... मरणोपरांत भी समाज के लिए अपना फ़र्ज़ निभा गए रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल, किया देहदान, हैंडस ग्रुप के मुहिम से थे प्रेरित...

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मरणोपरांत भी समाज के लिए अपना फ़र्ज़ निभा गए रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल, किया देहदान, हैंडस ग्रुप के मुहिम से थे प्रेरित...








बिलासपुर,18 अगस्त2019(पत्रवार्ता) रविवार तड़के सुबह डॉ कालोनी निवासी रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल नेवी श्री रामकृष्ण काशीनाथ मोघे जी का 91 वर्ष की आयु में स्वर्गवास हो गया । उनकी इच्छा के अनुसार उनका देहदान सिम्स में किया गया। 

रिटायर लेफ्टिनेंट  हैंडस ग्रुप द्वारा चलाई जा रही मुहिम नेत्रदान और देहदान से प्रेरित थे। कुछ दिन पूर्व उन्होंने देहदान का फॉर्म भरा था । चूंकि वे  रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल थे और उन्होंने जीवन  भर देश की सेवा की हैं। वे भली-भांति जानते थे देहदान कितना जरूरी है उसकी महत्ता क्या है। 

गौरतलब है कि हैंड्स ग्रुप पिछले 5 वर्षों से लोगों को नेत्रदान और देहदान के लिए जागरूक करता आ रहा है। अभी तक ग्रुप के माध्यम से मरणोपरांत लगभग 230 लोगों ने नेत्रदान किया है और तकरीबन 10 लोगों ने देहदान किया है।

हमें क्यों करना चाहिए देहदान, क्यों है देहदान महादान ...?

बिलासपुर सिम्स की बात करें तो तकरीबन 180 विद्यार्थी MBBS डॉक्टर बनने की पढ़ाई कर रहे हैं। 10 बच्चों के लिए एक बॉडी होनी चाहिए पर देहदान कम होने की वजह से अभी 30 बच्चों को एक बॉडी पर रिसर्च करना पड़ता है।

भारत में 10 हजार लोगों के ऊपर एक डॉक्टर है, एक देहदान से तकरीबन 60 डॉक्टर बन सकते हैं रिसर्च करके के।

शरीर के इन भागों में रिसर्च होता है दिल, किडनी, लीवर,स्किन, हड्डियां एवं अन्य। हड्डियां कभी नहीं मरती उन पर कई साल तक रिसर्च होता है।

प्राइवेट कॉलेजों में बॉडी की उपलब्धता कई बार नहीं होने की वजह से पीपीटी के माध्यम से बच्चों को रिसर्च कराया जाता है।

हमें क्यों करना चाहिए नेत्रदान...? 

बिलासपुर सिम्स में अभी भी तकरीबन 85 लोग किसी के नेत्र का इंतजार कर रहे हैं। एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों के जीवन में रोशनी आती है। हैंड्स ग्रुप के माध्यम से 5 सालों में लगभग 230 लोगों ने मरणोपरांत नेत्रदान किया है , जिससे सैकड़ों जीवन रोशन हुए हैं।

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