जशपुर, टीम पत्रवार्ता,28 दिसंबर 2025
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरसाबहार परिसर से फरसाबहार के साथ-साथ कुनकुरी एवं मनोरा विकासखंडों में स्थापित किए गए पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRC) का शुभारंभ किया। इन सभी पुनर्वास केंद्रों को 10-10 बिस्तरों की सुविधा के साथ प्रारंभ किया गया है। इसके साथ ही जिले में अब पोषण पुनर्वास केंद्रों की संख्या 6 हो गई है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पुनर्वास केंद्रों में भर्ती माता से उनके बच्चों के बारे में पूछा और पोषण कीट के साथ खिलौने भी दिए।
मुख्यमंत्री ने सीएचसी फरसाबहार में बन रहे सत्य साईं मातृत्व शिशु चिकित्सालय का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विशेष प्रयासों से सीएचसी में निर्माणाधीन सत्य साईं मातृत्व एवं शिशु चिकित्सालय जिलेवासियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। चिकित्सालय में आमजन को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध हो सकेंगी। इसमें नवजात शिशुओं एवं बच्चों के उपचार के साथ-साथ गर्भवती माताओं के लिए भी ऑपरेशन सहित सभी आवश्यक चिकित्सकीय सेवाएँ विशेषज्ञ चिकित्सकों के द्वारा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएँगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। इसी दिशा में जिले में मेडिकल कॉलेज, प्राकृतिक चिकित्सा एवं फिजियोथेरेपी केंद्र, शासकीय नर्सिंग कॉलेज तथा शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज का निर्माण कार्य भी किया जा रहा है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, कमिश्नर श्री नरेन्द्र कुमार दुग्गा, आईजी श्री दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी. एस. जात्रा सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।
पोषण पुनर्वास केंद्र में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की समुचित देखभाल
मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी. एस. जात्रा ने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र में 6 माह से 5 वर्ष तक की आयु के गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को उनकी माताओं के साथ 15 दिनों तक भर्ती रखा जाता है। इस अवधि के दौरान बच्चों को चिकित्सीय निगरानी, संतुलित पोषण एवं आवश्यक कौशल आधारित देखभाल प्रदान की जाती है, ताकि वे स्वस्थ होकर घर लौट सकें और भविष्य में कुपोषण से मुक्त रह सकें। केंद्र में बच्चों को दूध के साथ खिचड़ी, हलवा सहित अन्य पौष्टिक आहार दिए जाते हैं।
इसके साथ ही चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स को दवाई के रूप में उपलब्ध कराया जाता है, जिससे बच्चों की पोषण संबंधी कमी को दूर किया जा सके। कार्यक्रम के तहत बच्चों की माताओं को भी केंद्र में ही रहने एवं भोजन की सुविधा प्रदान की जाती है। साथ ही मां के खाते में 2250 रूपए क्षतिपूर्ति भुगतान भी किया जाता है। तथा शिशु पोषण, स्वच्छता एवं घर पर संतुलित आहार तैयार करने संबंधी व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है, ताकि माताएं घर लौटने के बाद भी बच्चों की बेहतर देखभाल कर सकें और उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास को सुनिश्चित किया जा सके।






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