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शाह की सियासती चौसर पर फ़ीट भी और हिट भी "जशपुरिया राजनीति"।





जशपुर,योगेश थवाईत (पत्रवार्ता) भले ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अम्बिकापुर में बूथ कार्यकर्ताओं से एकतरफा संवाद किया पर जो बातें छनकर सामने आ रही है उसमे प्रदेश के 90 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया को मूर्त रूप दिए जाने की बात है जिसमे पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा प्रत्याशी चयन को लेकर क्रिया प्रतिक्रिया को भांपने का प्रयास किया गया है

सूत्रों के हवाले से खबर है कि जशपुर में भाजपा की संगठनात्मक शक्ति से शाह ना सिर्फ खुश हुए बल्कि मेरा बुथ सबसे मजबूत की तैयारी को देख सभी पदाधिकारियों और विधायकों को प्रोत्साहित भी किया..ठीक इसके विपरीत जशपुर की तीनों विधानसभा सीटों पर बीजेपी प्रत्याशी की चयन प्रक्रिया अब कार्यकर्ताओं के गुप्त मतदान से किये जाने की तयारी है .....जो लगभग आज तय हो जाएगी 

आपको बता दें की जशपुर की तीनों विधानसभा सीट पर कृष्ण कुमार राय व रणविजय सिंह जूदेव की सहमती से ही कोई भी टिकट फाइनल होनी है जिसकी जिम्मेदारी शाह ने इनको सौपी है ...बात करें जशपुर सीट को तो यहाँ से रायमुनी भगत,गोविन्द राम के साथ जागेश्वर राम भगत नाम सबसे आगे है इसमें राय फैक्टर को देखें तो मिलनसार और हंसमुख मिजाज वाली रायमुनी भगत पहले नंबर पर हैं वहीँ सबके चहेते और विनम्र भाव रखने वाले गोविन्द राम को विजय विहार समेत आरएसएस का भी सपोर्ट है वहीँ जागेश्वर राम भगत पूर्व विधायक रह चुके हैं और लगातार क्षेत्र में सक्रीय बने हुए हैं साथ ही उनकी जमीनी पकड़ बहुत अच्छी है,कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद उनकी विशेषता रही है और संघ समेत वनवासी कल्याण आश्रम की पहली पसंद भी हैं ।

नेगेटिव - इसमें समझना दिलचस्प होगा कि जशपुर सीट पर किस प्रत्याशी से क्या असर पड़ सकता है।पहले नंबर पर रायमुनी का नकारात्मक पक्ष यह है कि रायमुनी जिला पंचायत का चुनाव हारी हुई हैं और खास बात यह कि जिस पाठ इलाके से जशपुर सीट को को लीड मिलती है वहीँ से ये हारी हुई प्रत्याशी हैं ऐसे में पाठ क्षेत्र में स्पष्ट जनाधार के संकेत नहीं है साथ ही विजय विहार से अनबन छिपा हुआ भी नहीं है।वहीँ वरिष्ठ नेता  कृष्णा राय के पैनल से रायमुनी के नाम की चर्चा जोरों पर है और पाठ इलाके में राय जी से नगेशिया और कोरवा समाज बिफरे हुए हैं ऐसे में कार्यकर्ताओं को सम्हाल पाना संगठन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकता है .......

गोविन्द राम के घुर विरोधी माने जाने वाले कृपा शंकर भगत अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं ऐसे में प्लस पॉइंट यही है की विजय विहार के साथ गोविन्द राम को आराम निवास और संघ का भी सपोर्ट है ...वहीँ नए चेहरे से बीजेपी को नुकसान की सम्भावना कम होगी 

वहीँ जगेश्वर राम भगत को लेकर कहीं कोई विवाद नहीं सूत्रों के हवाले से खबर है कि दोनों राजमहल का सपोर्ट और संघ समेत वनवासी कल्याण आश्रम का भी सपोर्ट इन्हें हैं वहीँ क्षेत्र में भी कोई विरोध नहीं,बगीचा के पाठ इलाके में जगेश्वर लोगों की पहली पसंद हैं .....फिलहाल पाठ इलाके में पार्टी के प्रति अहीर,यादव,कोरवा,नगेशिया समाज में खासा विरोध है लिहाजा संतुलन के लिए निर्विवादित चेहरा लाना बीजेपी के लिए अच्छा होगा ....... 

अब बात करें कुनकुरी विधानसभा की तो यहाँ यदि संगठन चेहरा न बदले तो रोहित साय से बेहतर विकल्प कुछ नहीं ....पर गोमती साय के नाम की चर्चा भी जोरों पर है .......वहीँ पूर्व विधायक भरत साय पहले नंबर पर संगठन की पसंद बने हुए हैं आपको बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में कुनकुरी को नया प्रत्याशी दिया गया था जिसके बाद भरत साय संगठन का आदेश मानते हुए शांत बैठ गए थे और अब उनके विधायक टिकट का भी रास्ता खुला हुआ है। एक ओर जहाँ तपकरा इलाके के लोगों की पहली पसंद हैं भरत साय वहीँ कँवर बाहुल्य जनजातीय समीकरण को साधने वाले पुख्ता उम्मीदवार ये साबित हो सकते हैं।

नेगेटिव - भरत साय कुछ मुद्दों पर भले ही विवादित रहे हों पर संगठन में उनकी छवि अच्छी है वहीँ तपकरा फरसाबहार के जनजातीय समेत आम लोगों की भी पहली पसंद भरत साय हैं ।कुनकुरी सीट पर संघ के कर्मठ कार्यकर्ता सुरेन्द्र बेसरा भी दौड़ में हैं जिनको संघ का समर्थन प्राप्त है और वे कुनकुरी में अपनी जमीन तैयार करना शुरू भी कर चुके हैं यदि इन्हें पार्टी टिकट देती है तो लोरो दुलदुला समेत कुनकुरी इलाके का इन्हें खासा सपोर्ट मिल सकता है पर जनजातीय वोट साधने की दिशा में पीछे रह सकते हैं ।एक नाम जनपद सदस्य कमलेश्वर नायक का भी है जो पूर्व में सरपंच भी रह चुके हैं जिसमे संगठन का खासा रुझान नहीं दिख रहा।


पत्थलगांव विधानसभा सीट पर बीजेपी फिर से शिवशंकर साय को चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में हैं जिसे लेकर स्थानीय संगठन में काफी विरोध है वहीँ नए चेहरे के रूप में सालिक साय का नाम सामने है फिलहाल पत्थलगांव सीट पर यदि विपक्ष से रामपुकार आते हैं तो यह सीट शिवशंकर के भरोसे जीत पाना बीजेपी के लिए चुनौती भरा होगा ।ऐसे में नंदकुमार साय निर्विवाद जीतने वाले प्रत्याशी हो सकते हैं और सुगबुगाहट है कि उन्हें रामपुकार के विरुद्ध पार्टी इन्हें पत्थलगाँव सीट से उतार सकती है ......

फिलहाल सब कुछ क्लियर होने में कुछ समय और बचा है जिसके बाद तमाम अटकलों पर विराम लग सकता है ......बने रहे पत्रवार्ता के साथ ......
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