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ब्रेकिंग पत्रवार्ता:- मानव तस्करी में लिप्त दो महिला दलालों को 10-10 साल के सश्रम कारावास के साथ 25 हजार जुर्माने की सजा,जिला एवं सत्र न्यायाधीश का फैसला

By Yogesh Thawait

जशपुर(पत्रवार्ता.कॉम) जिले में पैर पसार चुके मानव तस्करी के मामले दिनों दिन बढ़ते ही जा रहे हैं ऐसे में जिला एवं सत्र न्यायालय के फैसले ने एक बार फिर से मानव तस्करी में संलिप्त दलालों के हौसले को पस्त किया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश श्रीवास्तव की अदालत ने एक नाबालिक को बिना उसके माता-पिता के सहमति के बहला फुसला कर ले जाने के आरोप में दो महिला आरोपियो को दस-दस साल की सजा व पच्चीस हजार रूपए की अर्थदंड की सजा सुनाई है। 

मामला है 03 अक्टूबर 2015 का ग्राम डीपाटोली जशुपर थाना में एक नाबालिक लड़की को आरोपी जमयंती देवी निवासी डूमरी जिला गुमला एवं भागलपुर की आरोपी प्रेमा देवी ने एक राय होकर छठवी कक्षा की लड़की को बहला फुसलाकर ले गई थी।

शासकीय अधिवक्ता श्याम सहाय ने बताया कि सहेली के साथ पीड़िता की मां उसे अक्सर डांटते रहने के कारण घर से भाग जाती थी। एक दिन वह अपने सहेली के घर घूमने आई थी तो वहां पर बातचीत करते समय बताया कि वह घर से बाहर काम करने जाना चाहती है। बात को उसकी सहेली की मां अभियुक्ता प्रेमा बाई ने सुनी और बोली की तुम मेरे पास आ जाना मैं डुमरी पहुंचा दूंगी और वहां से तुमको दिल्ली काम करने पहुंचा देगे।

पीड़िता उसी दिन अपने घर लौटी और भागलपुर आ गई। जहां वह तीन चार दिन रूकी वहां से आरोपी प्रेमा बाई उसे डुमरी पहुंचा दी। डुमरी से आरोपी जमयंती के यहां दो माह रही और नवंबर से वहां फरार अभियुक्त रमेश लोहरा ग्राम डुमरी से दिल्ली ले जाकर गायत्री प्लेसमेंट एजेंसी के आंफिस ले गया वहां एक दिन रूकने के बाद अभियुक्त ऋतु भंजन के साथ मिलकर उस नाबालिक को घर में काम करने के लिए अशोक विहार के एक घर में बेच दिया जहां वह एक दिन काम की और आंफिस आकर 9 दिन रही। जहां से उसे पुन: फरार ऋतु भंजन के द्वारा एक माह काम करने के लिए बेच दिया गया।

इसके बाद साउथ विहार में नीरू नामक व्यक्ति के घर में काम करने के लिए बेच दिया जहां वह छ: माह काम की। काम के बदले में नाबालिक को एक पैसा भी नही दिया गया। घटना की सूचना पर जशपुर पुलिस ने धारा 363, 370 (4)/ 34, 374/34 का मामला दर्ज कर सहायक उपनिरीक्षक बैजंती किंडो ने जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। न्यायालय ने उभय पक्षो को सुनते हुए मामला को गंभीर माना और पर्याप्त साक्ष्य होने पर दोनो आरोपी जैमयंती देवी व प्रेमा देवी को दोषी पाया ।
न्यायालय ने कहा सजा माफ़ी के लायक नहीं
विद्वान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश श्रीवास्तव ने दोनो पक्षो को सुनते हुए निर्णय देते हुए कहा कि अपराध की प्रकृत्ति को ध्यान में रखकर तथा इस तथ्य को ध्यान में रखकर कि नाबालिक और उसके माता-पिता ने अभियुक्तगण के कृत्य से कितनी यातनाओं को झेला होगा।

 इसलिए आरोपी जमयंती और प्रेमा बाई को 
धारा 363, 370 (4)/ 34, 374/34  के आरोप 
में दंडित किया जाता है। 363 में पांच साल, 
370 (4)/ 34  में 10 साल का कठोर कारावास
374/34  में 1 वर्ष का कठोर कारावास व 
पच्चीस हजार की जुर्माना से दंडित किया।

जुर्माना नही पटाने पर छ: माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भोगना होगा। पटाई गई जुर्माने में से 20 हजार रूपए पीड़िता के माता- पिता को देने के निर्देश दिए है।शासन की ओर से पैरवी कर रहे लोक अभियोजक श्याम सहाय ने कहा कि इस फैसले से मानव तस्करी को अंजाम देने वाले लोगों के लिए एक सबक होगा। कोई भी इस फैसले के बाद ऐसा कृत्य करने से हिचकिचाएगा ।

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