... त्वरित टिप्पणी:- अस्थि कलश विसर्जन के बाद कितने लोगों ने कराया मुंडन...?

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त्वरित टिप्पणी:- अस्थि कलश विसर्जन के बाद कितने लोगों ने कराया मुंडन...?



योगेश थवाईत(पत्रवार्ता.कॉम) भारतीय परंपरा व संस्कृति के अनुसार अंतिम संस्कार के बाद विधिवत अस्थि कलश के विसर्जन के लिए तर्पण,पिंडदान व मुंडन का नियम है।

पूरे देश में अटल को श्रद्धांजलि देने के लिए भले ही अस्थि कलश के शक्ति का संचार समूचे देश में किया गया।जिसे विपक्ष ने राजनीति से प्रेरित तक बता दिया।वाकई ऐसे विसर्जन से न तो उस भारतीय परंपरा की पूर्ति हुई न उस दिव्यात्मा को सच्ची श्रद्धांजलि मिल पाई।

फिलहाल ऐसे दिव्यात्मा व दिव्य पुरुष के लिए ऐसा सोचना कतई ठीक नहीं बावजूद इसके उनकी अस्थियों को गांव गांव तक इसी सोच के साथ पंहुचाया गया कि हर कोई उनकी अंतिम अनुभूति प्राप्त कर सके।

जिस प्रकार अटल की अस्थि कलश के नाम पर जिम्मेदार मंत्री समेत अन्य लोगों ने इसे हंसी ठिठोली का मुद्दा समझ लिया वहीं इस कार्ययोजना को मूर्त रुप देने वाले नेतृत्व ने अटल के सम्मान से मिलने वाली सहानुभूति पर बिलकुल ध्यान नहीं दिया।

दरअसल जब अस्थि कलश प्रवाह का कार्यक्रम तय किया गया तो यह भी तय करना बेहद जरूरी था कि उसका प्रोटोकॉल क्या होगा..? कौन अस्थि प्रवाहित करेगा..? कौन पिंडदान करेगा..? कौन तर्पण करेगा और कौन मुंडन कराएगा..? यहां तो मुंडन ही नहीं कराया गया,नियमतः जिसने अस्थियां प्रवाहित की उसे मुंडन, श्राद्ध व तर्पण अवश्य करना चाहिए पर ऐसा हुआ नहीं।

देश को सबल व सुदृढ़ नेतृत्व देने वाले महापुरुष को ससम्मान विदा किया गया जिसके लिए देश का हर व्यक्ति कृत संकल्पित था उतनी ही जिम्मेदारी उनके संगठन की भी थी जिसका निर्वहन भली भांति हो सके इसके लिए सरकार ने भी हर संभव प्रयास किया।बावजूद इसके प्रयास में कहीं न कहीं कमी दिखी जिससे संवेदना को मूर्त रुप नहीं मिल सका।

जिस वेग के साथ अटल ने देश को गति प्रदान की उसके बदले उनके नाम पर न तो कोई ऐसी स्थायी योजना लागू की गई न तो अटल के सिद्धान्तों को जीवंत बनाने का कोई प्रयास किया गया।

बहरहाल अस्थि विसर्जन को वह सम्मान दिया जाना चाहिए था जिसका सीधा संबंध गांव के उस व्यक्ति से होता जिसने अटल की अस्थि को अपनी सच्ची श्रद्धांजलि दी है।अब मुंडन हो या न हो इतना तो तय है कि अस्थि विसर्जन के नाम पर राजनीति का निम्न स्तर सबके सामने आ गया जिसपर चिंतन की आवश्यकता है।

जरुरत है अटल के विचारों से क्रांतिकारी परिवर्तन की जिससे लोगों के विचारों  में व्यापक परिवर्तन आये और अटल के समग्र ग्राम विकास की परिकल्पना के साथ अखंड भारत का सपना साकार हो जाए।


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