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राज्य लोक सेवा आयोग को झटका,सहायक प्राध्यापकों की जारी संशोधित सूची पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक..


बिलासपुर(पत्रवार्ता.कॉम) सहायक प्राध्यापकों द्वारा दायर एक मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य लोक सेवा आयोग को झटका दिया है। आयोग द्वारा सहायक प्राध्यापकों की जारी संशोधित सूची पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। 

राज्य शासन के निर्देश पर वर्ष 2014 में राज्य लोक सेवा आयोग ने सहायक प्राध्यापकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें नेट स्लेट के अलावा पीएचडी धारकों ने आवेदन जमा किया था। परीक्षा के बाद आयोग ने मेरिट सूची जारी की थी। पीएचडी धारकों को नियुक्ति आदेश जारी कर दिया था। इसी बीच नेट स्लेट धारकों ने आपत्ति दर्ज करा दी। आयोग ने यूजीसी एक्ट में संशोधन को आधार बनाते हुए संशोधित सूची जारी कर दी। इस सूची में 1 वर्ष से प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों में नौकरी कर रहे 50 से अधिक सहायक प्राध्यापकों को सूची से बाहर करते हुए नौकरी से पृथक करने का आदेश जारी कर दिया।

आयोग के निर्णय के खिलाफ सहायक प्राध्यापकों ने अपने वकील के माध्यम से याचिका दायर की थी। याचिका में कहा था कि पीएससी ने वर्ष 2014 में विज्ञापन जारी किया था। विज्ञापन में दिए गए शैक्षणिक अहर्ता के आधार पर हम लोग इसे पूरा कर रहे थे। पीएससी ने इसी आधार पर मेरिट सूची जारी की और मेरिट के आधार पर प्रदेश के अलग-अलग कॉलेजों में नियुक्ति आदेश जारी किया था। बीते 1 वर्ष से हम सभी नौकरी कर रहे हैं। संशोधित सूची में आयोग ने यूजीसी एक्ट में संशोधन का हवाला देते हुए नौकरी से बाहर कर दिया है। 

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य लोक सेवा आयोग को झटका दिया है। आयोग द्वारा सहायक प्राध्यापकों की जारी संशोधित सूची पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। 


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