... मामला जमीन आबंटन : "कांग्रेस" के राज में "बीजेपी" तलाश रही अपनी जमीन..? जब फंसा पेंच तो "तहसीलदार" ने दिया "स्थगन" नियम विरुद्ध आबंटन प्रक्रिया को लेकर कांग्रेसी मिलेंगे "प्रभारी मंत्री" से ,होगी कार्यवाही या रद्द होगा आबंटन .....बड़ा सवाल ?

मामला जमीन आबंटन : "कांग्रेस" के राज में "बीजेपी" तलाश रही अपनी जमीन..? जब फंसा पेंच तो "तहसीलदार" ने दिया "स्थगन" नियम विरुद्ध आबंटन प्रक्रिया को लेकर कांग्रेसी मिलेंगे "प्रभारी मंत्री" से ,होगी कार्यवाही या रद्द होगा आबंटन .....बड़ा सवाल ?

 


जशपुर,टीम पत्रवार्ता,14 दिसंबर 2020

इन दिनों जशपुर जिले के बगीचा में बीजेपी गुपचुप तरीके से अपने उस जमीन की तलाश कर रही है जिसे वह अपने 15 वर्षों के कार्यकाल में हासिल नहीं कर सकी।मामला तब सामने आया जब तहसील कार्यालय बगीचा में बीजेपी के मंडल अध्यक्ष ने बीजेपी कार्यालय के लिए तथाकथित आबंटित जमीन के सीमांकन व नक्शा दुरुस्तीकरण का आवेदन लगाया और हद तो तब हो गई  जब  बिना मूल प्रकरण के प्रकरण दर्ज कर इश्तेहार प्रकाशन व नक्शा दुरुस्तीकरण प्रस्ताव के लिए पटवारी को ज्ञापन का आदेश कर दिया गया ।जब मामले में आपत्ति आई तो नायब तहसीलदार ने विवेक का परिचय देते हुए तत्काल मामले में  स्थगन आदेश जारी करते हुए मामला यथावत रखने का निर्देश जारी कर दिया और प्रकरण के मूल दस्तावेज की मांग कर डाली 

क्या है मामला 

बीजेपी के बगीचा मंडल अध्यक्ष रामसलोने मिश्रा ने तहसीलदार के समक्ष आवेदन पेश किया है जिसमें उन्होंने उल्लेख किया है कि नगर पंचायत बगीचा के अंतर्गत शासकीय भूमि खसरा नंबर शासकीय भूमि ख0नं0 179 रकबा 0.081 हे0 भूमि में से 0.040 हे0 भूमि भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय हेतु रा0प्र0क्र0 23/अ-19(3)/2008-09 दर्ज होकर 07.02.2009 को हस्तांतरण होकर नामांतरण हुआ है।हांलाकि आबंटन सम्बन्धी कागजात बीजेपी के द्वारा  पेश नहीं किया गया है।प्रकरण की मूलप्रति कहाँ है .? यह किसी को पता नहींअब 11 साल के बाद बीजेपी सत्ता से उतरने के बाद अपने जमीन की तलाश कर रही है।फिलहाल बीजेपी की ओर से नक्शा दुरूस्त करने व  सीमांकन का आवेदन दिया गया है

मूल प्रकरण का पता नहीं ...? 

दरअसल बीजेपी के मंडल अध्यक्ष द्वारा पेश किये गए आवेदन में जमीन आबंटन सम्बन्धी दस्तावेज नहीं है।महज पुराने  बी-1,खसरा नक्शा, पांचसाला खसरा तथा सीमांकन शुल्क संलग्न कर बीजेपी तथाकथित आबंटित  जमीन के दुरुस्तीकरण में लगी हुई है।दरअसल आवेदित प्रकरण में जिस प्रकरण क्रमांक रा0प्र0क्र0 23/अ-19(3)/2008-09 का उल्लेख किया गया है उसकी कोई प्रति अब तक सामने नहीं आई है।जब उक्त जमीन के आबंटन की प्रक्रिया की गई तब बीजेपी सत्ता में थी और सत्ता के रसूख के दम पर सारे नियम कायदों को ताक में रखते हुए उक्त जमीन के आबंटन की प्रक्रिया किये जाने की बात सामने आ रही है

नहर की जमीन पर हुआ आबंटन ...?

उल्लेखनीय है कि जिस जमीन पर बीजेपी कार्यालय के लिए जमीन आबंटन की बात कही जा रही है उक्त जमीन पर साल के 12 महीने चलने वाली जीवित नहर है।राजस्व नियमों के अनुसार पानी के नीचे की भूमि का आबंटन नहीं किया जा सकता ऐसे में बड़ा सवाल यह भी है कि जब जमीन आबंटन की प्रक्रिया की गई तब मौका जांच पंचनामा में इसका उल्लेख क्यूँ नहीं किया गया..? और पानी के नीचे की जमीन का आबंटन क्यूँ किया गया ..?

पटवारी रिकार्ड में गड़बड़ी ..?

जब रा0प्र0क्र0 23/अ-19(3)/2008-09 के तहत कलेक्टर द्वारा जमीन के आबंटन का आदेश जारी किया गया तो पटवारी के पास कलेक्टर का उक्त आदेश क्यूँ नहीं है ...? सबसे बड़ा सवाल आखिर बिना आदेश के पटवारी ने अपने रिकार्ड को कैसे दुरुस्त कर दिया और उक्त भूमि का बी१ खसरा कैसे बना के दे दिया ..? फिलहाल यह जांच का विषय है जिसके बाद ही स्पस्ट हो सकेगा कि प्रकरण में कहाँ व किसके द्वारा लापरवाही बरती गई है

प्रभारी मंत्री के संज्ञान में मामला  

फिलहाल कांग्रेसियों ने प्रभारी मंत्री समेत स्थानीय विधायकों को मामले की जानकारी देते हुए जमीन के तथाकथित आबंटन की जाँच करने की मांग की है,अब देखना होगा कि प्रभारी मंत्री अमरजीत भगत कल पत्थलगांव दौरे पर मामले में क्या संज्ञान लेते हैं ...? वहीँ बीजेपी उक्त जमीन के लिए पूर्व में राशी जमा कर चुकी है ऐसे में यदि नियमों के कारण आबंटन निरस्त होता है तो बीजेपी को फिर दूसरी जमीन तलाश करनी पड़ेगी ...?

 

मामले में नायब तहसीलदार उदय राज सिंह ने बताया कि 14 दिसंबर को दावा आपत्ति का अंतिम दिन था जिसमें आपत्ति आने के बाद दुरुस्तीकरण सीमांकन की प्रक्रिया पर स्थगन दे दिया गया गया है वहीँ जमीन आबंटन के  मूल प्रकरण की मांग की गई है,जिसके आने के बाद ही जाँच कर आगे की कार्यवाही की जाएगी   


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