... BIG BREAKING:-95 लाख से अधिक की शासकीय राशि के गबन का मामला,13 साल का सश्रम कारावास व 80 हजार का अर्थदण्ड।

BIG BREAKING:-95 लाख से अधिक की शासकीय राशि के गबन का मामला,13 साल का सश्रम कारावास व 80 हजार का अर्थदण्ड।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिल पांडेय ने सुनाई सजा

 

जशपुर (पत्रवार्ता.कॉम) सरकारी कर्मचारी रहते हुए सरकारी 95 लाख से अधिक राशि अपने व्यक्तिगत खाते में शासकीय राशि जमा कर गबन करने को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने गंभीर मानते हुए अलग अलग धाराओ  में दोषी सहायक ग्रेड 1 को  13 साल सश्रम कारावास के साथ 80 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है 

मामला है  महिला बाल विभाग बगीचा 
में पदस्थ सहायक ग्रेड 1 के द्वारा 
शासकीय राशि अपने खाते में 95 लाख 88
 हजार 039 रूपये की राशि को अपने निजी खाते
 में जमा कर लेने का जिसकी सुनवाई करते हुए मुख्य 
न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिल पांडेय की अदालत
 ने दोषी पाए जाने पर आरोपी 
पुरूषोत्तम प्रसाद तिवारी को भा.द.वि. के 
धारा 409 के तहत 7 साल का 
सश्रम कारावास एवं 50 हजार रूपये  एवं धारा 467 
के तहत 5 साल का सश्रम कारावास एवं 20 हजार 
रूपये एवं धारा 471 के तहत 1 साल का सश्रम 
कारावास एवं 10 हजार रूपये का जुर्माना इस प्रकार 
कुल 80 हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है ।

जानकारी के मुताबिक श्रीमती अर्चनाकिरण टोप्पो के द्वारा जशपुर कलेक्टर के समक्ष यह शिकायत किये जाने पर कि आईसीडीएस बगीचा में सहायक ग्रेड 01 के पद पर पदस्थ पुरूषोत्तम प्रसाद तिवारी द्वारा अपने निजी खाते में शासकीय राशि को जमा किया गया है , शिकायत प्राप्त होने पर कलेक्टर जशपुर द्वारा जॉच हेतु एक समिति गठित की गई, जिसमें जिला कोषालय अधिकारी जशपुर एडमोन मिंज, उप कोषालय अधिकारी बगीचा अनिल सिन्हा, सिन्हा, कनिष्ठ लेखा अधिकारी कार्यालय सहायक आयुक्त जशपुर आर.के. ध्रुव एवं टी.के. जाटवर जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास जशपुर को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी के रूप मे शामिल किया गया । 

उक्त समिति में जॉच पश्चात कलेक्टर जशपुर को जॉच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया , जिसमें जिला कोषालय अधिकारी जशपुर एडमोन मिंज ने यह प्रतिवेदन किया गया कि खाता क्र. 11312951441 में संदेही राशियॉ बार-बार ग्रेड 01 आईसीडीएस बगीचा का है । 

जॉच के दौरान उपलब्ध हुए अभिलेखों से 2014-15 तक की अवधि का परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास परियोजना बगीचा के कार्यालय से प्राप्त जमा सूची, राशियों, पर्ची या जमा चेक और जमा स्टेटमेंट के अभिलेखों का परीक्षण करने से यह ज्ञात हुआ कि कार्यालय के शासकीय देयकों में लगे प्रमाणकों में बैंक को भुगतान हेतु दी गई सूची में किये गये राशि उल्लेखित कर आहरण किया गया है, बैंक को भुगतान की गई सूची में समान नाम व नाम अनुसार समान का राशि का उल्लेख नही किया गया है

बल्कि बैंक को दी गई सूची में शासकीय देयकों में लगी सूची के कुछ नाम हटाकर अन्य नाम जोड़े गए है और मूल परियोजना अधिकारी के द्वारा शासकीय देयकों व उसके प्रमाणकों बी.टी.आर. बिल रजिस्टर एवं कैसबुक में हस्ताक्षर किया गया है किन्तु बैंक को दिये गए सूची में उक्त अधिकारी का हस्ताक्षर नहीं है , बल्कि इन सूचियों में किसी अन्य व्यक्ति पुरूषोत्तम प्रसाद तिवारी का हस्ताक्षर है ।

 इस तरह जांच में पीपी तिवारी द्वारा उपरोक्त राशि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ,सहायकाओं ,मिनीकार्यकर्ताओं एवं कार्यालय स्टाफ को 95 लाख 88 हजार 039 रूपये भुगतान करना था लेकिन उसे आरोपी के द्वारा अपने खाते मे जमा कर गवन कर लिया था । जांच के बाद बगीचा थाने में इसका रिपोर्ट दर्ज कराया गया जिस पर पुलिस ने अभियुक्त आरोपी पुरूषोत्तम तिवारी के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता 409, 467, 468, एवं 471 के तहत एफ. आई .आर. दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया था ।


विद्वान न्यायधीश अनिल पांडेय ने उभय पक्ष के अधिवक्ताओं को सुनने के बाद दोषी पाये जाने पर दण्ड के प्रश्न पर सुनते हुए अभियोजन पक्ष की ओर से कठोरतम दण्ड दिये जाने का निवेदन किया जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता ने उदारतापूर्वक विचार कर अभिरक्षा में बितायी गई दण्ड की अवधि से दण्डित किये जाने का निवेदन किया लेकिन विद्वान न्यायधीश ने प्रकरण में विद्यमान परिस्थितयों में जिसमें आरोपी पुरूषोत्तम प्रसाद तिवारी ने लोक सेवक होने के बावजूद कूटरचनाकर कूटरचित दस्तावेज को असल के रूप में किये जाने एवं 95,88,039 रूपये के शासकीय राशि को गवन कर हानि पहुचाया जाना प्रमाणित पाया 

अदालत ने इसे गंभीर कृत्य और शासन को हानि पहुचाये जाने पर दोषी पाते हुए भारतीय दण्ड विधान के धारा 409 के अर्न्तगत तहत कर 7 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 50 हजार रूपये अर्थदण्ड धारा 467 के तहत 5 वर्ष सश्रम एवं 20 हजार का जुर्माना धारा 471 के तहत भारतीय दण्ड संहिता के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास व 10 हजार रूपये का जुर्माना इस तरह से कुल 80 हजार रूपये का अर्थदण्ड से दण्डित किया दण्ड की राशि नही पटाने पर चार चार माह का सश्रम कारावास की सजा पृथक से भुगतनी होगी ।

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