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मर जाऊंगी पर माफ़ी नहीं...?

निलंबित शिक्षक आलोक स्वर्णकार 

जशपुर (पत्रवार्ता.कॉम) मेरी गलती नहीं फिर मैं माफ़ी क्यूँ मांगू..जब गलती करने वाला ही पीड़ित पक्ष को माफ़ी मांगने को कहे तो यह सरासर ज्यादती है..ऐसा ही कुछ हुआ उस छात्रा के साथ जिसे शिक्षक द्वारा किये गए दुर्व्यवहार के लिए माफ़ी मांगने का दबाव बनाया गया...न जाने जिले के स्कूलों में कई शिक्षक अपनी चरित्रहीनता से जिले को क्यू बदनाम करने में लगे हैं .इस बार मामला है कुनकुरी के व्याख्याता पंचायत अलोक स्वर्णकार का.


व्याख्याता पंचायत आलोक स्वर्णकार निलंबित
बीते दिनों बगीचा में दो शिक्षको द्वारा छात्रा के साथ छेड़छाड़ मामले में अभी गिरफ्तारी भी नही हुई की फिर से कुनकुरी विकासखंड के कन्या स्कुल में छात्रा के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है अंतर बस इतना है की जिला प्रशासन को मामले की भनक लगते ही जिला प्रशासन द्वारा खंड शिक्षा कार्यालय कुनकुरी को जांच का जिम्मा दे दिया गया और महिला अधिकारी से मामले की जांच कराई गई जिसमे व्याख्याता पंचायत आलोक स्वर्णकार द्वारा छात्रा के साथ अश्लील हरकत किये जाने का मामला सामने आया .जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उक्त जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौपी जिसपर कार्यवाही करते हुए मुख्य कार्य पालन अधिकारी,जिला पंचायत जशपुर ने छात्रा के साथ हुए दुर्व्यवहार की जांच को सही पाते हुए कन्या शाला कुनकुरी में पदस्थ व्याख्याता पंचायत आलोक स्वर्णकार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है 

क्या था मामला 
शिक्षक द्वारा रविवार को स्पेशल क्लास के बहाने छात्रा को बुलाया गया था जहाँ उसके द्वारा छात्रा के साथ अश्लील हरकत की गयी जिसकी शिकायत छात्रा ने स्कुल के प्रिंसिपल से की जिसके बाद प्रिंसिपल ने उससे कहा किसी को मत बताना. वही मामले को लेकर छात्रा काफी तनाव में थी .उसे बार बार कई माध्यमों से दबाव दिया जा रहा था ऐसे में छात्रा के घरवालों से भी उसे सहयोग नहीं मिल पा रहा था ...मामले की सुचना जिला प्रशासन को मिलते ही विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई .महिला अधिकारी द्वारा किये गए जांच में शिक्षक की करतूत सामने आ गई जिसके बाद कार्यवाही की गई 

नहीं हुई पुलिसिया कार्यवाही 
लगातार छात्राओं के साथ हो रहे दैहिक शोषण व अश्लील हरकत के मामले में कई कानून बनाये गए हैं जिनका खौफ इन शिक्षको को नहीं ..ले देकर विभागीय कार्यवाही से निपटकर फिर से उसी ढर्रे में शिक्षक चलने लगते हैं अब तक मामले की शिकायत ठाणे में नहीं की गई है ,,''यदि छात्रा के साथ गलत हुआ है तो संस्था प्रमुख की नैतिक जिम्मेदारी बनती है की मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों समेत सम्बंधित थाने में दें .यहाँ तो जाँच के बाद कार्यवाही में शिक्षक की गलती पाकर उसे निलंबित भी कर दिया गया पर प्रशासन ने थाने में उक्त शिक्षक के विरुद्ध एफ़ाइआईआर करना भी मुनासिब नहीं समझा निश्चित ही ऐसे परश्रय से ही शिक्षकों के हौसले बुलंद हो जाते हैं ''

चरित्र निर्माण की हो पहल 
छात्राओं के साथ निरंतर हो रहे घटनाओं से न केवल शिक्षा जगत शर्मशार हो रहा है बल्कि गुरु शिष्य की परंपरा भी धूमिल हो रही है ..जिला प्रशासन द्वारा ऐसी पहल की जनि चाहिए जिससे चरित्र निर्माण के कार्य किये जा सके ताकि ऐसी घटनाओ की पुनरावृत्ति न हो ..फिलहाल जरुरी है उस छात्रा को न्याय दिलाना ताकि निलंबित शिक्षक उसे व उसके परिवार वालों को परेशान न करे ...


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