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रणनीति:- सौदान के पैमाने में "बागी" और "दागी" भी....? एकमात्र हाशिया "जीत'


रायपुर (पत्रवार्ता) प्रदेश में भाजपा पिछले 15 वर्षों  से सत्ता में है लिहाजा कहीं न कहीं उसे एंटी इंकम्बेंसी का भय सता रहा है। वहीँ पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने 65 प्लस सीटें जीतने का जो लक्ष्य दे रखा है उसका दबाव भी संगठन के नेताओं पर स्पष्ट परिलक्षित हो रहा है।

विधानसभा सीटों पर टिकट तय करने का जिम्मा संगठन पर है। केंद्र में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद देशभर में भाजपा का विजय रथ दौड़ रहा है,अब उसमें किसी तरह का अवरोध अमित शाह नहीं चाहते हैं।

यही वजह है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ में कार्यकर्ताओं को टटोलने और उन्हें रिचार्ज करने की जिम्मेदारी अपने विश्वस्त सह संगठन मंत्री सौदान सिंह को सौंप रखी है। भाजपा में उच्च पद पद पर पदस्थ एक नेता के अनुसार

"सौदान सिंह के सामने जीत ही एकमात्र पैमाना 
होता है।वे इस मामले में पार्टी के हित 
में बड़ी बेरहमी से निर्णय लेते हैं।
अब जबकि सौदान यहां विजय की 
पटकथा तैयार कर रहे हैं तो 
सत्ता में बैठे नेताओं की 
चल नहीं पा रही है।"

प्रदेश में कई नेता अपने बागी तेवर के वजह से पार्टी से निष्काषित कर दिए गए हैं वहीं कई जमीनी नेता भी पार्टी से दुरी बनाए हुए हैं।इस चुनाव में केन्द्रीय संगठन कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है लिहाजा जमीन से जुड़े हुए बूथ स्तर के कार्यकर्ता से सीधा संवाद स्थापित कर रही है।

इसका प्रत्यक्ष उदाहरण देखने को मिला जशपुर में जहाँ बीजेपी से निष्कासित पूर्व मन्त्री गणेश राम भगत से जब सौदान सिंह ने अकेले में चर्चा की और कई अहम मुद्दों पर बात की   

साथ ही पार्टी से निष्कासित व किनारा किए हुए जमीनी नेताओं को जीत की सुनिश्चितता के साथ फिर से चुनाव मैदान में उतारने की कवायद की जा रही है।हांलाकि इसे लेकर कई स्थानों पर पार्टी कार्यकर्ताओं में रोष भी व्याप्त है पर जिन कन्धों पर मिशन 65 प्लस का जिम्मा दिया गया है उनके निर्णय के सामने बस जीत का लक्ष्य निर्धारित है जो पार्टी हित में है वह हर हाल में होकर रहेगा ।  

सर्वे के खेल में टिकट का पेंच फंसा
भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि पार्टी संगठन सितंबर के आखिरी सप्ताह में कराए गए सर्वे की रिपोर्ट की मिलान संगठन की ओर से चार बार कराए गए सर्वे से कर रहा है। यह भी पता चला है कि कई सीटों पर विजयी होने लायक प्रत्याशियों का नाम नए सर्वे में बदल गया है। इसके अलावा माहौल ख़राब करने के लिए कुछ जबरदस्ती के नेता बने लोगों ने खुद को प्रत्याशी बताने वाली अनेक फर्जी सूचियां वाट्सअप में वायरल करवा दी।इससे भी असहज स्थितियां उत्पन्न हुई।

कई नेता ऐसे में सर्वे के बहाने अपना खेल बनाने की तैयारी में लगे हैं। इस रस्साकसी से टिकटों का मामला अटक गया है। माना जा रहा है कि भाजपा में नामांकन दाखिले के अंतिम वक्त में ही लिस्ट आ पाएगी।

सर्वे के आधार पर भाजपा की टिकट घोषित करने की तैयारी हो चुकी है,सूची बन चुकी है बस घोषणा बाकी है।




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