
 मापदंड में नहीं आता है 
इसलिए हटा दिए 

अब आप ही बताएं जिस अधिकारी पर पुरे विधानसभा की जिम्मेदारी है वे यदि आचार संहिता को लेकर ऐसा गैर जिम्मेदाराना बयान देते हैं तो जिला निर्वाचन अधिकारी समेत राज्य निर्वाचन आयोग को ऐसे मामलों को संज्ञान में लेते हुए कार्यवाही करनी चाहिए ......

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